गाजियाबाद: विशेष पॉक्सो कोर्ट ने तीन वर्षीय दलित बच्ची से दुष्कर्म के मामले में दस वर्ष बाद दोषी विकास कुमार को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश दीपिका तिवारी ने दोषी पर 50 हजार का जुमार्ना भी लगाया है। अदालत ने आदेश दिया कि यह पूरी राशि पीड़िता को प्रतिकर स्वरूप दी जाए।

यह मामला 28 दिसंबर 2015 का है, जब लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने शिकायत दी कि शाम करीब छह बजे उनकी तीन साल की बच्ची खेलते हुए लापता हो गई थी। खोजबीन के दौरान बच्ची को नहर के पास एक गड्ढे में रोते हुए पाया गया। वहां विकास कुमार उसे हवस का शिकार बना रहा था। लोगों ने मौके पर उसे दबोच लिया और पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

अदालत में बच्ची के पिता समेत तीन प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए गए। चिकित्सा रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने विकास को दोषी ठहराया। सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक संजीव बखरवा ने तर्क दिया कि यह अपराध न केवल पीड़िता के जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि समाज को भी विकृति की ओर ले जाता है। उन्होंने अधिकतम सजा की मांग की।

एक अपराध की नहीं दी जा सकती दो सजा: फैसले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अदालत इस तथ्य को लेकर सजग है कि ऐसे अपराधों से न केवल पीड़िता का जीवन प्रभावित होता है, बल्कि समाज की आत्मा भी आहत होती है। न्यायालय ने यह भी कहा कि एक ही अपराध के लिए दो बार दंड नहीं दिया जा सकता। इसलिए एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधानों से अभियुक्त को मुक्त करते हुए केवल पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत सजा दी गई।

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