PDDU जंक्शन पर 7.11 करोड़ का विदेशी सोना बरामद, पश्चिम बंगाल की महिला गिरफ्तार

Update: 2026-07-25 04:17 GMT

चंदौली : उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय (पीडीडीयू) रेलवे स्टेशन पर राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 7.11 करोड़ रुपये मूल्य का 4,983.360 ग्राम विदेशी सोना बरामद किया है। इस मामले में पश्चिम बंगाल की एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बरामद सोना बांग्लादेश के रास्ते पश्चिम बंगाल लाया गया था और वहां से इसे दिल्ली पहुंचाने की योजना थी। डीआरआई अब पूरे तस्करी नेटवर्क की जांच में जुट गई है।

जानकारी के अनुसार, डीआरआई की टीम को सोने की तस्करी से जुड़ी गोपनीय सूचना मिली थी। इसके आधार पर अधिकारियों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ा दी। गुरुवार शाम करीब 7:11 बजे संदिग्ध महिला की गतिविधियों पर नजर रखी गई और पूछताछ के बाद उसकी तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान अधिकारियों को महिला की कमर में बंधे एक लाल रंग के बैग में अखबार में सावधानी से छिपाकर रखे गए 42 विदेशी सोने के बिस्किट मिले।

जब्त किए गए सोने का कुल वजन 4,983.360 ग्राम पाया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 7.11 करोड़ रुपये बताई गई है। डीआरआई अधिकारियों ने मौके पर ही सोने को जब्त कर लिया और महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी।

प्रारंभिक पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कि सोना बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से पश्चिम बंगाल लाया गया था। वहां से उसे यह खेप दिल्ली पहुंचाने का जिम्मा सौंपा गया था। महिला ने कथित तौर पर बताया कि दिल्ली तक सोना सुरक्षित पहुंचाने के बदले उसे एक लाख रुपये पारिश्रमिक मिलने वाला था। हालांकि, डीआरआई इस बयान की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल एक महिला द्वारा सोना ले जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय और संभावित अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह सक्रिय होने की आशंका है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सोने की खेप किसने उपलब्ध कराई, इसे दिल्ली में किसे सौंपा जाना था और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।

डीआरआई को संदेह है कि तस्कर जांच एजेंसियों की नजर से बचने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। महिला द्वारा कमर में बंधे लाल बैग में अखबार के भीतर सोने के बिस्किट छिपाकर ले जाने का तरीका भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एजेंसी अब महिला के मोबाइल फोन, यात्रा विवरण, संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन देश के सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शनों में से एक है और पूर्वी भारत को उत्तर भारत से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रेल मार्ग है। इसी कारण यह स्टेशन तस्करी के मामलों में भी जांच एजेंसियों की विशेष निगरानी में रहता है। समय-समय पर यहां मादक पदार्थों, सोने, विदेशी मुद्रा और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी के मामलों का खुलासा होता रहा है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि हाल के वर्षों में सीमा पार से सोने की तस्करी के मामलों में वृद्धि देखी गई है। विशेष रूप से बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों के रास्ते सोने को भारत में लाकर विभिन्न महानगरों तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है। इसके लिए तस्कर अक्सर कैरियर के रूप में आम यात्रियों या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि संदेह कम हो।

डीआरआई अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार महिला के खिलाफ सीमा शुल्क अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसे न्यायालय में पेश किए जाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। साथ ही एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या महिला पहले भी इस प्रकार की तस्करी में शामिल रही है या यह उसका पहला मामला है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कई राज्यों तक फैल सकती है। पश्चिम बंगाल, दिल्ली और सीमा क्षेत्रों में सक्रिय संदिग्ध तस्करी नेटवर्क की गतिविधियों की भी जांच की जाएगी। यदि इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

डीआरआई ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें सोने या अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी से जुड़ी कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों को दें। अधिकारियों का कहना है कि जनता के सहयोग से ही ऐसे संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

फिलहाल इस कार्रवाई को हाल के समय में पीडीडीयू रेलवे स्टेशन पर सोने की तस्करी के खिलाफ हुई बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि जब्त की गई विदेशी सोने की खेप का अंतिम गंतव्य कौन था और इसके पीछे सक्रिय पूरे तस्करी नेटवर्क का संचालन किन लोगों द्वारा किया जा रहा था।

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