वाराणसी। केंद्र सरकार के पर्यटन सचिव भुवनेश कुमार ने रविवार दोपहर वाराणसी स्थित नागरीप्रचारिणी सभा का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सभा परिसर में नवनिर्मित तीन प्रमुख कलादीर्घाओं—‘षडंग’, ‘नेपथ्य’ और ‘प्रतिपदा’—का अवलोकन किया। इन दीर्घाओं को काशी की समृद्ध कला, साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं को पर्यटकों और कला प्रेमियों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

नागरीप्रचारिणी सभा पहुंचने पर पर्यटन सचिव ने परिसर में विकसित की गईं इन तीनों दीर्घाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने वहां प्रदर्शित सामग्री, कलाकृतियों और साहित्यिक धरोहरों के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों और सभा से जुड़े लोगों ने उन्हें दीर्घाओं की परिकल्पना, निर्माण और प्रदर्शित सामग्री के बारे में विस्तार से बताया।

‘षडंग’, ‘नेपथ्य’ और ‘प्रतिपदा’ दीर्घाओं को इस तरह तैयार किया गया है कि यहां आने वाले पर्यटक काशी की कला और साहित्यिक परंपराओं को करीब से समझ सकें। काशी केवल धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य, कला और संस्कृति के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। इन दीर्घाओं के माध्यम से इस सांस्कृतिक विरासत को नए तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

पर्यटन सचिव के दौरे का प्रमुख आकर्षण ‘षडंग’ प्रदर्शनी कक्ष रहा। यहां आयोजित प्रदर्शनी हिंदी के प्रसिद्ध संपादक और साहित्यकार आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी के कृतित्व पर आधारित है। प्रदर्शनी में उनके साहित्यिक योगदान और हिंदी पत्रकारिता व साहित्य के विकास में उनकी भूमिका को विभिन्न सामग्री के माध्यम से दर्शाया गया है।

‘षडंग’ प्रदर्शनी में हिंदी साहित्य के कई महत्वपूर्ण रचनाकारों की रचनाओं के पन्ने भी प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, मैथिलीशरण गुप्त, हीरा डोम, माधव राव सप्रे, बंगमहिला राजेंद्रबाला घोष और चंद्रधर शर्मा जैसे साहित्यकारों की रचनाएं शामिल हैं। इन साहित्यकारों की रचनाओं के मूल या ऐतिहासिक महत्व वाले पन्नों को प्रदर्शित कर हिंदी साहित्य के विकास की यात्रा को सामने लाने का प्रयास किया गया है।

प्रदर्शनी में रखी गई सामग्री साहित्य प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। हिंदी साहित्य के इतिहास में आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके संपादन और मार्गदर्शन के दौर में हिंदी साहित्य में भाषा, विचार और सामाजिक सरोकारों को नई दिशा मिली। प्रदर्शनी के माध्यम से उस दौर की साहित्यिक गतिविधियों और रचनात्मक वातावरण की झलक प्रस्तुत की गई है।

पर्यटन सचिव ने प्रदर्शनी में मौजूद विभिन्न साहित्यिक पन्नों और अन्य सामग्री को देखा। उन्होंने प्रदर्शनी के जरिए हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को पर्यटकों तक पहुंचाने के प्रयास की सराहना की। इस तरह की पहल से काशी आने वाले पर्यटकों को शहर की सांस्कृतिक पहचान के दूसरे महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का अवसर मिलेगा।

नागरीप्रचारिणी सभा लंबे समय से हिंदी भाषा और साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़ी संस्था रही है। ऐसे में परिसर में आधुनिक शैली में विकसित की गई कलादीर्घाएं ऐतिहासिक साहित्यिक विरासत और वर्तमान पर्यटन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम कर सकती हैं।

‘नेपथ्य’ और ‘प्रतिपदा’ दीर्घाओं का भी पर्यटन सचिव ने निरीक्षण किया। इन दीर्घाओं के माध्यम से काशी की सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की गई है। दीर्घाओं में प्रदर्शित सामग्री के जरिए पर्यटकों को काशी के साहित्य, कला और रचनात्मक परंपरा को समझने का अवसर मिलेगा।

काशी आने वाले पर्यटकों के लिए धार्मिक स्थलों के साथ-साथ सांस्कृतिक और साहित्यिक स्थलों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नागरीप्रचारिणी सभा की नई दीर्घाएं शहर के पर्यटन मानचित्र में एक नया आकर्षण जोड़ सकती हैं। यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक काशी की साहित्यिक यात्रा और उसके सांस्कृतिक विकास को प्रदर्शनी के माध्यम से समझ सकेंगे।

पर्यटन सचिव का दौरा ऐसे समय हुआ है जब वाराणसी में विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। काशी की ऐतिहासिक धरोहरों को आधुनिक प्रस्तुति के साथ पर्यटकों तक पहुंचाने की दिशा में विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। नागरीप्रचारिणी सभा की दीर्घाएं इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा मानी जा सकती हैं।

दौरे के दौरान पर्यटन सचिव ने दीर्घाओं की सामग्री और प्रस्तुति से जुड़े पहलुओं को समझा। उन्होंने वहां मौजूद अधिकारियों और संस्था के प्रतिनिधियों से भी जानकारी ली। साहित्यिक दस्तावेजों और ऐतिहासिक सामग्री को संरक्षित रखने तथा उन्हें अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के महत्व पर भी चर्चा हुई।

कुल मिलाकर भुवनेश कुमार का नागरीप्रचारिणी सभा दौरा काशी की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। ‘षडंग’, ‘नेपथ्य’ और ‘प्रतिपदा’ जैसी दीर्घाएं पर्यटकों को काशी के एक अलग और समृद्ध पक्ष से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विशेष रूप से ‘षडंग’ में आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी और हिंदी के प्रमुख साहित्यकारों की रचनाओं के पन्नों का प्रदर्शन साहित्य प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इन प्रयासों से काशी की कला और साहित्यिक परंपराओं को नई पीढ़ी और देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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