प्रसव के ऑपरेशन में पेट में कपड़ा छोड़ने का आरोप, हालत बिगड़ी तो दोबारा हुई सर्जरी
वाराणसी। लालपुर-पांडेयपुर क्षेत्र के एक अस्पताल पर प्रसव के दौरान गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगा है। लालपुर चौकी पर तैनात दीवान ओमप्रकाश सिंह ने आरोप लगाया है कि ऑपरेशन से प्रसव के दौरान उनकी पत्नी के पेट में कपड़े जैसी वस्तु छूट गई। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ती चली गई। दूसरे अस्पतालों में इलाज के बाद बीएचयू में जांच कराई गई, जहां पेट में अत्यधिक संक्रमण और कथित रूप से फॉरेन बॉडी होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद दोबारा ऑपरेशन कर पेट से वस्तु निकाले जाने का दावा किया गया है।
ओमप्रकाश सिंह ने पूरे मामले को लेकर लालपुर-पांडेयपुर थाने में तहरीर देकर जांच और जिम्मेदार पाए जाने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद तथ्यों के आधार पर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
आठ महीने तक चला था इलाज
ओमप्रकाश सिंह के मुताबिक उनकी गर्भवती पत्नी का करीब आठ महीने तक संबंधित अस्पताल में इलाज चला। गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से अस्पताल में जांच और चिकित्सकीय परामर्श लिया जाता रहा।
18 अगस्त को उनकी पत्नी को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराया गया। दो दिन अस्पताल में रहने के बाद 20 अगस्त को महिला को छुट्टी दे दी गई।
परिवार महिला को लेकर घर पहुंचा। उन्हें उम्मीद थी कि ऑपरेशन के बाद धीरे-धीरे महिला की सेहत सामान्य हो जाएगी, लेकिन घर पहुंचने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।
घर पहुंचते ही बिगड़ने लगी हालत
पति के मुताबिक अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद महिला को उल्टी सहित कई तरह की परेशानियां होने लगीं। शुरुआत में परिवार को लगा कि ऑपरेशन के बाद होने वाली सामान्य समस्या हो सकती है, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।
महिला की परेशानी बढ़ने पर उसे महाबीर मंदिर क्षेत्र स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया, लेकिन पति का दावा है कि महिला की सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
इसके बाद परिवार उसे बीएचयू अस्पताल लेकर पहुंचा। वहां डॉक्टरों ने महिला की स्थिति को देखते हुए विस्तृत जांच शुरू की।
अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन में मिला संक्रमण
ओमप्रकाश सिंह का कहना है कि बीएचयू में उनकी पत्नी का अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन कराया गया। जांच में पेट के अंदर अत्यधिक संक्रमण की स्थिति सामने आई।
पति के अनुसार चिकित्सकीय जांच के दौरान पेट में किसी बाहरी वस्तु यानी फॉरेन बॉडी होने की जानकारी भी सामने आई। इसके बाद डॉक्टरों ने महिला की स्थिति को देखते हुए दोबारा ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
ओमप्रकाश का आरोप है कि दूसरी सर्जरी के दौरान महिला के पेट से कपड़े जैसी वस्तु निकाली गई। उनका दावा है कि यह वस्तु प्रसव के लिए किए गए पहले ऑपरेशन के दौरान पेट में छूट गई थी।
हालांकि इस दावे की पुष्टि मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और विशेषज्ञ चिकित्सकीय राय के आधार पर होनी बाकी है।
दोबारा ऑपरेशन और पांच यूनिट खून चढ़ाने का दावा
पति का कहना है कि संक्रमण बढ़ जाने के कारण उनकी पत्नी को दोबारा बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा। इस दौरान पेट से कथित फॉरेन बॉडी को निकाला गया।
ओमप्रकाश के मुताबिक महिला की हालत गंभीर होने के कारण इलाज के दौरान पांच यूनिट रक्त भी चढ़ाना पड़ा। दोबारा ऑपरेशन और लगातार उपचार के बाद भी महिला की सेहत पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
परिवार का कहना है कि पूरे घटनाक्रम ने महिला को शारीरिक परेशानी देने के साथ परिवार को भी मानसिक तनाव में डाल दिया है।
पुलिसकर्मी पति ने दी तहरीर
पत्नी की हालत में पूरी तरह सुधार नहीं होने के बाद ओमप्रकाश सिंह ने लालपुर-पांडेयपुर थाने में शिकायत दी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि चिकित्सकीय लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के लिए संबंधित अस्पताल की डिस्चार्ज समरी, पहले ऑपरेशन का रिकॉर्ड, बाद में कराई गई जांच और बीएचयू में हुए दूसरे ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
पुलिस आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज कर सकती है।
मेडिकल दस्तावेजों से स्पष्ट होगी तस्वीर
इस तरह के मामले में चिकित्सकीय लापरवाही निर्धारित करने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ राय महत्वपूर्ण होती है। यह पता लगाया जाना जरूरी होगा कि महिला के पेट से निकली बताई जा रही वस्तु वास्तव में क्या थी और वह किस परिस्थिति में पेट में पहुंची।
पहली सर्जरी के ऑपरेशन नोट्स और दूसरी सर्जरी के रिकॉर्ड का मिलान भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है। अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और संक्रमण से संबंधित रिपोर्ट भी जांच का हिस्सा बन सकती हैं।
यदि दूसरी सर्जरी में कोई फॉरेन बॉडी निकाली गई थी तो उससे संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड भी यह समझने में मदद करेगा कि वह क्या थी और डॉक्टरों ने उसके बारे में क्या दर्ज किया।
अस्पताल और डॉक्टरों का पक्ष भी जरूरी
मामले में अस्पताल और चिकित्सकों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित अस्पताल का पक्ष और उसके पास मौजूद चिकित्सा रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोपों के आधार पर अस्पताल या किसी डॉक्टर को दोषी नहीं माना जा सकता। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इलाज के दौरान निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या महिला की हालत के पीछे कोई अन्य चिकित्सकीय कारण था।
यदि अस्पताल प्रबंधन की ओर से मामले पर कोई आधिकारिक जवाब दिया जाता है तो वह भी जांच में महत्वपूर्ण होगा।
चिकित्सकीय लापरवाही की जांच होगी अहम
ऑपरेशन के दौरान किसी मेडिकल सामग्री के शरीर के अंदर छूट जाने का आरोप गंभीर माना जाता है। हालांकि इस मामले में आरोप की सत्यता स्थापित करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच जरूरी होगी।
पुलिस मेडिकल विशेषज्ञों की राय लेकर यह पता कर सकती है कि महिला की स्थिति और संक्रमण का कारण क्या था। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि पहले अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।
जांच में यदि लापरवाही से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई हो सकती है।
परिवार ने की कार्रवाई की मांग
ओमप्रकाश सिंह का कहना है कि उनकी पत्नी को पहले प्रसव के लिए ऑपरेशन कराना पड़ा और इसके बाद कथित लापरवाही के कारण दोबारा सर्जरी से गुजरना पड़ा। लगातार इलाज के बावजूद महिला अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुई है।
इसी वजह से उन्होंने पुलिस से मामले की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
परिवार चाहता है कि इलाज के सभी रिकॉर्ड की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि महिला के पेट में कथित फॉरेन बॉडी कैसे पहुंची।
जांच के बाद होगी विधिक कार्रवाई
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट और अस्पताल से मिलने वाले रिकॉर्ड को देखा जाएगा।
जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय भी ली जा सकती है। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि मामले में किसी तरह की आपराधिक लापरवाही का आधार बनता है या नहीं।
फिलहाल पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य दूसरी सर्जरी और उसमें कथित रूप से निकाली गई वस्तु से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड होंगे। इन्हीं दस्तावेजों से शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि या खंडन में मदद मिलेगी।
महिला की हालत पूरी तरह सामान्य नहीं होने की बात कहते हुए पति ने जल्द जांच और कार्रवाई की मांग की है। अब पुलिस जांच और चिकित्सा दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा कि प्रसव के दौरान वास्तव में कोई वस्तु पेट में छूट गई थी या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो इसके लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है।