मीरजापुर। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री को लेकर विंध्याचल परिक्षेत्र की पुलिस ने सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। विंध्याचल परिक्षेत्र मीरजापुर की पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) पूनम ने सोनभद्र, मीरजापुर और भदोही के पुलिस अधीक्षकों समेत अन्य अधिकारियों के साथ गूगल मीट के माध्यम से बैठक कर अपराध और कानून-व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया की नियमित निगरानी करने और कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
डीआईजी ने अधिकारियों से कहा कि एक्स (पूर्व में ट्विटर), व्हाट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विशेष सतर्कता रखी जाए। ऐसी सामग्री जो कानून-व्यवस्था प्रभावित कर सकती हो या जिसके संबंध में शिकायत प्राप्त हो, उसका तत्काल सत्यापन कराया जाए। जांच में कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए।
सोशल मीडिया की निगरानी बढ़ाने के निर्देश
बैठक में सोशल मीडिया की निगरानी प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। डीआईजी ने तीनों जिलों के अधिकारियों से कहा कि इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित होने वाली सामग्री पर सतर्क नजर रखना जरूरी है। कई बार बिना पुष्टि के कोई सूचना, तस्वीर या वीडियो तेजी से वायरल हो जाता है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि संवेदनशील मामलों से जुड़ी वायरल पोस्ट की सत्यता जल्द जांची जाए। पुरानी तस्वीरों और वीडियो को वर्तमान घटना से जोड़कर प्रसारित करने या भ्रामक संदर्भ के साथ सामग्री साझा किए जाने जैसी शिकायतों पर भी नजर रखी जाए।
हालांकि किसी पोस्ट को केवल आलोचनात्मक या असहमति वाला होने के आधार पर आपत्तिजनक नहीं माना जा सकता। किसी भी कार्रवाई का आधार लागू कानून, पोस्ट की वास्तविक सामग्री और उसके संदर्भ की जांच होना जरूरी है।
तीन जिलों के अधिकारियों से किया संवाद
डीआईजी पूनम ने गूगल मीट के जरिए मीरजापुर, सोनभद्र और भदोही के पुलिस अधीक्षकों तथा अन्य अधिकारियों के साथ संवाद किया। इस दौरान परिक्षेत्र की वर्तमान कानून-व्यवस्था और अपराध की स्थिति की समीक्षा की गई।
तीनों जिलों में लंबित मामलों, विवेचनाओं की प्रगति और कानून-व्यवस्था से संबंधित विषयों पर अधिकारियों से जानकारी ली गई। डीआईजी ने संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखने और महत्वपूर्ण मामलों में समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाली सूचनाओं को गंभीरता से लिया जाए, लेकिन किसी कार्रवाई से पहले उनकी सत्यता की जांच भी की जाए।
भ्रामक सूचनाओं का जल्द हो सत्यापन
सोशल मीडिया पर कोई सूचना कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में गलत सूचना भी तेजी से फैल सकती है। इसे देखते हुए पुलिस को वायरल सामग्री की समय पर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि किसी घटना से संबंधित गलत जानकारी प्रसारित हो रही है तो पुलिस सत्यापित जानकारी के जरिए स्थिति स्पष्ट कर सकती है। इससे अफवाहों और भ्रम को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।
विशेष रूप से संवेदनशील मामलों में सोशल मीडिया पोस्ट का वास्तविक स्रोत और संदर्भ पता करना महत्वपूर्ण होता है। फोटो या वीडियो कहां का है और कब रिकॉर्ड किया गया था, इसकी पुष्टि किए बिना वायरल दावों को सही नहीं माना जा सकता।
कानून के दायरे में होगी कार्रवाई
डीआईजी की ओर से सोशल मीडिया पर नजर रखने के साथ ही कानून के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा गया है। यदि किसी पोस्ट में ऐसा तत्व पाया जाता है जो लागू कानून का उल्लंघन करता हो तो तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।
सोशल मीडिया की निगरानी करते समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। सामान्य आलोचना, विचार या असहमति और कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री के बीच अंतर किया जाना चाहिए।
इसलिए पुलिस की कार्रवाई किसी पोस्ट के पूरे संदर्भ, उसके प्रभाव और संबंधित कानूनी प्रावधानों की जांच के बाद ही होनी चाहिए।
लंबित विवेचनाओं के निस्तारण पर जोर
अपराध समीक्षा के दौरान डीआईजी ने लंबित विवेचनाओं पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि लंबे समय से लंबित मामलों की समीक्षा कर उनका गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण किया जाए।
जांच अधिकारियों को मामलों से संबंधित साक्ष्य एकत्र करने, गवाहों के बयान दर्ज करने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। गंभीर अपराधों की विवेचना में अनावश्यक देरी नहीं होने देने पर जोर दिया गया।
लंबित विवेचनाओं की संख्या कम करने के साथ जांच की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
कानून-व्यवस्था की हुई समीक्षा
बैठक के दौरान तीनों जिलों की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों से संवेदनशील क्षेत्रों और प्रमुख घटनाओं के संबंध में जानकारी ली गई।
डीआईजी ने अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में नियमित निगरानी और आवश्यकतानुसार गश्त सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्थानीय स्तर पर सामने आने वाले विवादों और संवेदनशील मामलों में समय रहते कार्रवाई करने को कहा गया ताकि स्थिति गंभीर होने से पहले नियंत्रित की जा सके।
साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के कामकाज की नियमित समीक्षा करने और महत्वपूर्ण मामलों की निगरानी स्वयं करने के निर्देश दिए गए।
वायरल पोस्ट पर तुरंत भरोसा न करने की जरूरत
पुलिस की सतर्कता के साथ आम लोगों की जागरूकता भी सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी सनसनीखेज पोस्ट, वीडियो या तस्वीर को आगे भेजने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है।
खासकर ऐसी सामग्री जो किसी व्यक्ति या समुदाय के बारे में गंभीर दावा करती हो, उसे बिना पुष्टि साझा करने से बचना चाहिए। किसी संदिग्ध या गंभीर सामग्री की जानकारी संबंधित प्लेटफॉर्म और आवश्यक होने पर स्थानीय पुलिस को दी जा सकती है।
साइबर निगरानी पर बढ़ेगा फोकस
सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ पुलिस के सामने ऑनलाइन माध्यम से फैलने वाली गलत सूचनाओं की पहचान भी चुनौती बनती जा रही है। इसी वजह से जिला स्तर पर सोशल मीडिया और साइबर निगरानी को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
डीआईजी पूनम ने तीनों जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े मामलों में भी सतर्कता जरूरी है। साथ ही लंबित विवेचनाओं का समय पर निस्तारण कर पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
विंध्याचल परिक्षेत्र के मीरजापुर, सोनभद्र और भदोही में अब सोशल मीडिया पर सामने आने वाली संदिग्ध सामग्री की निगरानी और सत्यापन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश है कि किसी मामले में कानून का उल्लंघन मिलने पर साक्ष्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।