वाराणसी। देश के होटल और रेस्तरां उद्योग के शीर्ष संगठन फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) का 56वां वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन रविवार को भव्य समापन समारोह के साथ संपन्न हो गया। तीन दिनों तक चले इस महाधिवेशन में देशभर से होटल, रेस्तरां, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का आयोजन वाराणसी के ताज होटल में किया गया।
इस वर्ष के सम्मेलन की थीम ‘अनंत काशी: अध्यात्म, संस्कृति, व्यंजन और शिल्प से पर्यटन के भविष्य का नेतृत्व’ रखी गई थी। सम्मेलन के दौरान काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ देश के पर्यटन उद्योग की संभावनाओं, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के विकास और बदलते दौर में पर्यटकों की जरूरतों पर व्यापक चर्चा हुई।
समापन सत्र और एफएचआरएआई एक्सीलेंस अवार्ड फॉर हॉस्पिटैलिटी स्टूडेंट्स एंड हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत रहे। उन्होंने हॉस्पिटैलिटी उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को संबोधित किया। इस दौरान पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की भूमिका को देश की अर्थव्यवस्था तथा रोजगार के अवसरों से जोड़कर देखा गया।
समारोह के मंच पर एफएचआरएआई अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार जायसवाल, उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य और पर्यटन उद्यमी लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ सहित संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। समापन सत्र की शुरुआत कन्वेंशन आयोजन समिति के अध्यक्ष गरिश ओबेराय के स्वागत भाषण से हुई।
काशी को पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में देखने पर जोर
तीन दिवसीय सम्मेलन में काशी को केवल धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता, संस्कृति, खान-पान, शिल्प और आधुनिक आतिथ्य के संगम के रूप में प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन की थीम में भी इन्हीं पहलुओं को प्रमुखता दी गई।
प्रतिनिधियों ने कहा कि वाराणसी की पहचान सदियों पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी है। गंगा घाट, मंदिर, संगीत, साहित्य, हस्तशिल्प और स्थानीय खान-पान देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। ऐसे में हॉस्पिटैलिटी उद्योग इन सभी पहलुओं को पर्यटन अनुभव के साथ जोड़कर काशी की पहचान को और व्यापक बना सकता है।
सम्मेलन के दौरान पर्यटन क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों पर भी चर्चा हुई। पर्यटकों की पसंद बदलने के साथ होटल और रेस्तरां उद्योग के सामने नई चुनौतियां और अवसर पैदा हो रहे हैं। डिजिटल तकनीक, बेहतर ग्राहक सेवा, स्थानीय व्यंजन, अनुभव आधारित पर्यटन और टिकाऊ पर्यटन जैसे विषय हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बनते जा रहे हैं।
हॉस्पिटैलिटी शिक्षा और युवाओं पर विशेष ध्यान
समापन समारोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हॉस्पिटैलिटी विद्यार्थियों और उद्योग से जुड़े उत्कृष्ट लोगों को सम्मानित करना रहा। एफएचआरएआई एक्सीलेंस अवार्ड के माध्यम से हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में प्रतिभा, समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन को प्रोत्साहित किया गया।
उद्योग के प्रतिनिधियों ने कहा कि पर्यटन के विस्तार के साथ प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता भी बढ़ेगी। होटल, रेस्तरां, ट्रैवल और अन्य पर्यटन सेवाओं में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। ऐसे में हॉस्पिटैलिटी शिक्षा संस्थानों और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
स्थानीय संस्कृति और व्यंजनों को बढ़ावा
सम्मेलन की थीम का एक प्रमुख हिस्सा स्थानीय व्यंजन और शिल्प भी रहा। विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी पर्यटन स्थल की पहचान केवल उसके ऐतिहासिक स्मारकों या धार्मिक स्थलों से नहीं होती, बल्कि वहां की संस्कृति, भोजन और स्थानीय कला भी पर्यटकों के अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
काशी का खान-पान और यहां की पारंपरिक कला एवं शिल्प इसकी विशिष्ट पहचान हैं। स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों को पर्यटन उद्योग से जोड़ने से छोटे कारोबारियों, कारीगरों और स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। इस दिशा में होटल और रेस्तरां उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उद्योग और सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत
महाधिवेशन के दौरान पर्यटन उद्योग और सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। होटल और रेस्तरां उद्योग देश के पर्यटन ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पर्यटन बढ़ने के साथ आवास, भोजन, परिवहन और अन्य सेवाओं की मांग में भी वृद्धि होती है।
उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि पर्यटन स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं, कनेक्टिविटी, स्वच्छता और सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है। इससे पर्यटकों का अनुभव बेहतर होगा और वे अधिक समय तक किसी स्थान पर ठहरने के लिए प्रेरित होंगे।
वाराणसी जैसे शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के साथ आधुनिक हॉस्पिटैलिटी सुविधाओं का विस्तार स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन ने इस बात पर भी ध्यान आकर्षित किया कि पर्यटन से जुड़े विकास का लाभ स्थानीय लोगों और छोटे उद्यमियों तक पहुंचना चाहिए।
तीन दिनों तक चला विचार-विमर्श
एफएचआरएआई के 56वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के तीन दिनों के दौरान हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन उद्योग से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें उद्योग के मौजूदा परिदृश्य, भविष्य की संभावनाओं और बदलती पर्यटक प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई।
समापन सत्र में सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों और अतिथियों ने काशी की सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के भविष्य से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम ने होटल और रेस्तरां उद्योग के साथ पर्यटन, संस्कृति, कला और स्थानीय अर्थव्यवस्था के बीच संबंध को भी सामने रखा।
एफएचआरएआई का यह सम्मेलन ऐसे समय संपन्न हुआ है जब भारत में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन लगातार नए अवसर पैदा कर रहा है। सम्मेलन में सामने आए विचारों के जरिए हॉस्पिटैलिटी उद्योग को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने और भारत के पर्यटन क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर दिया गया।
भव्य समापन समारोह के साथ तीन दिवसीय महाधिवेशन का समापन हुआ। आयोजकों और प्रतिभागियों ने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में हुई चर्चाएं पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग को नई दिशा देने में मदद करेंगी। काशी की आध्यात्मिकता, संस्कृति, व्यंजन और शिल्प को केंद्र में रखकर आयोजित इस सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि भारत के पर्यटन भविष्य में स्थानीय विरासत और आधुनिक हॉस्पिटैलिटी का संयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।