बिजली चोरी में देवबंद प्रदेश में अव्वल, 70 प्रतिशत से अधिक चोरी का खुलासा
देवबंद। प्रदेशभर में बिजली चोरी के बढ़ते मामलों के बीच सहारनपुर जनपद के देवबंद कस्बे ने विद्युत विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विभागीय जांच और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के आंकड़ों के मुताबिक देवबंद नगर में बिजली चोरी का स्तर 70 प्रतिशत से अधिक पाया गया है। इसके साथ ही देवबंद प्रदेश में बिजली चोरी के मामलों में पहले स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, जनपद का नकुड़ कस्बा भी बिजली चोरी के मामले में प्रदेश में चौथे स्थान पर है। लगातार बढ़ रही बिजली चोरी को रोकने के लिए विद्युत निगम ने अब सख्ती बढ़ाते हुए मार्निंग रेड अभियान शुरू कर दिया है।
विद्युत विभाग के अनुसार, पिछले चार महीनों के दौरान देवबंद में 317 स्थानों पर बिजली चोरी पकड़ी गई। इसी अवधि में नकुड़ में 138 स्थानों पर बिजली चोरी के मामले सामने आए। विभाग ने सभी मामलों में संबंधित आरोपितों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और अधिक बिजली चोरी वाले क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाएगा।
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के आंकड़ों में देवबंद नगर में करीब 70 प्रतिशत बिजली चोरी सामने आने के बाद विभाग ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। बिजली चोरी से न केवल निगम को राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि ईमानदारी से बिजली बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं पर भी इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ता है। इसके अलावा अवैध कनेक्शनों के कारण विद्युत व्यवस्था पर अतिरिक्त भार पड़ने और लाइन लॉस बढ़ने की समस्या भी सामने आती है।
देवबंद में विद्युत निगम के अवर अभियंता विष्णु कोठारी ने बताया कि ऊर्जा निगम की ओर से जारी उच्च राजस्व हानि वाले फीडरों की सूची के आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की गई है। विभाग ने ऐसे इलाकों में बिजली चोरी रोकने के लिए अभियान तेज कर दिया है। उन्होंने बताया कि विद्युत वितरण खंड देवबंद के कई फीडरों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में बिजली चोरी के मामले सबसे अधिक पाए गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक फीडर टाउन-5 के अंतर्गत पठानपुरा, दगड़ा, किला सहित आसपास के क्षेत्रों में बिजली चोरी के मामले बड़ी संख्या में दर्ज किए गए हैं। इसी तरह टाउन नंबर-3 के अंतर्गत कायस्थवाड़ा और उससे जुड़े मोहल्लों में भी बिजली चोरी की स्थिति गंभीर बताई गई है। फीडर टाउन-1ए के अंतर्गत एसडीएम कोर्ट, लहसवाड़ा और आसपास के इलाकों में भी विभाग ने अधिक बिजली चोरी दर्ज की है।
विभाग ने इन इलाकों को विशेष निगरानी वाले क्षेत्रों में शामिल करते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि बिजली चोरी के मामलों में लगातार निगरानी की जा रही है और आवश्यकता के अनुसार औचक जांच की जाएगी। इसी क्रम में सुबह के समय घरों और प्रतिष्ठानों पर जांच के लिए मार्निंग रेड अभियान शुरू किया गया है।
मार्निंग रेड का उद्देश्य उन उपभोक्ताओं को पकड़ना है जो सुबह के समय बिजली की अधिक खपत करते हैं या अवैध तरीके से बिजली का इस्तेमाल करते हैं। विभागीय टीमें निर्धारित क्षेत्रों में अचानक पहुंचकर कनेक्शनों और मीटरों की जांच कर रही हैं। जांच के दौरान बिजली चोरी मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है।
देवबंद के बाद नकुड़ भी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रदेश में बिजली चोरी के मामले में नकुड़ के चौथे स्थान पर रहने से अधिकारियों की चिंता बढ़ी है। पिछले चार महीनों में नकुड़ में 138 स्थानों पर बिजली चोरी पकड़ी गई। विभाग का कहना है कि बिजली चोरी रोकने के लिए वहां भी लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
विद्युत निगम की कार्रवाई का असर राजस्व वसूली पर भी पड़ने की उम्मीद है। अधिक बिजली चोरी वाले फीडरों में लाइन लॉस कम करने और राजस्व हानि को नियंत्रित करने के लिए विभाग ने विशेष रणनीति तैयार की है। अधिकारियों के अनुसार, केवल छापेमारी ही नहीं बल्कि उपभोक्ताओं को वैध कनेक्शन लेने और नियमित रूप से बिजली बिल जमा करने के लिए भी जागरूक किया जाएगा।
विभाग का कहना है कि बिजली चोरी विद्युत व्यवस्था के लिए गंभीर समस्या है। अवैध कनेक्शन और मीटर में छेड़छाड़ जैसी गतिविधियों के कारण विद्युत निगम को आर्थिक नुकसान होता है। साथ ही बिजली के तारों और ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त भार पड़ने से आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कई मामलों में अवैध कनेक्शन सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम पैदा करते हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिजली चोरी के खिलाफ अभियान में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उच्च राजस्व हानि वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जाएगी और चोरी पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। पिछले चार महीनों में दर्ज किए गए 455 मामलों से भी अभियान की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
देवबंद में 70 प्रतिशत से अधिक बिजली चोरी का आंकड़ा सामने आने के बाद अब निगम का विशेष ध्यान कस्बे के उन क्षेत्रों पर है जहां चोरी के मामले सबसे अधिक दर्ज हुए हैं। पठानपुरा, दगड़ा, किला, कायस्थवाड़ा, लहसवाड़ा और अन्य चिन्हित क्षेत्रों में आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल बिजली निगम ने मार्निंग रेड के जरिए बिजली चोरी पर अंकुश लगाने की कवायद शुरू कर दी है। देवबंद के प्रदेश में पहले और नकुड़ के चौथे स्थान पर होने के बाद विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती चोरी रोकने के साथ राजस्व हानि को कम करना है। आने वाले दिनों में होने वाली जांच और कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि विशेष अभियान के बाद बिजली चोरी के आंकड़ों में कितनी कमी आती है।