अलीगढ़ : यदि आपका बच्चा बाएं हाथ से लिखता, खेलता या रोजमर्रा के दूसरे काम करता है तो उसे जबरन दाएं हाथ का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर न करें। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बाएं हाथ का इस्तेमाल करना कोई बीमारी या कमी नहीं, बल्कि एक सामान्य और प्राकृतिक विशेषता है। बच्चे की इस सहज प्रवृत्ति को बदलने का दबाव उसके आत्मविश्वास, सीखने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
विश्व लेफ्ट हैंडर्स डे के अवसर पर जेएन मेडिकल कॉलेज और पीडियाट्रिक डॉक्टरों से जुड़े अध्ययन एवं अनुभवों के आधार पर यह जानकारी साझा की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई घरों और विद्यालयों में आज भी बाएं हाथ से लिखने वाले बच्चों को दाएं हाथ से काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। कुछ मामलों में डांट, मार या दूसरे प्रकार की सजा भी दी जाती है, जो बच्चे के मन पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।
बच्चे का बायां हाथ बांधने का मामला आया सामने
विशेषज्ञों ने हाल में सामने आए एक मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि एक बच्चे को विद्यालय में दाएं हाथ से लिखने के लिए मजबूर किया गया। कथित तौर पर शिक्षक ने उसका बायां हाथ बांध दिया और उसे प्रताड़ित किया। इससे बच्चा गहरे मानसिक आघात में चला गया और उसने कुछ समय के लिए बोलना बंद कर दिया।
डॉक्टरों का कहना है कि पिछले एक वर्ष के दौरान ऐसे एक दर्जन से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें बच्चों पर उनकी प्राकृतिक प्रवृत्ति बदलने का दबाव डाला गया। हालांकि, प्रत्येक बच्चे पर इसका प्रभाव अलग हो सकता है। इसलिए व्यवहार में अचानक बदलाव, डर, तनाव या पढ़ाई में परेशानी दिखाई देने पर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
मस्तिष्क की सक्रियता से जुड़ी है सहज प्रवृत्ति
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप बंसल ने बताया कि प्रत्येक बच्चे का ब्रेन डोमिनेंस अलग हो सकता है। मस्तिष्क का कौन सा हिस्सा अधिक सक्रिय है, इसके आधार पर बच्चा किसी एक हाथ का स्वाभाविक रूप से अधिक इस्तेमाल करता है। ऐसे में उस पर दूसरे हाथ से लिखने या काम करने का दबाव डालना उचित नहीं है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मेहरोत्रा के अनुसार, किसी बच्चे की जन्मजात प्रवृत्ति को जबरन बदलने की कोशिश उसके आत्मविश्वास को नुकसान पहुंचा सकती है। परिवार और शिक्षकों को समझना चाहिए कि बाएं हाथ का उपयोग करना सामान्य बात है। बच्चे को स्वीकार करने और सहयोग देने से वह अपनी क्षमताओं का बेहतर विकास कर सकता है।
दबाव डालने से सामने आ सकती हैं समस्याएं
विशेषज्ञों के अनुसार, जब बच्चे को लगातार दाएं हाथ से काम करने के लिए मजबूर किया जाता है तो वह तनाव, उलझन और असहजता महसूस कर सकता है। कुछ बच्चों में हकलाहट, पढ़ने-लिखने में परेशानी, एकाग्रता की कमी तथा गंभीर मानसिक तनाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक बच्चे में ये समस्याएं उत्पन्न हों, लेकिन दबाव और प्रताड़ना से इनके बढ़ने का खतरा हो सकता है।
अभिभावकों को बच्चे की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए। शिक्षकों को भी उसकी लिखने की शैली के अनुसार बैठने की जगह, कॉपी रखने का तरीका और उपयुक्त स्टेशनरी जैसी सुविधाएं देनी चाहिए। बाएं हाथ से लिखने वाले बच्चे को पर्याप्त जगह देने से वह अधिक सहजता से काम कर सकता है।
बाएं हाथ से काम करने वालों ने बनाई पहचान
दुनिया में अधिकांश वस्तुएं दाएं हाथ से काम करने वालों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। इसके बावजूद अनेक बाएं हाथ के लोगों ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। अलीगढ़ से जुड़े क्रिकेटर रिंकू सिंह, अभिनेता सईद जाफरी और शिक्षाविद प्रोफेसर सिरास इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
इसके अतिरिक्त अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, महान क्रिकेटर मुश्ताक अली और हॉकी खिलाड़ी जफर इकबाल सहित कई प्रतिभाओं ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। विशेषज्ञों का संदेश है कि बच्चे के हाथ की प्राथमिकता बदलने के बजाय उसकी प्रतिभा को प्रोत्साहित किया जाए। सहयोग और स्वीकार्यता ही उसके आत्मविश्वास एवं बेहतर भविष्य की मजबूत नींव बन सकती है।