उत्तर प्रदेश

धोती और उत्तरीय पहनेंगे राम मंदिर के पुजारी

Ratna Netam
13 Aug 2026 3:34 PM IST
धोती और उत्तरीय पहनेंगे राम मंदिर के पुजारी
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अयोध्या : राम जन्मभूमि मंदिर में पूजा व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और पारंपरिक स्वरूप देने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। अब श्रीरामलला की सेवा और पूजा करने वाले सभी अर्चक एक समान वेशभूषा में दिखाई देंगे। मंदिर में नया ड्रेस कोड 15 अगस्त से लागू किया जाएगा। इसके तहत सभी अर्चकों के लिए पीत रंग के वस्त्र धारण करना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के अनुसार गर्मी के मौसम में अर्चक नीचे पीत रंग की धोती और ऊपर उत्तरीय वस्त्र धारण करेंगे। अर्चकों को दिए जाने वाले ये वस्त्र सिले हुए नहीं होंगे। इसके लिए बिना सिले हुए रेशमी वस्त्रों का उपयोग किया जाएगा। मंदिर की धार्मिक समिति ने वैष्णव परंपरा, धार्मिक मर्यादा और शुचिता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है।
मौसम के अनुसार बदलेगा वस्त्र
मौसम बदलने पर अर्चकों के वस्त्र की प्रकृति में परिवर्तन किया जाएगा, लेकिन वस्त्रों का रंग पीत ही रहेगा। गर्मी के दिनों में रेशमी वस्त्र दिए जाएंगे, जबकि शरद ऋतु और ठंड के मौसम में अर्चकों को मौसम के अनुकूल ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराए जाएंगे। धार्मिक समिति के अनुसार रेशमी और ऊनी वस्त्र पूजा तथा धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान शुचिता की दृष्टि से उपयुक्त माने जाते हैं।
धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास ने बताया कि नया ड्रेस कोड 15 अगस्त से प्रभावी हो जाएगा। इसके लागू होने के बाद राम मंदिर में पूजा करने वाले सभी अर्चकों की वेशभूषा एक समान नजर आएगी। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से पूजा व्यवस्था में अनुशासन और एकरूपता आएगी।
वैष्णव परंपरा का होगा पालन
धार्मिक समिति से जुड़े सदस्यों के अनुसार वैष्णव परंपरा में गर्भगृह की मर्यादा का विशेष महत्व है। मंदिर का गर्भगृह वह पवित्र स्थान है, जहां भगवान का श्रीविग्रह विराजमान होता है। ऐसे स्थान पर प्रवेश करने और पूजा करने वाले अर्चकों को धार्मिक आचार संहिता तथा पूर्वाचार्यों द्वारा निर्धारित परंपराओं का पालन करना आवश्यक माना जाता है।
समिति का कहना है कि इसी परंपरा के आधार पर सभी अर्चकों के लिए पीतांबरी उत्तरीय और धोती अनिवार्य की गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गर्भगृह में पूजा के दौरान बिना सिले हुए वस्त्र धारण करने की परंपरा रही है। इसी कारण नए ड्रेस कोड में सिले हुए कपड़ों को शामिल नहीं किया गया है।
निर्धारित रोस्टर के अनुसार होती है ड्यूटी
श्रीरामलला के अर्चकों की ड्यूटी निर्धारित रोस्टर के अनुसार लगाई जाती है। यह रोस्टर प्रत्येक महीने अमावस्या और पूर्णिमा के आधार पर बदला जाता है। जिस समूह के अर्चकों की ड्यूटी एक पखवाड़े के दौरान सुबह की पाली में होती है, अगले निर्धारित चरण में उन्हें शाम की पाली में भेज दिया जाता है। इसी प्रकार शाम की पाली में सेवा देने वाला समूह सुबह की पाली में आ जाता है।
बताया गया है कि सावन कृष्ण अमावस्या के दौरान सुबह की पाली में तैनात अर्चक प्रतिपदा से शाम की पाली में सेवा देंगे। वहीं, शाम की पाली में तैनात अर्चकों को सुबह की पाली की जिम्मेदारी मिलेगी। सावन शुक्ल पूर्णिमा पर यह रोस्टर पूरा होने के बाद भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा से नई सूची के अनुसार अर्चकों की ड्यूटी शुरू होगी।
एकरूप दिखाई देगी पूजा व्यवस्था
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन और पूजा से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर बदलाव किए जाते हैं। अब अर्चकों की वेशभूषा को लेकर लागू होने वाली नई व्यवस्था इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पीत रंग को धार्मिक परंपराओं में पवित्रता और आध्यात्मिकता से जोड़कर देखा जाता है। नए ड्रेस कोड के लागू होने से जहां अर्चकों की पहचान स्पष्ट होगी, वहीं मंदिर की पूजा व्यवस्था अधिक पारंपरिक और एकरूप दिखाई देगी।
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