लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय युवा केंद्र (JPNIC) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल पार्टी के नाम में "समाजवादी" शब्द जोड़ लेने से कोई समाजवादी नहीं बन जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवाद के वास्तविक सिद्धांतों और मौजूदा समाजवादी पार्टी की राजनीति में काफी अंतर है।
ब्रजेश पाठक ने JPNIC और समाजवादी विचारधारा को लेकर अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर डॉ. राममनोहर लोहिया और लोकनायक जयप्रकाश नारायण आज होते तो वह वर्तमान समाजवादी पार्टी की कार्यशैली को समाजवाद की कसौटी पर जरूर परखते। उन्होंने कहा कि समाजवाद केवल नाम या नारों से नहीं आता, बल्कि उसके लिए गरीबों, वंचितों और आम जनता के हितों के लिए काम करना जरूरी होता है।
डिप्टी सीएम ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने महान समाजवादी नेताओं की विचारधारा को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि लोहिया, जयप्रकाश नारायण और अन्य समाजवादी नेताओं ने जिन मूल्यों के लिए संघर्ष किया था, आज की राजनीति में उन मूल्यों का पालन दिखाई नहीं देता। 
JPNIC को लेकर आमने-सामने BJP और सपा
JPNIC को लेकर पिछले कुछ समय से भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच लगातार बयानबाजी जारी है। अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाया था कि जयप्रकाश नारायण की स्मृतियों से जुड़े इस संस्थान को लेकर भाजपा सरकार का रवैया ठीक नहीं है। उन्होंने इसे समाजवादी विचारधारा और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा बताया था।
वहीं भाजपा की ओर से पलटवार करते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि JPNIC को लेकर राजनीति करने से पहले समाजवादी पार्टी को अपने शासनकाल और कार्यों का भी हिसाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव केवल भावनात्मक मुद्दों के जरिए राजनीति कर रहे हैं, जबकि सरकार विकास और पारदर्शिता के आधार पर काम कर रही है।
"जेपी और लोहिया के नाम का इस्तेमाल मत कीजिए"
ब्रजेश पाठक ने कहा कि जयप्रकाश नारायण और डॉ. लोहिया जैसे नेताओं ने समाज में बदलाव और समानता के लिए संघर्ष किया था। उनकी विचारधारा केवल राजनीतिक लाभ लेने का माध्यम नहीं थी। उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि क्या वर्तमान समाजवादी पार्टी उन्हीं सिद्धांतों पर चल रही है, जिनकी बात पुराने समाजवादी नेता करते थे।
उन्होंने कहा कि समाजवाद का अर्थ केवल सत्ता हासिल करना नहीं है, बल्कि जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने समाजवाद के नाम का इस्तेमाल तो किया, लेकिन उसके मूल सिद्धांतों को कमजोर कर दिया।
सपा और भाजपा में बढ़ी जुबानी जंग
उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक माहौल को देखते हुए भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। JPNIC जैसे मुद्दे अब केवल संस्थान तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि दोनों दल इसे अपनी-अपनी राजनीतिक विचारधारा से जोड़कर जनता के सामने पेश कर रहे हैं।
अखिलेश यादव लगातार भाजपा सरकार पर समाजवादी विरासत से जुड़े प्रतीकों को नजरअंदाज करने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं भाजपा नेता सपा पर पुराने नेताओं के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं। 
चुनावी राजनीति से जुड़ा मुद्दा
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि JPNIC विवाद आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। समाजवादी पार्टी जहां इसे अपनी विचारधारा और विरासत से जोड़ रही है, वहीं भाजपा इसे प्रशासनिक और विकास से जुड़े मुद्दे के रूप में पेश कर रही है।
ब्रजेश पाठक के बयान के बाद यह साफ है कि भाजपा और सपा के बीच वैचारिक लड़ाई और तेज होने वाली है। दोनों दल समाजवाद, विकास और जनता के मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर हमलावर हैं।
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