Kanpur कानपुर : विनीत मनोचा हत्याकांड में गिरफ्तार उनकी बहू शालू ने अदालत में खुद पर लगे आरोपों से इनकार किया है। शालू ने कोर्ट के सामने दावा किया कि उसने कथित हत्यारों को घर की चाबी नहीं दी थी। मामले में पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाते हुए उसने अपना पक्ष रखा। इस चर्चित हत्याकांड में पुलिस शालू की कथित भूमिका की जांच कर रही है।

विनीत मनोचा की हत्या की जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए थे। जांच में परिवार से जुड़े लोगों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल की गई। इसी क्रम में शालू को भी आरोपी बनाया गया और गिरफ्तार किया गया। पुलिस का आरोप है कि वारदात को अंजाम देने में आरोपियों को अंदर से मदद मिली थी। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है। अदालत में पेशी के दौरान शालू ने पुलिस के दावे का विरोध किया। उसने कहा कि हत्यारों को घर की चाबी देने की बात सही नहीं है। बचाव पक्ष की ओर से भी पुलिस की कहानी और उसके समर्थन में जुटाए गए साक्ष्यों को लेकर सवाल उठाए गए। शालू ने खुद को निर्दोष बताते हुए मामले में उसकी कथित संलिप्तता के आरोपों को खारिज किया।
पुलिस इस हत्याकांड की कड़ियों को जोड़ने के लिए आरोपियों के आपसी संपर्क, वारदात से पहले की गतिविधियों और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि हमलावर घर के अंदर कैसे पहुंचे और उन्हें घर तथा वहां मौजूद लोगों के बारे में कितनी जानकारी थी। घर की चाबी से जुड़ा सवाल इसी कारण जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। मामले में तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और आरोपियों के बीच कथित संपर्क जैसी जानकारियों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है। पुलिस की ओर से अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांच होगी।
वहीं शालू के बयान के बाद मामले में बचाव पक्ष और अभियोजन के दावों के बीच अंतर साफ दिखाई दे रहा है। एक ओर पुलिस उसकी कथित भूमिका को लेकर जांच और साक्ष्यों का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर शालू ने आरोपों को स्वीकार करने से इनकार किया है। विनीत मनोचा हत्याकांड में आगे की सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच और आरोपियों के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और शालू समेत गिरफ्तार लोगों पर लगे आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।
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