अतीक के बेटे आबान को किया गया सुपुर्द-ए-खाक

Update: 2026-08-09 03:48 GMT

प्रयागराज। माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद को शनिवार शाम प्रयागराज के कसारी-मसारी स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। आबान को उसके पिता अतीक अहमद और परिवार के अन्य सदस्यों की कब्रों के पास दफनाया गया। करीब दो दिन के इंतजार के बाद परिवार और करीबियों की मौजूदगी में आबान को अंतिम विदाई दी गई। आबान की मौत झांसी में हुए सड़क हादसे में हुई थी, जिसके बाद उसका शव प्रयागराज लाया गया था।

आबान के जनाजे में शामिल होने के लिए उसके बड़े भाई उमर अहमद और अली अहमद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से पैरोल मिली थी। दोनों भाई अलग-अलग जेलों में बंद हैं। अदालत की अनुमति के बाद उन्हें कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच प्रयागराज लाया गया। उमर लखनऊ जेल में और अली झांसी जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट ने मानवीय आधार पर दोनों को छोटे भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी थी।

कब्रिस्तान के बाहर उमड़ी भारी भीड़

उमर और अली के प्रयागराज पहुंचने की खबर फैलते ही कसारी-मसारी कब्रिस्तान के बाहर बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। देखते ही देखते भीड़ बढ़ गई और मौके पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक, कब्रिस्तान के आसपास सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

उमर के पहुंचने के बाद भीड़ और ज्यादा बढ़ गई। लोग उन्हें देखने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान धक्का-मुक्की और आपाधापी की स्थिति भी बनी। पुलिस ने लोगों को पीछे हटाने और व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया। हालात बिगड़ने पर पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को नियंत्रित करना पड़ा।

कड़ी सुरक्षा के बीच पहुंचे दोनों भाई

आबान के अंतिम संस्कार को लेकर पुलिस-प्रशासन पहले से ही सतर्क था। उमर और अली के जेल से प्रयागराज आने के कारण सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई थी। दोनों भाइयों को पुलिस सुरक्षा के बीच कब्रिस्तान तक पहुंचाया गया। हाईकोर्ट ने पैरोल के दौरान दोनों को मीडिया से बातचीत नहीं करने का निर्देश भी दिया था।

कब्रिस्तान में पहुंचने के बाद दोनों भाइयों ने अपने छोटे भाई के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। परिवार के अन्य सदस्य और करीबी लोग भी जनाजे में मौजूद रहे। रिपोर्टों के अनुसार, उमर, अली और भाई अजहम ने आबान के जनाजे को कंधा दिया। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ आबान को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

अतीक और असद की कब्र के पास दफनाया गया

आबान को कसारी-मसारी कब्रिस्तान में उसके पिता अतीक अहमद की कब्र के पास दफनाया गया। इसी कब्रिस्तान में अतीक के भाई अशरफ और बेटे असद की कब्रें भी हैं। इस वजह से आबान के अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की वर्ष 2023 में प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसी वर्ष अतीक के बेटे असद की झांसी में पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। अब आबान की मौत सड़क हादसे में होने के बाद परिवार पर एक और दुखद घटना सामने आई है।

दो दिन के इंतजार के बाद हुई अंतिम विदाई

आबान की मौत के बाद उसके शव को प्रयागराज लाने और अंतिम संस्कार की तैयारियों में समय लगा। परिवार के अन्य सदस्यों की मौजूदगी तथा जेल में बंद भाइयों को पैरोल मिलने की प्रक्रिया के कारण अंतिम विदाई दो दिन बाद हो सकी। हाईकोर्ट की अनुमति मिलने के बाद उमर और अली को अंतिम संस्कार में शामिल होने का अवसर मिला।

आबान की अंतिम विदाई के दौरान कब्रिस्तान के बाहर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में निगरानी बढ़ा दी थी। भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ जेल से आए दोनों भाइयों की सुरक्षा भी पुलिस के लिए बड़ी जिम्मेदारी थी।

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उमर और अली को पुलिस सुरक्षा में वापस ले जाया गया। हाईकोर्ट की ओर से दी गई पैरोल सीमित अवधि के लिए थी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद रहीं।

आबान का सुपुर्द-ए-खाक पूरा होने के साथ परिवार के लिए एक और दुखद अध्याय जुड़ गया। पिता अतीक और भाई असद की मौत के बाद अब आबान की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं, अंतिम संस्कार में उमर और अली की मौजूदगी तथा कब्रिस्तान के बाहर उमड़ी भारी भीड़ के कारण प्रयागराज में यह घटनाक्रम पूरे दिन चर्चा में रहा।

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