आस्था और कला का संगम, विशाल त्रिशूल वाली कांवड़ ने रोके राहगीरों के कदम

Update: 2026-08-02 15:21 GMT

मुजफ्फरनगर : श्रावण कांवड़ यात्रा-2026 में इस बार श्रद्धा के साथ-साथ रचनात्मकता और भक्ति के अनोखे रूप भी देखने को मिल रहे हैं। हर साल लाखों शिवभक्त अलग-अलग तरह की कांवड़ लेकर हरिद्वार से अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं, लेकिन इस बार मुजफ्फरनगर में एक ऐसी कांवड़ चर्चा का विषय बन गई, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दिल्ली-देहरादून हाईवे से रविवार दोपहर करीब तीन बजे जब 14 फीट ऊंचे स्टेनलेस स्टील के विशाल त्रिशूल के साथ शिवभक्तों की टोली गुजरी तो सड़क पर मौजूद लोग उसे देखने के लिए रुक गए।

विशाल त्रिशूल वाली इस कांवड़ को देखकर राहगीर हैरान रह गए। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से इसकी तस्वीरें और वीडियो बनाए। देखते ही देखते यह अनोखी कांवड़ सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई। कांवड़ मार्ग से गुजरने वाले लोगों के बीच इस विशाल त्रिशूल को लेकर उत्सुकता देखने को मिली। कोई इसे भक्ति और आस्था का प्रतीक बता रहा था तो कोई शिवभक्तों की मेहनत और समर्पण की सराहना कर रहा था।

यह विशेष कांवड़ ग्रेटर नोएडा निवासी अमित और उनके दो साथियों द्वारा निकाली जा रही है। तीनों शिवभक्त हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल यात्रा कर रहे हैं। उनका लक्ष्य ग्रेटर नोएडा स्थित कैलाशपुर सिद्ध बाबा धाम मंदिर में इस 14 फीट ऊंचे स्टेनलेस स्टील के त्रिशूल की स्थापना करना है। शिवभक्तों का कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा को निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी गहरी आस्था और समर्पण का प्रतीक है।

अमित ने बताया कि इस विशाल त्रिशूल को तैयार करने में करीब दो महीने का समय लगा। इसे मध्य प्रदेश के कुशल कारीगरों ने विशेष मेहनत से स्टेनलेस स्टील से तैयार किया है। त्रिशूल के निर्माण में लगभग 50 हजार रुपये की लागत आई है। उन्होंने बताया कि स्टेनलेस स्टील होने के कारण यह काफी मजबूत है और इसकी चमक दूर से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है।

हालांकि इतनी विशाल और भारी कांवड़ के साथ पैदल यात्रा करना शिवभक्तों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। अमित ने बताया कि वह और उनके साथी रोजाना लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। 14 फीट ऊंचे त्रिशूल को संभालना सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसका अधिकांश भार ऊपरी हिस्से में है। ऐसे में चलते समय संतुलन बनाए रखना काफी मुश्किल होता है। तेज हवा के दौरान परेशानी और बढ़ जाती है, लेकिन भगवान शिव के प्रति विश्वास और आस्था उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान कई बार लोग उनकी कांवड़ को देखने के लिए रुकते हैं और उनके प्रयास की सराहना करते हैं। रास्ते में मिलने वाले श्रद्धालु भी उनकी मदद करते हैं और उनका उत्साह बढ़ाते हैं। शिवभक्तों का कहना है कि इस तरह की यात्रा उनके लिए केवल शारीरिक कठिनाई नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभव भी है।

कांवड़ यात्रा के दौरान हर साल श्रद्धालु अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार अलग-अलग स्वरूपों में कांवड़ तैयार करते हैं। कोई फूलों से सजी कांवड़ लेकर चलता है तो कोई धार्मिक संदेशों और कलाकृतियों से सुसज्जित कांवड़ तैयार करता है। इसी कड़ी में इस बार 14 फीट ऊंचे स्टेनलेस स्टील त्रिशूल वाली कांवड़ ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

मुजफ्फरनगर में इस अनोखी कांवड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कांवड़ यात्रा केवल आस्था और परंपरा का पर्व नहीं है, बल्कि इसमें श्रद्धालुओं की कला, मेहनत और भगवान शिव के प्रति समर्पण भी देखने को मिलता है। विशाल त्रिशूल के साथ आगे बढ़ रहे शिवभक्तों की यह यात्रा लोगों के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।

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