पढ़ाई के लिए रूस गए तीन युवकों को सेना में शामिल करने का आरोप डेढ़ महीने से संपर्क टूटा
मुजफ्फरनगर/शामली। उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य का सपना लेकर रूस गए तीन युवकों के परिवार उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर चिंतित हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि युवकों को वहां रूसी सेना में जबरन शामिल कर लिया गया है। मुजफ्फरनगर जिले के शक्ति पुंडीर और हिमांशु शर्मा के बाद अब शामली निवासी आशु कुमार के परिवार ने भी प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। तीनों युवकों से पिछले करीब डेढ़ महीने से परिवारों का संपर्क नहीं हो पा रहा है। लगातार संपर्क टूटे रहने से परिजन अनहोनी की आशंका जता रहे हैं।
शक्ति पुंडीर मुजफ्फरनगर के तितावी क्षेत्र स्थित पीपलशाह गांव के निवासी हैं। दूसरे युवक हिमांशु शर्मा चरथावल क्षेत्र के बाढ़ गांव के रहने वाले हैं। वहीं, आशु कुमार शामली जिले के थानाभवन क्षेत्र स्थित हसनपुर लुहारी गांव से हैं। तीनों युवकों के परिवार अब उनकी स्थिति का पता लगाने और मदद मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। पढ़ाई और भविष्य की संभावनाओं के लिए विदेश गए बेटों से लंबे समय तक बात नहीं हो पाने के कारण परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
परिजनों के अनुसार, युवकों के रूस जाने का उद्देश्य उच्च शिक्षा हासिल करना और अपने लिए बेहतर भविष्य बनाना था। परिवारों का आरोप है कि वहां उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध रूसी सेना में शामिल किया गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस आरोप की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं है। युवकों को किस परिस्थिति में सेना में शामिल किए जाने की बात सामने आई और इस संबंध में परिवारों को जानकारी कैसे मिली, इसका विस्तृत विवरण भी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल यह दावा परिजनों की ओर से किया गया है।
मामले में सबसे बड़ी चिंता तीनों युवकों से करीब डेढ़ महीने से संपर्क नहीं हो पाना है। परिवारों को उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी नहीं मिल रही है। इतने लंबे समय तक संवाद बंद रहने से परिजनों के मन में उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध विवरण में युवकों की वर्तमान लोकेशन, स्वास्थ्य या रहने की परिस्थितियों का उल्लेख नहीं है। इस अनिश्चितता के बीच परिवार चाहते हैं कि प्रशासन उनकी बात सुने और युवकों तक पहुंच बनाने में मदद करे।
शक्ति पुंडीर और हिमांशु शर्मा से जुड़े मामले के बाद आशु कुमार के परिवार ने भी प्रशासन के सामने सहायता की मांग रखी है। इससे अब तीन परिवारों की चिंता सामने आई है। आशु के परिजन भी लंबे समय से संपर्क नहीं होने के कारण परेशान हैं। उनकी गुहार का केंद्र बेटे की स्थिति का पता लगाना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित कराना है। हालांकि, प्रशासन को दिए गए प्रार्थना पत्र के विस्तृत बिंदुओं और उसके बाद हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
परिजनों की आशंका को किसी पुष्ट घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता। संपर्क नहीं होने से परिवार अनहोनी की चिंता जता रहे हैं, लेकिन युवकों के साथ क्या हुआ है, इसकी पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसी कारण मामले में उनकी सुरक्षा और वर्तमान स्थिति से संबंधित प्रमाणित जानकारी का महत्व बढ़ जाता है। परिवारों की ओर से लगाए गए आरोप गंभीर हैं और उनका स्पष्ट उत्तर मिलने तक चिंता बनी रहेगी। फिलहाल तीनों युवकों का संपर्क टूटना मामले का प्रमुख तथ्य है।
उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना परिवारों के लिए उम्मीदों से जुड़ा निर्णय होता है। इस मामले में भी युवकों के रूस जाने के पीछे पढ़ाई और बेहतर भविष्य का सपना बताया गया है। अब उन्हीं परिवारों के सामने बेटों का हाल जानने की चुनौती है। उनकी चिंता केवल वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे पहले यह जानना भी जरूरी है कि युवक कहां हैं और किस स्थिति में हैं। लंबे समय से बातचीत नहीं होने के कारण परिवारों को इन सवालों के जवाब नहीं मिल पा रहे हैं।
उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि तीनों युवक एक साथ रूस गए थे या अलग-अलग समय पर वहां पहुंचे थे। उनके शिक्षण संस्थानों, पाठ्यक्रमों और रूस पहुंचने की तारीखों का विवरण भी नहीं दिया गया है। किसी एजेंट या अन्य व्यक्ति की भूमिका के संबंध में भी जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए मामले को किसी विशेष माध्यम से विदेश भेजे जाने या किसी गिरोह से जोड़ना उचित नहीं होगा। खबर में फिलहाल परिवारों के आरोप और सहायता की मांग ही सामने है।
तीनों परिवारों की गुहार के बाद मामले में आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। उपलब्ध विवरण में रूसी सेना, संबंधित शिक्षण संस्थानों या अन्य अधिकारियों का पक्ष शामिल नहीं है। प्रशासन की ओर से किसी जांच, संपर्क प्रक्रिया या वापसी की व्यवस्था की पुष्टि भी नहीं दी गई है। ऐसे में युवकों के बारे में स्थिति स्पष्ट होने पर ही आगे के घटनाक्रम का सही आकलन किया जा सकेगा। परिजनों के लिए इस समय सबसे जरूरी बात बेटों से दोबारा संपर्क स्थापित होना है।
मुजफ्फरनगर के पीपलशाह और बाढ़ गांव के साथ शामली के हसनपुर लुहारी गांव के परिवार अब मदद की उम्मीद कर रहे हैं। शक्ति पुंडीर, हिमांशु शर्मा और आशु कुमार से डेढ़ महीने से संपर्क नहीं हो पाने ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। परिवारों ने रूसी सेना में जबरन शामिल किए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से सहायता मांगी है। युवकों की वर्तमान स्थिति और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि सामने आने तक उनकी सुरक्षा को लेकर परिवारों की बेचैनी बनी हुई है।