कानपुर। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से कानपुर के तटवर्ती इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले 12 घंटे में जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। नदी का पानी फैलने से कटरी के कई गांव टापू जैसे नजर आने लगे हैं। अधिकांश रास्ते जलमग्न हैं और 12 गांवों के लोग अपने घरों में घिर गए हैं। सामान्य आवागमन प्रभावित होने के कारण लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। पुराना कानपुर स्थित तिवारी घाट में घरों के बाहर तक पानी पहुंच गया है।

तिवारी घाट से अब तक 35 लोगों को निकाला जा चुका है। नदी के बढ़ते पानी के बीच यहां रहने वाले परिवारों के सामने सुरक्षित आवागमन की चुनौती पैदा हो गई है। घरों के बाहर पानी पहुंचने से बस्ती और नदी के बीच की दूरी सिमट गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में निकाले गए लोगों को कहां पहुंचाया गया है, इसका विवरण नहीं दिया गया है। फिलहाल इलाके से लोगों को बाहर निकालने और जलस्तर में लगातार वृद्धि की जानकारी सामने आई है।

कटरी के गांवों में सबसे बड़ी परेशानी रास्तों के डूबने से हुई है। जिन मार्गों से लोग रोजमर्रा के काम के लिए आते-जाते थे, वहां अब पानी भरा हुआ है। गांवों का सामान्य संपर्क प्रभावित होने से आवाजाही के लिए नाव की जरूरत पड़ रही है। बस्तियों के आसपास पानी फैलने के कारण कई गांव टापू जैसी स्थिति में पहुंच गए हैं। घरों में घिरे लोगों के लिए बाहर निकलना आसान नहीं रह गया है। जलस्तर बढ़ने से यह समस्या और गंभीर होती दिखाई दे रही है।

प्रभावित 12 गांवों में रहने वाले लोगों की दिनचर्या पर भी असर पड़ा है। रास्ते जलमग्न होने से घर से बाहर निकलने और दूसरे स्थानों तक पहुंचने में बाधा आ रही है। सामान्य परिस्थितियों में सड़क या गांव के रास्तों से होने वाला आवागमन अब नाव पर निर्भर हो गया है। हालांकि, इन गांवों की आबादी और प्रभावित परिवारों की कुल संख्या का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या का निश्चित आकलन अभी सामने नहीं आया है।

पिछले 12 घंटे में पानी का 10 सेंटीमीटर बढ़ना तटवर्ती बस्तियों के लिए चिंता का विषय है। नदी के पास बसे इलाकों में जलस्तर की वृद्धि का असर रास्तों और आबादी तक पानी पहुंचने के रूप में सामने आ रहा है। कटरी के गांवों में पहले से जलभराव की स्थिति है और अधिकांश रास्ते डूबे हुए हैं। ऐसे में नदी का लगातार बढ़ना लोगों की आवाजाही से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकता है। आगे की स्थिति जलस्तर के रुझान पर निर्भर करेगी।

पुराना कानपुर के तिवारी घाट में पानी घरों के बाहर तक पहुंच चुका है। यह स्थिति वहां रहने वाले लोगों की परेशानी को स्पष्ट करती है। हालांकि, घरों के भीतर पानी भरने की पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है। इलाके से 35 लोगों को निकाले जाने की जानकारी बताती है कि कुछ लोगों को वहां से बाहर पहुंचाया गया है। बाकी प्रभावित लोगों की संख्या और बस्ती की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण सामने आने पर नुकसान और जरूरतों का अधिक स्पष्ट आकलन हो सकेगा।

उधर, भगवानदीन पुरवा में बिजली की आपूर्ति बंद कर दी गई है। इससे यहां के लोगों के सामने जलभराव के साथ बिजली न रहने की समस्या भी है। उपलब्ध जानकारी में बिजली आपूर्ति बंद करने का विस्तृत कारण और उसे बहाल करने का समय नहीं बताया गया है। नदी का पानी बढ़ने और रास्ते प्रभावित होने के बीच बिजली आपूर्ति का बंद होना इस इलाके की एक और महत्वपूर्ण स्थिति है। यहां के निवासियों को सामान्य सुविधाओं की बहाली का इंतजार रहेगा।

प्रभावित इलाकों में नाव आवागमन का प्रमुख सहारा बन गई है। रास्तों पर पानी भरने के कारण लोगों के पास सामान्य तरीके से आने-जाने के विकल्प सीमित हो गए हैं। गांवों के टापू बनने जैसी स्थिति का सीधा असर उनके संपर्क पर पड़ा है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में नावों की संख्या या उनके संचालन की व्यवस्था का उल्लेख नहीं है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि लोगों को बाहर आने-जाने के लिए नाव का इस्तेमाल करना पड़ रहा है और सड़क मार्गों से आवाजाही बाधित है।

इस घटनाक्रम में जलस्तर बढ़ने के साथ तीन प्रमुख प्रभाव सामने आए हैं। कटरी के गांव पानी से घिर गए हैं, अधिकांश रास्ते जलमग्न हो गए हैं और तिवारी घाट में पानी घरों के बाहर तक पहुंच गया है। इसके अलावा भगवानदीन पुरवा में बिजली आपूर्ति बंद है। ये स्थितियां अलग-अलग इलाकों में लोगों की परेशानी का दायरा दिखाती हैं। उपलब्ध जानकारी में फसलों, पशुओं या मकानों को हुए नुकसान का विवरण नहीं है। ऐसे नुकसान की पुष्टि के बिना कोई आंकड़ा देना संभव नहीं है।

कानपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच तटवर्ती बस्तियों की स्थिति पर नजर बनी हुई है। कटरी के 12 गांवों के लोग जलभराव से घिरे हैं और आवाजाही के लिए नावों का सहारा ले रहे हैं। तिवारी घाट से 35 लोगों को निकाला जा चुका है, जबकि भगवानदीन पुरवा में बिजली आपूर्ति बंद है। पिछले 12 घंटे में दर्ज 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी के बाद नदी के अगले रुझान और प्रभावित बस्तियों की स्थिति से आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।

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