12,520 हेक्टेयर भूमि का होगा कायाकल्प, वर्षा आधारित किसानों को मिलेगा बड़ा सहारा
जौनपुर। जिले में वर्षा जल पर निर्भर रहने वाले किसानों की तकदीर बदलने और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भूमि संरक्षण विभाग ने बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-3.0 के तहत जौनपुर की 12,520 हेक्टेयर से अधिक बंजर और प्रभावित भूमि को सुधारकर खेती के योग्य बनाने की तैयारी है। भूमि सुधार के साथ जल संरक्षण और सिंचाई से जुड़े कार्यों को भी योजना में शामिल किया गया है। परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद बड़ी संख्या में किसानों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
भूमि संरक्षण विभाग ने इस संबंध में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है। डीपीआर में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चिह्नित बंजर और प्रभावित भूमि का विवरण, भूमि सुधार की जरूरत, प्रस्तावित कार्य और जल संरक्षण से संबंधित पहलुओं को शामिल किया गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसी जमीन की उत्पादकता बढ़ाना है, जहां वर्तमान में खेती करना मुश्किल है या अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पा रहा है।
लखनऊ में होगी डीपीआर की अहम समीक्षा
योजना को अंतिम रूप देने और तैयार डीपीआर की समीक्षा के लिए सोमवार को लखनऊ स्थित भू-मित्र भवन में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। बैठक में संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ परियोजना के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। जौनपुर से दोनों भूमि संरक्षण अधिकारी भी बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं।
अधिकारियों ने बैठक के लिए जिले से संबंधित अद्यतन अभिलेख, सर्वे रिपोर्ट और क्षेत्रवार आंकड़े तैयार किए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर चिह्नित भूमि की स्थिति और प्रस्तावित कार्यों की जानकारी उच्च अधिकारियों के सामने रखी जाएगी। समीक्षा के दौरान आवश्यकता के अनुसार डीपीआर में संशोधन भी किया जा सकता है।
वर्षा पर निर्भरता कम करना बड़ी चुनौती
जौनपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान खेती के लिए वर्षा पर निर्भर हैं। मानसून की अनिश्चितता का सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन पर पड़ता है। समय पर बारिश नहीं होने से फसल प्रभावित होती है, जबकि अत्यधिक बारिश होने की स्थिति में खेतों में जलभराव और मिट्टी के कटाव की समस्या पैदा हो जाती है।
ऐसे में भूमि संरक्षण विभाग की प्रस्तावित योजना को किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जल संरक्षण से संबंधित कार्यों के जरिए बारिश के पानी को संरक्षित करने और उसका कृषि कार्यों में बेहतर उपयोग करने का प्रयास किया जाएगा। इससे किसानों को मौसम की अनिश्चितता से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
बंजर भूमि को खेती के योग्य बनाने पर जोर
योजना में जिले की 12,520 हेक्टेयर से अधिक भूमि को शामिल किया गया है। इनमें ऐसी भूमि भी है, जहां प्राकृतिक या अन्य कारणों से कृषि गतिविधियां प्रभावित हैं। विभाग का लक्ष्य भूमि की स्थिति में सुधार कर उसे अधिक उत्पादक बनाना है।
भूमि सुधार के बाद इन क्षेत्रों में फसल उत्पादन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। यदि किसान इन जमीनों का नियमित रूप से कृषि कार्यों में इस्तेमाल कर पाए तो जिले का कुल कृषि उत्पादन भी बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही किसानों की आय में वृद्धि का रास्ता भी खुल सकता है।
जल संरक्षण के साथ भूमि संरक्षण
परियोजना की खास बात यह है कि इसमें केवल भूमि सुधार पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि जल संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। वर्षा जल को खेतों और आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक संरक्षित करने तथा उसका उचित उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा।