तमिलनाडु में सर्पदंश से मौतों पर बड़ा नियंत्रण, इलाज की बेहतर व्यवस्था से बदली तस्वीर
Chennai, चेन्नई। तमिलनाडु में सांप के काटने को लेकर लंबे समय से चली आ रही भय की स्थिति अब धीरे-धीरे बदल रही है। कभी सांप के काटने को निश्चित मौत माना जाता था, लेकिन बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, समय पर इलाज और लोगों में बढ़ती जागरूकता के कारण अब सर्पदंश से होने वाली मौतों में भारी कमी देखने को मिल रही है। राज्य सरकार ने सर्पदंश को गंभीर स्वास्थ्य समस्या मानते हुए कई बड़े कदम उठाए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
तमिलनाडु सरकार ने 4 नवंबर 2024 को सांप के काटने को अधिसूचित रोग घोषित किया था। इसके बाद सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए सर्पदंश के मामलों और उनसे होने वाली मौतों की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य कर दिया गया। इस कदम का उद्देश्य सर्पदंश के मामलों की सही निगरानी करना और मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना था।
राज्य में पहले सांप के काटने के बाद कई लोग अस्पताल पहुंचने में देरी करते थे। ग्रामीण इलाकों में लोग झाड़-फूंक, घरेलू उपचार या पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहते थे, जिससे कई मामलों में मरीजों की जान चली जाती थी। अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और बड़े अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम यानी सांप के जहर को खत्म करने वाली दवा की उपलब्धता सुनिश्चित की है। प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एएसवी की 10 शीशियां तैयार रखने की व्यवस्था की गई है। यह दवा सांप के जहरीले असर को कम करने में अहम भूमिका निभाती है और जरूरत पड़ने पर मरीज को नसों के जरिए दी जाती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में वर्ष 2021 में सांप के काटने से 329 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 406 तक पहुंच गया था। इसके बाद सरकार ने सर्पदंश से निपटने के लिए विशेष रणनीति अपनाई। डॉक्टरों और नर्सों को सर्पदंश के इलाज और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। इस वर्ष 20 जुलाई तक तमिलनाडु में करीब 7,600 लोग सांप के काटने का शिकार हुए, लेकिन इनमें से केवल 7 लोगों की मौत हुई। राज्य में सर्पदंश से मृत्यु दर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, तिरुवनमलाई जिले में सांप काटने के सबसे अधिक 691 मामले सामने आए। इसके बाद कृष्णागिरी में 572, विलुपुरम में 485, त्रिची में 480, कोयंबटूर में 411 और धर्मपुरी में 361 मामले दर्ज किए गए। राजधानी चेन्नई में भी 186 लोग सांप काटने की घटनाओं से प्रभावित हुए।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन सभी जहरीली नहीं होतीं। अधिकांश सांप इंसानों के लिए घातक नहीं होते। विशेषज्ञों का कहना है कि कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और अन्य कुछ जहरीली प्रजातियों के काटने से ही गंभीर खतरा होता है।
सरीसृप विशेषज्ञों का कहना है कि सांप अक्सर चूहों की तलाश में इंसानी बस्तियों के आसपास पहुंच जाते हैं। घरों के आसपास गंदगी और खाने के अवशेष चूहों को आकर्षित करते हैं, जिससे सांप भी वहां आने लगते हैं। इसलिए घरों के आसपास साफ-सफाई रखना जरूरी है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि यदि घर या आसपास सांप दिखाई दे तो उसे मारने की कोशिश न करें। इसकी सूचना दमकल विभाग को 101 नंबर पर दी जा सकती है। प्रशिक्षित कर्मचारी सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ देते हैं।
तमिलनाडु में स्वास्थ्य विभाग, अस्पतालों और जागरूकता अभियानों के संयुक्त प्रयास से अब सर्पदंश को नियंत्रित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में सांप के काटने से होने वाली मौतों को और कम किया जाए और हर व्यक्ति को समय पर जीवनरक्षक उपचार मिल सके।