Jhunjhunu झुंझुनूं । होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के प्रभावी परिणामों को लेकर शनिवार को सूचना केंद्र सभागार में आयोजित कार्यशाला में आशा सहयोगिनियों ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला में बताया गया कि होम्योपैथिक दवाओं से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में मरीजों को अपेक्षा से अधिक राहत मिल रही है।
आशा सहयोगिनी पुष्पा ने बताया कि उनके क्षेत्र की एक मरीज को पित्त की पथरी के कारण लंबे समय से तेज दर्द, जी मिचलाना और बेचैनी जैसी समस्याएं थीं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने और ऑपरेशन से बचने की इच्छा के चलते मरीज ने होम्योपैथिक उपचार लिया। महज तीन दिनों में मरीज को काफी राहत मिली। दर्द पूरी तरह समाप्त हो गया और मरीज का लगभग पांच किलो वजन भी कम हुआ, जिससे वह अब हल्कापन और आराम महसूस कर रही है।
वहीं वार्ड नंबर 13 की आशा कार्यकर्ता आशा सैनी ने बताया कि उनके क्षेत्र की एक महिला लंबे समय से यूरिन इंफेक्शन से परेशान थी। विभिन्न प्रकार की दवाइयों का सेवन करने के बावजूद समस्या ठीक नहीं हो रही थी। होम्योपैथिक उपचार लेने के बाद मात्र एक महीने में ही मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गई।
कार्यशाला के दौरान आशा सहयोगिनी सुमन स्वामी ने सवाल किया कि “क्या केवल एक डोज से ही इलाज संभव है?” इस पर प्रशिक्षकों ने बताया कि होम्योपैथी का उद्देश्य शरीर की जीवनी शक्ति (Vital Force) को सक्रिय करना है। इसी कारण सही दवा की एक मात्र डोज भी उपचार के लिए पर्याप्त होती है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने अपने संबोधन में होम्योपैथी को एक सुरक्षित, सर्व सुलभ और स्थाई रोग निवारक चिकित्सा पद्धति बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यह अत्यंत कारगर पद्धति है, जिससे तत्काल और सुरक्षित उपचार संभव है। उन्होंने उपस्थित कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाली महिलाओं और बच्चों का उपचार होम्योपैथिक दवाओं से करके जनसेवा के संकल्प को साकार करें।
इस अवसर पर झुंझुनूं के पूर्व जिला कलेक्टर एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार बोरड़ ने भी होम्योपैथी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि होम्योपैथिक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एनजीओ से संपर्क किया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक ब्लॉक मीटिंग में विशेषज्ञ डॉ. रमेश यादव द्वारा एएनएम और आशा सहयोगिनियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस चिकित्सा पद्धति का लाभ उठा सकें।
कार्यशाला को महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक बिजेंद्र सिंह राठौड़ एवं महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक विप्लव न्यौला ने भी संबोधित किया।
एकदिवसीय कार्यशाला में 300 से अधिक एएनएम, आशा सहयोगिनी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दक्ष विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर डॉ. रमेश यादव, डॉ. विनोद, डॉ. चंद्रभान, डॉ. आसिफ मुस्ताक खान और शिक्षाविद् श्री मनीराम मण्डीवाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।