जोगणिया माता शक्तिपीठ में गवरी की गूंज, जयकारों का शोर, दिखा मेवाड़ का रंग
भीलवाड़ा । ढोल की थाप, गवरी के पात्रों की रंग-बिरंगी वेशभूषा और माता रानी के जयकारों के बीच जोगणिया माता शक्तिपीठ का माहौल देखते ही देखते लोक उत्सव में बदल गया। भदेसर से आए भील समाज के कलाकारों ने गवरी की पारंपरिक प्रस्तुतियों से मेवाड़ की लोक संस्कृति को जीवंत कर दिया। मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस नजारे को और भव्य बना दिया। छप्पन भोग के बाद करीब 3 हजार श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की। जोगणिया माता शक्तिपीठ मंदिर में रविवार को भक्ति और मेवाड़ की लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर से पहुंचे भील समाज के कलाकारों ने पारंपरिक गवरी नृत्य की प्रस्तुतियों से मंदिर परिसर में लोक रंग घोल दिया। गवरी की थाप, कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा और माता रानी के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। गवरी नृत्य का नेतृत्व मोटा भाई गोवरिया ने किया। दल में कालूराम, गोदलाल, गोपीलाल और लोहान सहित अन्य कलाकार शामिल रहे। कलाकारों ने मेवाड़ की पारंपरिक लोक शैली पर आधारित विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। गवरी देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही और कलाकारों की प्रस्तुतियों पर लोगों ने उत्साह जताया। कार्यक्रम के दौरान श्री जोगणिया माता शक्तिपीठ प्रबंध एवं विकास संस्थान के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी ने गवरी नृत्य दल के कलाकारों का स्वागत किया। रविवार को माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर में भीड़ के चलते पूरे दिन नवरात्रि जैसा माहौल बना रहा। मोतिपुर, आसींद निवासी अरविंद सेन की ओर से माता रानी को छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसके बाद करीब 3 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण कर माता का आशीर्वाद लिया।