महान प्लेबैक सिंगर एस. जानकी का निधन, 88 साल की उम्र में संगीत जगत ने खोया अनमोल सितारा

Update: 2026-07-12 09:29 GMT

भुवनेश्वर : भारतीय संगीत जगत की महान प्लेबैक सिंगर और चार बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित एस. जानकी का शनिवार को निधन हो गया। वह 88 वर्ष की थीं। जानकारी के अनुसार, मैसूर के एक निजी अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। लाखों प्रशंसक उन्हें प्यार से "जानकी अम्मा" के नाम से जानते थे।

एस. जानकी ने कई दशकों तक भारतीय संगीत जगत पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। अपनी मधुर आवाज, भावपूर्ण गायकी और अलग-अलग भाषाओं में सहजता से गाने की क्षमता के कारण वह देश की सबसे प्रतिष्ठित गायिकाओं में शामिल रहीं। उन्होंने अपने लंबे करियर में भारतीय भाषाओं में 48,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए, जो उनकी असाधारण प्रतिभा और संगीत के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

एस. जानकी का जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था और उन्होंने बहुत कम उम्र से ही संगीत में रुचि दिखानी शुरू कर दी थी। महज 19 साल की उम्र में उन्होंने तमिल फिल्म ‘विधियिन विलायट्टू’ से अपने प्लेबैक सिंगिंग करियर की शुरुआत की। शुरुआत के कुछ ही समय बाद उनकी आवाज ने लोगों के दिलों में जगह बना ली। एक साल के भीतर ही उन्होंने छह भारतीय भाषाओं में करीब 100 गाने रिकॉर्ड कर अपनी पहचान बना ली थी।

अपने करियर के दौरान एस. जानकी ने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, हिंदी, ओडिया समेत कई भाषाओं में अपनी आवाज दी। उनकी गायकी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह हर तरह के गीत को अपनी आवाज के भाव और शैली के अनुसार प्रस्तुत कर सकती थीं। रोमांटिक, भक्ति, दर्द भरे और भावनात्मक गीतों में उनकी पकड़ बेहद मजबूत थी।

एस. जानकी को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें कई राज्य स्तरीय और फिल्म उद्योग से जुड़े प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले। संगीत प्रेमियों के बीच उनकी पहचान एक ऐसी गायिका के रूप में रही, जिन्होंने भाषा की सीमाओं को पार कर अपनी आवाज से करोड़ों लोगों को जोड़ा।

दक्षिण भारतीय सिनेमा में एस. जानकी का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कई दिग्गज संगीतकारों और कलाकारों के साथ काम किया। उनकी आवाज ने कई फिल्मों के किरदारों को नई पहचान दी। उनके गाए गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं और नई पीढ़ी के गायक भी उन्हें प्रेरणा मानते हैं।

ओडिया संगीत जगत में भी एस. जानकी की विशेष पहचान रही। 1970 और 1980 के दशक के दौरान उन्होंने ओडिया फिल्मों के लिए कई यादगार गीत गाए। इस दौरान वह ओडिया फिल्म इंडस्ट्री की एक प्रमुख आवाज बन गई थीं। उन्होंने रोमांटिक, भक्ति और भावनात्मक गीतों के माध्यम से ओडिया संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई।

एस. जानकी ने वर्ष 1974 में फिल्म ‘माना आकाश’ से ओडिया प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की थी। इस फिल्म में उन्होंने संगीतकार उपेंद्र कुमार के निर्देशन में गीत ‘चोरा चोरा प्रीति’ को अपनी आवाज दी थी। इसके बाद उन्होंने ओडिया सिनेमा को कई यादगार गीत दिए।

उनके लोकप्रिय ओडिया गीतों में ‘बंधु मोहंती’ का ‘जा जा जा रे नगारा’, ‘रक्त गोलापा’ का ‘मनारा मनिषा जदी’, ‘गौरी’ का ‘रजनी गो मो प्रिय नायने’, ‘बलिदान’ का ‘नेई जारे मेघा मोटे’, ‘सौतुनी’ का ‘कौ धना खैला बोली’, ‘निझुम रति साथी’ का ‘काली रातिरे कहीं गला नगारा’ और ‘श्रीजगन्नाथ’ का ‘कालिया असिला’ जैसे गीत शामिल हैं।

एस. जानकी के निधन पर फिल्म और संगीत जगत की कई हस्तियों ने दुख व्यक्त किया। प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उनके पुराने गीत साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। लोगों ने कहा कि उनकी आवाज हमेशा संगीत प्रेमियों के बीच जीवित रहेगी।

संगीत समीक्षकों का कहना है कि एस. जानकी जैसी प्रतिभाएं बहुत कम जन्म लेती हैं। उनकी आवाज में भावनाओं की गहराई और हर भाषा के उच्चारण की सहजता उन्हें अन्य गायिकाओं से अलग बनाती थी। उन्होंने अपने करियर में केवल गाने नहीं गाए, बल्कि हर गीत को एक कहानी की तरह प्रस्तुत किया।

भारतीय संगीत के इतिहास में एस. जानकी का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा। उनकी हजारों रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी। उनका निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी आवाज और उनके गीत हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।

Tags:    

Similar News