बालेश्वर। ओडिशा विजिलेंस ने मंगलवार को बालेश्वर जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचायत स्तर के तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इन अधिकारियों पर बुजुर्गों को मिलने वाली सोशल सिक्योरिटी पेंशन की राशि में कथित रूप से 16.76 लाख रुपये के गबन का आरोप है।
विजिलेंस के अनुसार, आरोपियों ने सरकारी योजना के तहत बुजुर्ग पेंशन लाभार्थियों को बांटने के लिए जारी की गई राशि का सही तरीके से उपयोग नहीं किया और कथित तौर पर शेष धनराशि का गलत इस्तेमाल किया।
तीन पंचायत अधिकारियों पर कार्रवाई
गिरफ्तार किए गए अधिकारियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
सुब्रत कुमार पति — काखरा ग्राम पंचायत के पूर्व पंचायत एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (PEO), वर्तमान में कुसुदा ग्राम पंचायत में तैनात।
चित्तरंजन बागसिंह — कुम्भारमुली ग्राम पंचायत के पूर्व PEO, वर्तमान में खैरा ब्लॉक में पदस्थ।
गौतम दलाई — भोगराई ब्लॉक के अंतर्गत जलेश्वरपुर ग्राम पंचायत में अकाउंटेंट-कम-डेटा एंट्री ऑपरेटर।
विजिलेंस ने इन तीनों अधिकारियों को पूछताछ और जांच के बाद गिरफ्तार किया।
2022 से 2025 के बीच हुई कथित गड़बड़ी
विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक, यह कथित वित्तीय अनियमितता वर्ष 2022 से 2025 के बीच हुई।
इस अवधि में आरोपी अधिकारी भोगराई ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस से सोशल सिक्योरिटी पेंशन योजना के तहत एडवांस राशि निकालने और पात्र बुजुर्ग लाभार्थियों को हर महीने पेंशन वितरित करने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
आरोप है कि पेंशन वितरण के बाद बची हुई राशि का सही हिसाब नहीं दिया गया।
पेंशन राशि का नहीं दिया गया हिसाब
जांच में सामने आया कि अधिकारियों ने पेंशन वितरण के लिए प्राप्त राशि में से बची नकद रकम को न तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वापस किया और न ही उसका उचित रिकॉर्ड तैयार किया।
विजिलेंस का आरोप है कि इसी राशि का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया गया।
जांच के अनुसार, कुल 16 लाख 76 हजार 500 रुपये की राशि का कथित रूप से गबन किया गया।
लाभार्थियों के अधिकारों से जुड़ा मामला
सोशल सिक्योरिटी पेंशन योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और बुजुर्ग लोगों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
ऐसी योजनाओं में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता सीधे लाभार्थियों को प्रभावित कर सकती है।
विजिलेंस ने कहा कि सरकारी धन के दुरुपयोग को गंभीरता से लिया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
विजिलेंस ने शुरू की विस्तृत जांच
गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस मामले की आगे की जांच कर रही है।
अधिकारियों से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और पेंशन वितरण से संबंधित कागजात की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस मामले में केवल तीन अधिकारी ही शामिल थे या फिर अन्य लोगों की भी भूमिका रही है।
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता पर जोर
सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और धन के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकार लगातार निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दे रही है।
विजिलेंस की यह कार्रवाई भी इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धन से जुड़ी अनियमितताओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पंचायत स्तर पर जवाबदेही का मुद्दा
पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी स्थानीय अधिकारियों की होती है।
ऐसे में वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और सही रिकॉर्ड रखना बेहद जरूरी होता है।
बालेश्वर मामले ने पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही को लेकर फिर से सवाल खड़े किए हैं।