
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में असुरक्षित और जर्जर इमारतों की पहचान के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ऐसी इमारतों का पता लगाने और उनकी स्थिति की जांच करने के लिए 15 दिन का विशेष निरीक्षण अभियान शुरू किया है।
इस अभियान का उद्देश्य भवन हादसों को रोकना और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे जोखिम वाली इमारतों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करें।
असुरक्षित इमारतों की होगी पहचान
हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट विभाग की ओर से गठित निरीक्षण टीमें शहरी क्षेत्रों में जाकर भवनों की स्थिति की जांच करेंगी।
टीमों को निर्देश दिया गया है कि वे उन इमारतों की पहचान करें जो संरचनात्मक रूप से कमजोर हैं या जिनसे आम लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
जांच के दौरान भवन की मजबूती, निर्माण की स्थिति और संभावित खतरे का आकलन किया जाएगा।
जरूरत पड़ने पर होगी कानूनी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि कोई इमारत असुरक्षित पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं। इसमें नोटिस जारी करना, सुधार के निर्देश देना या अन्य कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है।
नागरिकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता: मंत्री
हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट मंत्री डॉ. कृष्ण चंद्र महापात्रा ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी असुरक्षित इमारत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, जिससे लोगों की जिंदगी को खतरा पैदा हो सकता है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समय रहते खतरों को पहचानकर दुर्घटनाओं को रोकना है।
कई सरकारी इमारतों की हो चुकी है जांच
मंत्री ने बताया कि कई खतरनाक और जर्जर सरकारी इमारतों की जांच पहले ही पूरी की जा चुकी है।
जहां जरूरत महसूस हुई, वहां संबंधित विभागों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भवनों की सुरक्षा को लेकर विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।
समीक्षा बैठक में लिया गया जायजा
अभियान की प्रगति और तैयारियों को लेकर सोमवार को हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट विभाग के साथ समीक्षा बैठक भी की गई।
बैठक में निरीक्षण अभियान की रणनीति, अधिकारियों की जिम्मेदारियां और कार्रवाई की प्रक्रिया पर चर्चा की गई।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान को प्रभावी तरीके से चलाया जाए और रिपोर्ट समय पर तैयार की जाए।
बढ़ते शहरीकरण के बीच जरूरी कदम
राज्य के शहरों में तेजी से हो रहे विकास और निर्माण कार्यों के बीच भवनों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
पुरानी इमारतों, कमजोर निर्माण और रखरखाव की कमी के कारण कई बार हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
सरकार का मानना है कि समय-समय पर भवनों का निरीक्षण करने से बड़े हादसों को रोका जा सकता है।
लोगों की सुरक्षा पर रहेगा फोकस
निरीक्षण अभियान के दौरान अधिकारियों का मुख्य ध्यान आम लोगों की सुरक्षा पर रहेगा।
आवासीय भवनों, सार्वजनिक इमारतों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं की स्थिति का आकलन किया जाएगा।
यदि किसी भवन में गंभीर खतरा पाया जाता है तो वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे।
विभागों के बीच समन्वय पर जोर
सरकार ने अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए हैं।
नगर निकायों के अधिकारी निरीक्षण टीमों के साथ मिलकर काम करेंगे और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करेंगे।





