अनुगोल। ओडिशा के अनुगोल जिले में वायु प्रदूषण एक गंभीर चिंता के रूप में सामने आ रहा है। मानसून के दौरान लगातार बारिश होने के बावजूद जिले की हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। जुलाई और अगस्त महीने में कई दिनों तक एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 100 से ऊपर दर्ज किया गया, जिससे आने वाले महीनों में प्रदूषण की स्थिति और खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर के बाद जब मौसम में बदलाव आएगा और हवा की गति कम होगी, तब प्रदूषक तत्व वातावरण में अधिक समय तक बने रह सकते हैं। वहीं, दिवाली के दौरान पटाखों के कारण भी प्रदूषण का स्तर बढ़ने की संभावना रहती है।
जून में AQI पहुंचा था 302 तक
अनुगोल में प्रदूषण की गंभीर स्थिति जून महीने में देखने को मिली थी। 1 जून को जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़कर 302 तक पहुंच गया था, जिसके बाद क्षेत्र रेड जोन में आ गया था।
AQI का यह स्तर बेहद खराब श्रेणी में माना जाता है और इससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, बाद में हुई बारिश के कारण कुछ समय के लिए राहत मिली और हवा में मौजूद धूल तथा प्रदूषण कणों में कमी आई। लेकिन इसके बावजूद पूरे महीने हवा की गुणवत्ता पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी।
जून में केवल पांच दिन मिली राहत
आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में केवल पांच दिन ऐसे रहे जब अनुगोल का AQI 100 से नीचे दर्ज किया गया। बाकी दिनों में हवा की गुणवत्ता खराब या संतोषजनक से ऊपर बनी रही।
यह स्थिति बताती है कि बारिश के बावजूद जिले में प्रदूषण के अन्य स्रोत लगातार सक्रिय रहे, जिनका असर हवा की गुणवत्ता पर पड़ा।
जुलाई और अगस्त में भी जारी रही परेशानी
मानसून के महीनों जुलाई और अगस्त में भी अनुगोल की हवा को राहत नहीं मिल सकी। नियमित बारिश के बावजूद कई दिनों तक AQI 100 के ऊपर बना रहा।
11 से 14 जुलाई के बीच AQI लगातार 100 से अधिक दर्ज किया गया। पूरे जुलाई महीने में AQI एक बार भी 50 से नीचे नहीं पहुंचा, जो साफ हवा की स्थिति का संकेत होता है।
अगस्त में भी स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं देखा गया। कई दिनों तक प्रदूषण का स्तर सामान्य से ऊपर बना रहा।
PM10 का बढ़ा स्तर चिंता का कारण
अनुगोल में बढ़ते प्रदूषण का एक प्रमुख कारण हवा में मौजूद PM10 कणों का उच्च स्तर बताया जा रहा है।
PM10 बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से सांस संबंधी परेशानियां, एलर्जी और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, औद्योगिक गतिविधियां, वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल और निर्माण कार्य जैसे कारण PM10 के स्तर को प्रभावित करते हैं।
औद्योगिक क्षेत्र होने से बढ़ी चुनौती
अनुगोल ओडिशा के प्रमुख औद्योगिक जिलों में शामिल है। यहां कोयला आधारित उद्योग, खनन और अन्य औद्योगिक गतिविधियां बड़े पैमाने पर संचालित होती हैं।
औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले उत्सर्जन और धूल कण वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उद्योगों की नियमित निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का सही इस्तेमाल और धूल नियंत्रण उपायों को प्रभावी बनाना जरूरी है।
अक्टूबर के बाद बढ़ सकती है परेशानी
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अक्टूबर के बाद हवा की गुणवत्ता को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। मानसून की समाप्ति के बाद वातावरण में नमी कम होने लगती है और हवा की गति में बदलाव आता है।
ऐसे में प्रदूषक तत्व लंबे समय तक हवा में बने रह सकते हैं। इसके अलावा दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण बढ़ाने का एक बड़ा कारण बन सकता है।
स्वास्थ्य को लेकर सतर्कता जरूरी
लगातार खराब हवा की स्थिति को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को अधिक सतर्क रहना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण बढ़ने के दौरान सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
अनुगोल में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले समय में प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत हो सकती है।
इसमें सड़क की धूल कम करना, औद्योगिक उत्सर्जन पर निगरानी रखना और लोगों को जागरूक करना शामिल है।