अदालतों में बढ़ा लंबित मामलों का बोझ, सरकार ने दिए आंकड़े

Update: 2026-07-23 13:05 GMT

राउरकेला। देश की न्याय व्यवस्था पर लंबित मुकदमों का बढ़ता दबाव एक बार फिर सामने आया है। ओडिशा से राज्यसभा सांसद दिलीप राय द्वारा संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि देश की विभिन्न अदालतों में 5.64 करोड़ से अधिक मामले अभी भी विचाराधीन हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मुकदमों की है, जो कई वर्षों से फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

सांसद दिलीप राय ने उच्च सदन में देश और ओडिशा की न्यायिक स्थिति को लेकर सवाल उठाया था। इसके जवाब में कानून मंत्री ने बताया कि 16 जुलाई 2026 तक देशभर की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या करोड़ों में पहुंच चुकी है। सरकार के अनुसार, लंबित मामलों को कम करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन मामलों की संख्या और न्यायिक प्रक्रिया की गति के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।

ओडिशा हाईकोर्ट में 1.69 लाख से ज्यादा मामले लंबित

केंद्रीय मंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, ओडिशा हाईकोर्ट में कुल 1,69,320 मामले लंबित हैं। इनमें कई ऐसे मामले भी शामिल हैं जो लंबे समय से अदालतों में अटके हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, ओडिशा हाईकोर्ट में 376 मामले ऐसे हैं जो 30 साल से अधिक पुराने हैं। वहीं 7,035 मामले 20 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं।

इसके अलावा 38,866 मामले ऐसे हैं जो 10 साल से अधिक पुराने हैं, जबकि 69,684 मुकदमे पांच साल से ज्यादा समय से फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पुराने मामलों का निपटारा न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

जिला अदालतों में 18 लाख से ज्यादा मामले लंबित

ओडिशा की निचली अदालतों की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। राज्य के जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 18,68,323 मामले लंबित पड़े हैं। इनमें 4,441 मामले 30 साल से अधिक पुराने हैं। वहीं 20 साल से ज्यादा पुराने 45,333 मामले और 10 साल से ज्यादा पुराने 3,07,216 मामले शामिल हैं।

इसके अलावा 7,66,177 मुकदमे ऐसे हैं जो पांच साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निचली अदालतों में लंबित मामलों की बड़ी संख्या न्याय मिलने में देरी का प्रमुख कारण है।

सुप्रीम कोर्ट में भी हजारों मामले लंबित

देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में भी हजारों मामलों का बोझ है। कानून मंत्री ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान समय में 96,024 मामले लंबित हैं। इनमें 24,611 मामले पांच साल से ज्यादा पुराने हैं, जबकि 10,094 मामले 10 साल से अधिक समय से लंबित हैं।

इसके अलावा 558 मामले ऐसे हैं जो 20 साल से अधिक पुराने हैं और 26 मामले तीन दशक से ज्यादा समय से अदालत में लंबित हैं।

हाईकोर्ट में 64 लाख से अधिक मामले अटके

देश के विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या भी काफी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, देश के हाईकोर्ट में कुल लंबित मामलों की संख्या 64 लाख 72 हजार से अधिक है। इनमें 80,660 मामले ऐसे हैं जो 30 साल से ज्यादा समय से फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

देश के प्रमुख हाईकोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा 12,28,353 मामले लंबित हैं। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट में 6,96,348, बॉम्बे हाईकोर्ट में 6,57,813, मद्रास हाईकोर्ट में 5,67,814 और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 4,90,363 मामले लंबित हैं।

सरकार ने उठाए कई कदम

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में बताया कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए केंद्र सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है। सरकार ने ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण के लिए 7,210 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। इसका उद्देश्य अदालतों को डिजिटल बनाना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।

इसके अलावा पुराने और गंभीर मामलों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की स्थापना की जा रही है। हाईकोर्ट और जिला अदालत स्तर पर निगरानी समितियां बनाई गई हैं, जो लंबित मामलों की समीक्षा कर रही हैं।

सरकार लोक अदालतों, वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्था और तकनीकी सुधारों के माध्यम से भी मामलों के जल्द निपटारे की कोशिश कर रही है। हालांकि, न्यायिक प्रक्रिया में सुधार के बावजूद करोड़ों लंबित मामलों का समाधान अभी भी देश की न्याय व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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