खतरे के निशान के ऊपर सुवर्णरेखा और जलका नदी, बालेश्वर के निचले इलाकों में बाढ़
बालेश्वर। ओडिशा के बालेश्वर जिले में सुवर्णरेखा और जलका नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद कई निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन गई है। नदी का पानी आसपास के क्षेत्रों में फैलने से बालियापाल और भोगराई के कई हिस्से जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ के कारण घरों के साथ खेतों में भी पानी घुस गया है, जिससे धान और सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
राजघाट में सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर 11.68 मीटर दर्ज किया गया। यहां नदी का खतरे का निशान 10.36 मीटर है। इस तरह सुवर्णरेखा नदी खतरे के स्तर से काफी ऊपर बह रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के निचले इलाकों में पानी फैल गया है।
इस मानसून सीजन में सुवर्णरेखा नदी में यह चौथी बार बाढ़ की स्थिति बनी है। बार-बार नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। नदी के आसपास स्थित खेतों और बस्तियों में पानी पहुंचने से जनजीवन प्रभावित हुआ है।
इसी तरह मथानी में जलका नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। यहां नदी का जलस्तर 6.64 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 6.50 मीटर है। जलका नदी का पानी भी आसपास के निचले इलाकों में फैल रहा है।
दोनों नदियों में बढ़े पानी का सबसे ज्यादा असर बालियापाल और भोगराई के निचले क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। बड़े इलाके पानी में डूब गए हैं। कई जगह खेतों में काफी मात्रा में पानी जमा है। इससे कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
खेतों से पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। बारिश और बाढ़ का पानी खेतों में लंबे समय तक जमा रहने से हाल ही में लगाई गई धान की फसल को नुकसान पहुंचा है।
धान की नई फसल के लिए खेतों में लगातार पानी जमा रहना किसानों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। कई खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ का पानी जल्दी नहीं उतरने पर फसल को और अधिक नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
बाढ़ का असर केवल धान की फसल तक सीमित नहीं है। जिले में हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में लगाई गई सब्जियों की फसल भी प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरने से सब्जियों के पौधों को नुकसान पहुंचा है।
बालियापाल और भोगराई के कई किसान धान के साथ सब्जियों की खेती भी करते हैं। बाढ़ का पानी खेतों में पहुंचने के कारण उनकी दोनों तरह की फसलों पर असर पड़ा है। पानी निकासी की समस्या के कारण खेतों में जमा पानी किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।
बाढ़ का पानी कई रिहायशी क्षेत्रों तक भी पहुंच गया है। कई घरों में पानी घुसने से लोगों को घरेलू सामान बचाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। घरों में रखा अनाज भी पानी की चपेट में आया है।
कई परिवारों की ओर से जमा करके रखा गया धान और चावल बाढ़ के पानी में भीग गया है। इसके अलावा घरों में मौजूद अन्य सामान भी खराब हुआ है। निचले क्षेत्रों में पानी भरने से लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर होने के कारण नदी से लगे क्षेत्रों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। राजघाट में खतरे का स्तर 10.36 मीटर है, जबकि नदी 11.68 मीटर पर बह रही है। दोनों स्तरों के बीच बड़ा अंतर होने के कारण निचले क्षेत्रों में पानी का दबाव बढ़ा है।
वहीं जलका नदी का स्तर भी मथानी में खतरे के निशान को पार कर चुका है। यहां 6.50 मीटर के खतरे के स्तर के मुकाबले पानी 6.64 मीटर तक पहुंच गया है। दोनों नदियों के एक साथ उफान पर होने से बालेश्वर जिले के प्रभावित क्षेत्रों में परेशानी बढ़ गई है।
इस मौसम में सुवर्णरेखा नदी में चौथी बार बाढ़ आने से नदी किनारे रहने वाले परिवारों और किसानों को बार-बार नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। पानी उतरने के बाद खेती और घरों को सामान्य स्थिति में लाने में समय लगता है, लेकिन दोबारा बाढ़ आने पर परेशानी फिर बढ़ जाती है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सबसे बड़ी समस्या पानी निकासी की बताई जा रही है। खेतों और निचले क्षेत्रों में पानी जमा रहने से स्थिति जल्दी सामान्य नहीं हो पा रही है। खासकर कृषि भूमि में लंबे समय तक पानी रहने से धान और सब्जियों की फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
धान की फसल हाल ही में लगाई गई थी। ऐसे समय में खेतों में बाढ़ का पानी भर जाने से किसानों की मेहनत पर असर पड़ा है। सब्जियों की फसल को भी बड़े क्षेत्र में नुकसान हुआ है। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित होने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
घरों में पानी घुसने से प्रभावित परिवारों के सामने अनाज और जरूरी घरेलू सामान बचाने की चुनौती है। जमा किया गया धान और चावल खराब होने से परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है।
बालेश्वर जिले के निचले इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद स्थानीय स्थिति पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण हो गया है। सुवर्णरेखा और जलका नदी का पानी जब तक खतरे के स्तर से नीचे नहीं आता, तब तक निचले क्षेत्रों में बाढ़ का असर बने रहने की आशंका है।
बालियापाल और भोगराई में खेतों के बड़े हिस्से पानी में डूबे हुए हैं। ऐसे में किसानों को अब पानी कम होने का इंतजार है। पानी उतरने के बाद ही फसलों को हुए वास्तविक नुकसान का पूरा आकलन हो सकेगा।
फिलहाल सुवर्णरेखा नदी राजघाट में 11.68 मीटर और जलका नदी मथानी में 6.64 मीटर के स्तर पर बह रही है। दोनों नदियां अपने-अपने खतरे के निशान से ऊपर हैं। इसके कारण बालेश्वर जिले के निचले क्षेत्रों में बाढ़ से घर, खेत और फसलें प्रभावित हुई हैं।