ओडिशा

झूठा हलफनामा देने के आरोप में बौध विधायक सरोज कुमार प्रधान के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट

Kavita2
27 Sept 2026 11:16 AM IST
झूठा हलफनामा देने के आरोप में बौध विधायक सरोज कुमार प्रधान के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
x

बौध। ओडिशा के बौध से विधायक सरोज कुमार प्रधान के खिलाफ स्थानीय अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। मामला 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से झूठा हलफनामा दाखिल करने से जुड़ा है। यह मामला बौध के पूर्व विधायक प्रदीप कुमार अमात की शिकायत पर अदालत पहुंचा था। प्रधान ने 2024 का बौध विधानसभा चुनाव जीता था।

पूर्व विधायक प्रदीप कुमार अमात ने बौध की SDJM अदालत में मामला दायर कर आरोप लगाया था कि सरोज कुमार प्रधान ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने हलफनामे में गलत जानकारी दी थी। शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए मामले को सुनवाई के लिए दर्ज किया।

यह पूरा मामला चुनाव के समय उम्मीदवार की ओर से दाखिल किए गए हलफनामे से संबंधित है। उम्मीदवारों को चुनाव के दौरान निर्धारित प्रारूप में अपनी संपत्ति, देनदारियों, आपराधिक मामलों और अन्य जरूरी जानकारियों का विवरण देना होता है। प्रधान का 2024 का चुनावी हलफनामा भी सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध है और उसमें उन्होंने पांच लंबित आपराधिक मामलों का विवरण दिया था।

पूर्व विधायक अमात की ओर से दायर मामले में आरोप लगाया गया है कि प्रधान ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान झूठा हलफनामा जमा किया। हालांकि यह शिकायतकर्ता का आरोप है और मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगा।

मामले का संज्ञान लेने के बाद स्थानीय अदालत ने प्रधान को नोटिस जारी किया था। उन्हें अदालत के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया। इसके बाद प्रधान ने स्थानीय अदालत के निर्देश को चुनौती देते हुए ओडिशा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट से उन्हें 12 सप्ताह का समय मिलने की बात सामने आई। इसके बाद स्थानीय अदालत में चल रही प्रक्रिया फिर महत्वपूर्ण हो गई। अब बौध की अदालत की ओर से गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

सरोज कुमार प्रधान वर्तमान में बौध विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव के सार्वजनिक चुनावी रिकॉर्ड में उन्हें बौध सीट से भाजपा उम्मीदवार और विजेता के रूप में दर्ज किया गया है। वहीं प्रदीप कुमार अमात उसी चुनाव में बौध सीट से बीजद उम्मीदवार थे।

अदालत की कार्रवाई के केंद्र में फिलहाल चुनावी हलफनामे से संबंधित आरोप हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि विधानसभा चुनाव के समय दी गई जानकारी में गड़बड़ी थी। अदालत ने शिकायत को सीधे खारिज करने के बजाय उसका संज्ञान लेकर सुनवाई के लिए मामला दर्ज किया था।

इसके बाद विधायक को अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया। इस आदेश के खिलाफ विधायक की ओर से हाईकोर्ट का रुख किया गया। कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें 12 सप्ताह का समय मिला था।

अब गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। अदालत के सामने विधायक की उपस्थिति और उनकी ओर से उठाए जाने वाले अगले कानूनी कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।

चुनावी हलफनामे से जुड़े मामलों में दस्तावेजों और घोषित जानकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप और संबंधित उम्मीदवार की ओर से प्रस्तुत जवाब तथा दस्तावेज अदालत के सामने रखे जाते हैं। इसके बाद उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

प्रधान के चुनावी हलफनामे के सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 2024 के चुनाव के समय पांच आपराधिक मामलों की जानकारी घोषित की थी। इनमें बौध की SDJM अदालत से संबंधित मामले भी दर्ज थे। सार्वजनिक रिकॉर्ड में उस समय उनके खिलाफ किसी मामले में दोषसिद्धि दर्ज नहीं थी।

मौजूदा विवाद हालांकि उनके चुनावी हलफनामे में कथित रूप से गलत जानकारी देने के आरोप से जुड़ा है। पूर्व विधायक अमात ने इसी आधार पर अदालत का रुख किया था। शिकायत पर संज्ञान लिए जाने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच गया।

अदालत की ओर से जारी नोटिस के बाद प्रधान को अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित होना था। उन्होंने इस निर्देश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अब स्थानीय अदालत की ओर से गिरफ्तारी वारंट जारी होने से मामले में नया कानूनी घटनाक्रम सामने आया है।

राजनीतिक रूप से भी यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें वर्तमान और पूर्व विधायक आमने-सामने हैं। हालांकि मामले का राजनीतिक महत्व अपनी जगह है, लेकिन शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

फिलहाल गिरफ्तारी वारंट जारी होने का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं है। प्रधान के खिलाफ लगाए गए झूठे हलफनामे के आरोप अभी न्यायिक विचाराधीन हैं और मामले में अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधायक सरोज कुमार प्रधान स्थानीय अदालत के आदेश के संबंध में क्या कानूनी कदम उठाते हैं। उनकी ओर से अदालत में पेश होकर जवाब दिया जाता है या आगे किसी उच्च न्यायिक मंच का रुख किया जाता है, इस पर मामले की अगली प्रक्रिया निर्भर करेगी।

बौध की अदालत में शुरू हुआ यह मामला अब गिरफ्तारी वारंट तक पहुंच चुका है। पूर्व विधायक प्रदीप कुमार अमात की शिकायत से शुरू हुए मामले में चुनावी हलफनामे की जानकारी मुख्य विवाद का विषय है। आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्क और दस्तावेज सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

Next Story