पुणे की जल व्यवस्था होगी मजबूत, 25 साल का मास्टर प्लान तैयार करेगा PMC

Update: 2026-07-24 07:03 GMT

पुणे : पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (PMC) को शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 25 साल का इंटीग्रेटेड मास्टर प्लान तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य शहर के लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करना है। साथ ही, बढ़ती आबादी की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वॉटर ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।

यह निर्देश PMC की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन श्रीनाथ भिमाले ने पार्वती वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की समीक्षा के बाद दिया। हाल ही में शहर के कई इलाकों में नल से गंदला और मटमैला पानी आने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद प्रशासन ने प्लांट की स्थिति की जांच की और पाया कि वहां मौजूद कई मशीनें काफी पुरानी हो चुकी हैं।

अधिकारियों के अनुसार, पार्वती वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में पुराने उपकरणों पर लगातार बढ़ता दबाव जल शोधन प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। मशीनों की क्षमता और मौजूदा जरूरतों के बीच अंतर बढ़ने के कारण पानी की गुणवत्ता बनाए रखने में चुनौतियां सामने आ रही हैं।

पिछले सप्ताह नागरिक अधिकारियों ने पार्वती प्लांट का निरीक्षण किया था। यह निरीक्षण शहरवासियों की ओर से पेयजल की गुणवत्ता को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद किया गया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्लांट की मशीनरी, पानी साफ करने की प्रक्रिया और मौजूदा क्षमता की समीक्षा की।

प्रशासनिक रिपोर्ट में सामने आया कि पुराने हो चुके उपकरणों को समय-समय पर मरम्मत के जरिए चलाया जा रहा है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बड़े स्तर पर सुधार की आवश्यकता है। पुणे की तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार को देखते हुए जल आपूर्ति व्यवस्था में दीर्घकालिक योजना जरूरी मानी जा रही है।

25 साल के मास्टर प्लान में पानी के स्रोतों, ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने और जल वितरण नेटवर्क को बेहतर बनाने जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य आने वाले वर्षों में शहर में पानी की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना है।

श्रीनाथ भिमाले ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केवल मौजूदा समस्याओं का समाधान न किया जाए, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए जो लंबे समय तक शहर की जरूरतों को पूरा कर सके।

उन्होंने कहा कि सुरक्षित पेयजल नागरिकों की मूल जरूरत है और इसे सुनिश्चित करना नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर निगरानी व्यवस्था और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देने की जरूरत है।

पुणे में बढ़ती आबादी के साथ पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। शहर के विस्तार के कारण नए इलाकों में भी जल आपूर्ति पहुंचाने की चुनौती बढ़ रही है। ऐसे में पुराने वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और वितरण व्यवस्था को अपग्रेड करना जरूरी हो गया है।

नागरिकों ने हाल के दिनों में पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई थी। कई क्षेत्रों में लोगों ने मटमैले पानी की शिकायत की थी, जिसके बाद PMC को सफाई और जल शोधन प्रक्रिया की समीक्षा करनी पड़ी।

अधिकारियों का कहना है कि जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए केवल प्लांट की मशीनरी बदलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे सिस्टम का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करना होगा। इसी उद्देश्य से 25 साल की व्यापक योजना तैयार करने का फैसला लिया गया है।

PMC अब विशेषज्ञों की मदद से शहर की भविष्य की जल जरूरतों का अध्ययन करेगा। इसके आधार पर नए प्रोजेक्ट, मौजूदा प्लांट के आधुनिकीकरण और जल वितरण नेटवर्क में सुधार की योजना बनाई जाएगी।

पुणे जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए भरोसेमंद जल आपूर्ति व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। नगर निगम की इस पहल से उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में नागरिकों को बेहतर गुणवत्ता वाला पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और अचानक आने वाली जल संकट जैसी स्थितियों से निपटना आसान होगा।

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