मुंबई। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) मुंबई के अधिकारियों ने विदेशी सोने की कथित तस्करी से जुड़े एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का कथित सरगना भी शामिल है। जांच एजेंसी के मुताबिक यह नेटवर्क बांग्लादेश से कथित तौर पर तस्करी कर भारत लाए गए विदेशी मूल के सोने को संभालने और देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाने का काम करता था। मामले में DRI अब पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान बदलापुर निवासी पी.एस. परमार (32), कामोठे निवासी आर.आर. मोरे (39) और औरंगाबाद निवासी ए.जी. कदम (41) के रूप में हुई है। जांच एजेंसी को संदेह है कि ए.जी. कदम इस नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।

DRI सूत्रों के मुताबिक एजेंसी को विशेष खुफिया जानकारी मिली थी कि कोलकाता और गुवाहाटी से काम करने वाले कुछ शिपर विदेशी मूल के सोने को कूरियर पार्सल के जरिए अलग-अलग स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। सूचना में यह भी दावा किया गया था कि इन शिपरों को ए.जी. कदम कथित रूप से नियंत्रित कर रहा था। इसके बाद DRI ने संदिग्ध कूरियर पार्सलों और उनसे जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की।

जांच के दौरान अधिकारियों ने पार्सलों की आवाजाही से जुड़े पैटर्न को समझने का प्रयास किया। एजेंसी को आशंका थी कि बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत में लाए गए सोने को पहले पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में पहुंचाया जाता था। इसके बाद इसे कूरियर नेटवर्क या अन्य माध्यमों के जरिए मुंबई और महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों तक भेजा जाता था।

सूचना के आधार पर DRI अधिकारियों ने संदिग्ध कूरियर पार्सलों की निगरानी तेज की। एजेंसी का फोकस इस बात पर था कि पार्सल कहां से भेजे जा रहे हैं, इन्हें कौन प्राप्त कर रहा है और डिलीवरी के बाद इनमें मौजूद सामग्री किस व्यक्ति तक पहुंचाई जा रही है। इसी निगरानी के दौरान जांच एजेंसी को आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली।

DRI की जांच में पी.एस. परमार और आर.आर. मोरे की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है। अधिकारियों ने तीनों संदिग्धों की गतिविधियों और उनके बीच कथित संपर्क की जांच की। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक कितनी मात्रा में विदेशी मूल का सोना देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया गया।

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बांग्लादेश से भारत तक सोना पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क की पहचान करना भी है। DRI यह पता लगाने में जुटी है कि सीमा पार से सोना किस रास्ते भारत में लाया जाता था और देश में प्रवेश करने के बाद उसे किन लोगों के माध्यम से आगे भेजा जाता था। कोलकाता और गुवाहाटी से जुड़े कथित शिपरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों को आशंका है कि तस्करी के नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले कई लोग हो सकते हैं। इसमें सीमा पार से सोना लाने वाले लोगों के अलावा उसे प्राप्त करने, छिपाने, पैक करने, कूरियर के जरिए भेजने और अंतिम रिसीवर तक पहुंचाने वाले लोग शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसी इन सभी संभावित कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

कूरियर सेवाओं का कथित इस्तेमाल इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू है। आमतौर पर देशभर में रोजाना बड़ी संख्या में पार्सल भेजे जाते हैं। ऐसे में अवैध सामान को सामान्य कूरियर खेप के बीच छिपाकर भेजना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। DRI ने इसी वजह से खुफिया सूचना मिलने के बाद कुछ खास पार्सलों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की निगरानी की।

जांच एजेंसी आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों से जुड़े विवरण की भी जांच कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि गिरफ्तार आरोपियों के संपर्क में और कौन-कौन लोग थे तथा कथित तस्करी नेटवर्क का विस्तार किन राज्यों तक था। बैंक खातों और डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

DRI इस बात की भी जांच कर रही है कि विदेशी मूल का सोना भारत पहुंचने के बाद किस रूप में भेजा जाता था। तस्करी के मामलों में सोने की पहचान छिपाने के लिए कई तरीके अपनाए जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। मौजूदा मामले में कौन-सा तरीका अपनाया गया था, इसकी विस्तृत जानकारी जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट हो सकेगी।

एजेंसी के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित तौर पर तस्करी करके लाया गया सोना आखिरकार किन कारोबारियों या खरीदारों तक पहुंचता था। यदि सोना बाजार में बेचा गया तो उससे प्राप्त रकम कहां भेजी गई और भुगतान किस माध्यम से किया गया, इन पहलुओं की जांच से नेटवर्क की वित्तीय कड़ियां सामने आ सकती हैं।

अधिकारियों के मुताबिक ए.जी. कदम की कथित भूमिका पूरे नेटवर्क में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उस पर कोलकाता और गुवाहाटी से जुड़े शिपरों को नियंत्रित करने का आरोप है। वहीं अन्य गिरफ्तार आरोपियों की जिम्मेदारियों और नेटवर्क में उनकी वास्तविक भूमिका की जांच जारी है।

तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद DRI अब उनके संपर्कों और संभावित सहयोगियों की तलाश में जुटी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नेटवर्क कब से सक्रिय था, कितनी खेप एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाई गई और इसमें कुल कितने लोग शामिल थे।

फिलहाल तीनों आरोपियों के खिलाफ तस्करी से संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है। जांच अभी जारी है और आरोपियों पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी। DRI की जांच आगे बढ़ने के साथ विदेशी सोने की कथित तस्करी के इस नेटवर्क से जुड़े और नाम तथा इसकी अन्य कड़ियां सामने आ सकती हैं।

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