बीड: भूमि अधिग्रहण के मुआवजे की राशि में कथित हेरफेर कर ₹73.04 करोड़ के घोटाले की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। जांच एजेंसियों को इस मामले में जिला ट्रेजरी अधिकारी लाहू गलगुंडे की कथित भूमिका के संकेत मिले हैं। इसके बाद उन्हें मामले की चार्जशीट में संदिग्ध आरोपी के तौर पर शामिल किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, घोटाले में बढ़ाई गई मुआवजे की रकम को जारी करने की प्रक्रिया में गलगुंडे की भूमिका अहम मानी जा रही है।

जांच में सामने आया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए निर्धारित मुआवजे की राशि को गैर-कानूनी तरीके से बढ़ाया गया और फिर बढ़ी हुई रकम लाभार्थियों तथा कथित बिचौलियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन भुगतान प्रक्रियाओं में जिला ट्रेजरी अधिकारी की मंजूरी और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया था।

फर्जी तरीके से बढ़ाई गई मुआवजे की राशि

जांच अधिकारियों के मुताबिक, घोटाले में जमीन अधिग्रहण से जुड़े रिकॉर्ड में बदलाव कर मुआवजे की रकम को वास्तविक राशि से कई गुना बढ़ा दिया गया। इसके बाद सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की अतिरिक्त राशि निकाली गई। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि इस पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर नियमों की अनदेखी की गई।

मामले में जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बढ़ी हुई राशि किन-किन लोगों के खातों में पहुंची और इसमें कितने बिचौलियों की भूमिका रही। अधिकारियों का मानना है कि घोटाला सुनियोजित तरीके से किया गया और इसमें कई लोगों की मिलीभगत हो सकती है।

लाहू गलगुंडे की भूमिका पर उठे सवाल

जांच के दौरान अधिकारियों को ऐसे दस्तावेज मिले, जिनसे संकेत मिला कि बढ़ाई गई मुआवजे की रकम को जारी करने में लाहू गलगुंडे की मंजूरी ली गई थी। आरोप है कि उनके हस्ताक्षर के बाद ही संबंधित खातों में भुगतान किया गया।

जांच एजेंसियों ने अब उनकी भूमिका की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि चार्जशीट में नाम शामिल होने के बाद उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

घोटाला सामने आने के बाद से फरार

मामला उजागर होने के बाद से ही जिला ट्रेजरी अधिकारी लाहू गलगुंडे फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां उनकी तलाश में जुटी हैं। उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि गलगुंडे की गिरफ्तारी के बाद घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। उनसे पूछताछ के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि भुगतान प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका थी और क्या उन्होंने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की।

लाभार्थियों और बिचौलियों की भी जांच

जांच एजेंसियां उन लोगों की भी पहचान कर रही हैं, जिनके बैंक खातों में मुआवजे की अतिरिक्त राशि पहुंची। अधिकारियों के अनुसार, कुछ लाभार्थियों के साथ-साथ बिचौलियों की भूमिका भी संदिग्ध है।

एजेंसियां बैंक लेन-देन, दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि घोटाले से जुड़े लोगों के बीच पैसों का कोई अवैध लेन-देन हुआ या नहीं।

सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला

₹73.04 करोड़ का यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर प्रकरण माना जा रहा है। भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों में सरकार की ओर से प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा देने का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में आरोप है कि इसी व्यवस्था का गलत फायदा उठाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।

जांच एजेंसियां अब घोटाले की पूरी कड़ी जोड़ने में लगी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस मामले में कितने लोग शामिल थे और किस स्तर पर लापरवाही या साजिश हुई।

फिलहाल, लाहू गलगुंडे की तलाश जारी है और उनकी गिरफ्तारी के बाद मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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