पर्यावरण-अनुकूल गणेश विसर्जन की पहल को मिला समर्थन, नाशिक में 2.49 लाख प्रतिमाएं एकत्र
नाशिक। गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर नाशिक नगर निगम की ओर से शुरू की गई पहल को इस साल नागरिकों का अच्छा समर्थन मिला। नदियों, झीलों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से नगर निगम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में प्रतिमा संग्रह केंद्र और कृत्रिम विसर्जन सुविधाएं स्थापित की थीं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से पूरे शहर में करीब 2.49 लाख गणेश प्रतिमाएं एकत्र की गईं।
नगर निगम ने नागरिकों से अपील की थी कि वे गणेश प्रतिमाओं को सीधे प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जित करने के बजाय निर्धारित संग्रह केंद्रों पर सौंपें या कृत्रिम विसर्जन टैंकों का इस्तेमाल करें। बड़ी संख्या में लोगों ने इस अपील का पालन करते हुए पर्यावरण-अनुकूल तरीके से गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया।
गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमाओं के विसर्जन से नदियों और अन्य जल स्रोतों में प्रदूषण की समस्या बढ़ने की आशंका रहती है। इसे देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने त्योहार शुरू होने से पहले ही विसर्जन व्यवस्था की तैयारी कर ली थी।
शहर के विभिन्न इलाकों में प्रतिमा संग्रह केंद्र बनाए गए। यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद गणेश प्रतिमाएं नगर निगम की टीम को सौंप सकते थे। इसके अलावा कई स्थानों पर कृत्रिम विसर्जन टैंक भी बनाए गए, जिससे नागरिक प्राकृतिक जल स्रोतों तक जाए बिना परंपरागत तरीके से विसर्जन की प्रक्रिया पूरी कर सकें।
नगर निगम की पहल का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं के साथ पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना था। श्रद्धालुओं को विसर्जन की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ यह प्रयास किया गया कि नदियों, झीलों और दूसरे जल स्रोतों में जाने वाली प्रतिमाओं की संख्या कम की जा सके।
गणेश उत्सव के दौरान पूरे शहर से 2.49 लाख प्रतिमाओं का एकत्र होना नागरिकों की भागीदारी को दर्शाता है। बड़ी संख्या में परिवारों और गणेश मंडलों ने नगर निगम की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का इस्तेमाल किया।
प्रतिमा विसर्जन के अलावा पूजा के दौरान निकलने वाले फूल और अन्य धार्मिक चढ़ावे के लिए भी अलग व्यवस्था की गई थी। नगर निगम ने ‘निर्मल्य’ के संग्रह के लिए अलग-अलग स्थानों पर सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य फूल, पत्तियां और अन्य धार्मिक सामग्री को नदियों या जल स्रोतों में फेंके जाने से रोकना था। पूजा सामग्री को अलग से एकत्र करने से उसका उचित तरीके से निपटारा करना आसान होता है और जल प्रदूषण को कम करने में मदद मिलती है।
नगर निगम प्रशासन ने गणेश उत्सव से काफी पहले ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। शहर में ऐसे स्थानों की पहचान की गई जहां अधिक संख्या में लोग विसर्जन के लिए पहुंचते हैं। इसके आधार पर संग्रह केंद्रों और कृत्रिम टैंकों की व्यवस्था की गई।
गणेश उत्सव के दौरान शहर में बड़ी संख्या में घरों और सार्वजनिक मंडलों में गणपति प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। उत्सव समाप्त होने पर इन प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाएं प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जित होने पर पर्यावरण पर दबाव बढ़ सकता है।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई। नागरिकों को नजदीकी संग्रह केंद्र पर प्रतिमा सौंपने की सुविधा मिलने से उन्हें लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता भी कम हुई।
कृत्रिम विसर्जन टैंकों ने भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन टैंकों में प्रतिमा विसर्जित करने के बाद पानी और अन्य सामग्री का प्रबंधन नियंत्रित तरीके से किया जा सकता है।
प्राकृतिक जल स्रोतों में सीधे विसर्जन कम होने से नदियों और झीलों में प्रतिमाओं के अवशेष पहुंचने की मात्रा भी कम की जा सकती है। इससे जल स्रोतों की सफाई और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मदद मिलती है।
नगर निगम की ओर से की गई व्यवस्था में प्रतिमा संग्रह के साथ निर्मल्य संग्रह को भी महत्व दिया गया। गणेश पूजा के दौरान बड़ी मात्रा में फूल और अन्य सामग्री निकलती है। यदि इसे सामान्य कचरे या जल स्रोतों में डाल दिया जाए तो प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है।
अलग संग्रह केंद्र होने से नागरिकों को पूजा सामग्री के उचित निपटारे का विकल्प मिला। इससे धार्मिक सामग्री को सम्मानजनक तरीके से एकत्र करने के साथ पर्यावरण को नुकसान से बचाने का प्रयास किया गया।
नाशिक में नदियों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। ऐसे में गणेश उत्सव जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना नगर प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रहती है।
इस बार नगर निगम ने त्योहार शुरू होने से पहले ही नागरिकों को पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन के लिए प्रेरित किया। शहर में बनाए गए संग्रह केंद्रों और कृत्रिम विसर्जन सुविधाओं के बारे में लोगों को जानकारी दी गई।
इसका असर विसर्जन के दौरान दिखाई दिया और बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिमाएं निर्धारित केंद्रों पर जमा कीं। पूरे शहर में 2.49 लाख प्रतिमाओं का संग्रह इस अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।
पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन की व्यवस्था का एक उद्देश्य यह भी है कि त्योहार के बाद जल स्रोतों की सफाई में आने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सके। प्रतिमाओं और पूजा सामग्री के सीधे पानी में जाने से जल स्रोतों में बड़ी मात्रा में अवशेष जमा हो सकते हैं।
नगर निगम की ओर से प्रतिमाओं को पहले ही एकत्र कर लिए जाने से उनका निपटारा व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है। इससे त्योहार के बाद प्राकृतिक जल स्रोतों में सफाई का दबाव भी कम हो सकता है।
गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर नागरिकों की बढ़ती भागीदारी प्रशासन के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। धार्मिक परंपरा को बनाए रखते हुए प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए इस तरह की व्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है।
शहर में स्थापित कृत्रिम विसर्जन सुविधाओं ने लोगों को एक वैकल्पिक और सुविधाजनक रास्ता दिया। इससे वे अपने घर या मंडल की प्रतिमा का विसर्जन कर सके और प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने में योगदान दे सके।
नगर निगम की पहल में नागरिकों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण रही। प्रशासन की ओर से व्यवस्था उपलब्ध कराने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने उसका इस्तेमाल किया और प्रतिमाओं को सीधे नदी या झील में विसर्जित करने के बजाय संग्रह केंद्रों पर सौंपा।
इस वर्ष 2.49 लाख प्रतिमाओं का संग्रह होने से पर्यावरण-अनुकूल गणेश उत्सव की दिशा में नाशिक नगर निगम के प्रयासों को मजबूती मिली है। साथ ही निर्मल्य के अलग संग्रह की व्यवस्था से पूजा सामग्री के उचित निपटारे पर भी ध्यान दिया गया।
गणेश उत्सव के दौरान नागरिकों और प्रशासन की इस संयुक्त पहल से धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश सामने आया है। नगर निगम की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का व्यापक इस्तेमाल यह दर्शाता है कि नागरिक भी प्राकृतिक जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के प्रयासों में भागीदारी कर रहे हैं।