39 संगठनों को जोड़कर बनेगा ‘सागरी भूमिपुत्र महासंघ’, 29 सितंबर को ठाणे में होगा शुभारंभ
ठाणे। महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में रहने वाले मूल समुदायों के अधिकारों और विभिन्न मांगों को एक मंच पर उठाने के उद्देश्य से 39 संगठनों को साथ लाकर ‘सागरी भूमिपुत्र महासंघ’ का गठन किया गया है। महासंघ का औपचारिक शुभारंभ 29 सितंबर को ठाणे के गडकरी रंगायतन ऑडिटोरियम में किया जाएगा। कार्यक्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार और बाल योगी सदानंद महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
महासंघ के संस्थापक और भिवंडी से सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ ‘बाल्या मामा’ ने शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। इस दौरान महासंघ के महासचिव नीलेश पाटिल, उपाध्यक्ष अतुल म्हात्रे और संगठन में शामिल विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे।
सुरेश म्हात्रे ने बताया कि महाराष्ट्र के समुद्री और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले भूमिपुत्र समुदायों से जुड़े 39 संगठन इस महासंघ के बैनर तले एक साथ आ रहे हैं। इन संगठनों से जुड़े समुदायों के सामने जमीन, रोजगार, पारंपरिक व्यवसाय और विकास परियोजनाओं से जुड़े कई मुद्दे हैं। महासंघ का उद्देश्य इन मांगों को संगठित तरीके से सरकार और संबंधित संस्थाओं के सामने रखना होगा।
‘सागरी भूमिपुत्र महासंघ’ मुख्य रूप से महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्र में रहने वाले आगरी, कोली, कराडी, भंडारी, ईस्ट इंडियन और अन्य स्थानीय समुदायों से जुड़े मुद्दों पर काम करेगा। महासंघ का कहना है कि विकास परियोजनाओं और शहरीकरण के कारण इन समुदायों की जमीन और पारंपरिक आजीविका से जुड़े सवाल लगातार सामने आ रहे हैं।
महासंघ के पदाधिकारियों के अनुसार अलग-अलग संगठन अब तक अपने स्तर पर समुदायों की मांगों को उठाते रहे हैं। नए मंच के गठन का उद्देश्य इन सभी संगठनों को एक साथ लाकर साझा मुद्दों पर संयुक्त आवाज तैयार करना है। इसके जरिए सरकार तक मांगों को अधिक संगठित तरीके से पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
सागरी भूमिपुत्र महासंघ की प्रमुख मांगों में कोलीवाड़ा और गांवठाण क्षेत्रों के विकास से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा इन इलाकों के लिए अधिक फ्लोर स्पेस इंडेक्स यानी FSI की मांग भी उठाई जाएगी। महासंघ का कहना है कि स्थानीय बस्तियों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकास से संबंधित नीतियों में समुदायों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
महासंघ ने पारंपरिक रोजगार और व्यवसाय को बचाने को भी अपने प्रमुख उद्देश्यों में शामिल किया है। तटीय इलाकों में रहने वाले कई समुदाय पीढ़ियों से मछली पकड़ने और समुद्र से जुड़े दूसरे व्यवसायों पर निर्भर रहे हैं। महासंघ इन पारंपरिक आजीविका के संरक्षण और स्थानीय लोगों के रोजगार से जुड़े विषयों को भी उठाएगा।
इसके अलावा नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम दिवंगत नेता डी.बी. पाटिल के नाम पर रखने की मांग को भी महासंघ ने अपने एजेंडे में शामिल किया है। महाराष्ट्र में यह मांग पहले भी विभिन्न स्थानीय संगठनों की ओर से उठाई जाती रही है। अब महासंघ इस मुद्दे को अपने साझा मंच से आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद सुरेश म्हात्रे ने कहा कि तटीय क्षेत्रों में रहने वाले भूमिपुत्र समुदायों के सामने कई साझा समस्याएं हैं। अलग-अलग संगठनों के माध्यम से इन मुद्दों को उठाने के बजाय एक संयुक्त मंच की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से 39 संगठनों को एक साथ लाकर महासंघ बनाया गया है।
सुरेश म्हात्रे वर्तमान में भिवंडी लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) से जुड़े हैं। स्थानीय स्तर पर उन्हें ‘बाल्या मामा’ के नाम से भी जाना जाता है। महासंघ के संस्थापक के तौर पर वह तटीय और स्थानीय समुदायों से जुड़े संगठनों को एक मंच पर लाने की पहल कर रहे हैं।
29 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम में महासंघ की आगे की रूपरेखा और प्रमुख मांगों को विस्तार से सामने रखे जाने की उम्मीद है। कार्यक्रम के लिए ठाणे के गडकरी रंगायतन ऑडिटोरियम को चुना गया है। इसमें विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ समुदायों से जुड़े लोगों की भागीदारी भी होगी।
शरद पवार की मौजूदगी के कारण महासंघ के शुभारंभ कार्यक्रम पर राजनीतिक नजर भी रहेगी। हालांकि संगठन ने अपने गठन का मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र के तटीय भूमिपुत्र समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और पारंपरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाना बताया है।
महासंघ का जोर स्थानीय समुदायों की जमीन और उनके पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा पर भी रहेगा। महाराष्ट्र के मुंबई महानगर क्षेत्र और आसपास के तटीय इलाकों में तेजी से शहरीकरण और बड़ी परियोजनाओं के विस्तार के बीच स्थानीय समुदाय लंबे समय से जमीन और पुनर्विकास से जुड़े विषय उठाते रहे हैं।
महासंघ का कहना है कि विकास परियोजनाओं के दौरान भूमिपुत्रों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। परियोजनाओं से प्रभावित स्थानीय लोगों के पुनर्वास, रोजगार और अन्य अधिकारों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की मांग संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगी।
महासंघ के गठन के बाद 39 संगठनों के बीच समन्वय बनाकर अलग-अलग मांगों पर संयुक्त कार्यक्रम तैयार किए जाने की योजना है। इसके माध्यम से सरकार के सामने ज्ञापन देने, संबंधित विभागों के साथ बातचीत करने और जरूरत पड़ने पर समुदायों की मांगों को लेकर सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने की रणनीति बनाई जा सकती है।
फिलहाल सभी की नजर 29 सितंबर को होने वाले औपचारिक शुभारंभ पर है। इस कार्यक्रम में महासंघ अपने भविष्य के कार्यक्रम और मांगों को लेकर विस्तृत जानकारी दे सकता है। 39 संगठनों के एक मंच पर आने के कारण महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न स्थानीय मुद्दों को संयुक्त रूप से उठाने की नई पहल शुरू होने जा रही है।
महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य तटीय इलाकों के मूल समुदायों की आवाज को मजबूत करना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संगठित प्रयास करना है। जमीन, पारंपरिक आजीविका, कोलीवाड़ा विकास, FSI और स्थानीय अधिकार जैसे मुद्दे आने वाले समय में संगठन की गतिविधियों के केंद्र में रहेंगे।