पुणे। पारंपरिक ढोल-ताशे की थाप, फूलों की बारिश और “मोरया मोरया” के जयकारों के बीच पुणे ने शनिवार सुबह श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति को भावुक विदाई दी। भारत के पहले सार्वजनिक गणपति के रूप में माने जाने वाली इस गणपति प्रतिमा का विसर्जन शनिवार सुबह 4:01 बजे किया गया। प्रतिमा की एक झलक पाने के लिए जुलूस के मार्ग पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जमा हुए।श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति का विसर्जन जुलूस शुक्रवार रात करीब 9 बजे शुरू हुआ। जुलूस में पारंपरिक उत्सवी माहौल देखने को मिला। ढोल-ताशे की थाप के बीच श्रद्धालु गणपति बप्पा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। रास्ते में कई स्थानों पर प्रतिमा पर फूलों की बारिश की गई। भक्तों में गणपति के अंतिम दर्शन को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया।
गणपति प्रतिमा को विशेष रूप से सजाए गए ‘श्री विघ्नहर्ता रथ’ पर विराजमान किया गया था। इसी रथ पर प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाया गया। रथ की सजावट और प्रतिमा के दर्शन के लिए जुलूस के मार्ग में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। श्रद्धालु रास्ते के दोनों ओर खड़े होकर प्रतिमा के दर्शन करते रहे और “मोरया मोरया” के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।जुलूस का नेतृत्व उत्सव प्रमुख और श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी ट्रस्ट के ट्रस्टी पुनीत बालन ने किया। शुक्रवार रात शुरू हुआ यह जुलूस शनिवार तड़के तक जारी रहा। इसके बाद शनिवार सुबह 4:01 बजे गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया गया और उत्सव की इस महत्वपूर्ण परंपरा का समापन हुआ।
भाऊसाहेब रंगारी गणपति को पुणे के गणेशोत्सव इतिहास में विशेष स्थान प्राप्त है। इसे भारत का पहला सार्वजनिक गणपति माना जाता है। इसी वजह से इस प्रतिमा के विसर्जन के दौरान हर वर्ष श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ जुटती है। इस बार भी जुलूस के मार्ग पर हजारों भक्त प्रतिमा की एक झलक पाने के लिए मौजूद रहे।जुलूस के दौरान पारंपरिक ढोल-ताशा पथकों ने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को उत्सवी बनाए रखा। ढोल-ताशे की आवाज के साथ श्रद्धालु जयकारे लगाते रहे। कई स्थानों पर प्रतिमा पर फूल बरसाए गए। धार्मिक उत्साह और पारंपरिक रंगों के बीच भक्तों ने गणपति को विदाई दी।
प्रतिमा को ‘श्री विघ्नहर्ता रथ’ पर ले जाने की व्यवस्था की गई थी। रथ को विशेष रूप से सजाया गया था। प्रतिमा के दर्शन के लिए रास्ते में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। भीड़ में परिवारों के साथ आए श्रद्धालु, युवा और गणपति भक्त शामिल रहे। सभी प्रतिमा के दर्शन कर गणपति बप्पा को विदाई देना चाहते थे।विसर्जन से पहले शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे पूजा और आरती का आयोजन भी किया गया। आलंदी देवस्थान के मुख्य ट्रस्टी डॉ. भावार्थ देखणे और पुलिस उपायुक्त ऋषिकेश रावले ने मूर्ति की पूजा और आरती की। इसके बाद धार्मिक विधियों के बीच विसर्जन से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ी।
पूजा और आरती के दौरान भी श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। गणपति प्रतिमा के दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भक्तों में उत्साह देखने को मिला। इसके बाद प्रतिमा को जुलूस के माध्यम से आगे ले जाया गया।श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस जुलूस में पुणे की पारंपरिक गणेशोत्सव संस्कृति की झलक देखने को मिली। ढोल-ताशा, फूलों की बारिश और गणपति के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने उत्सव के अंतिम चरण में भाग लिया। गणपति प्रतिमा के साथ चल रहे जुलूस को देखने के लिए रास्ते में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
शुक्रवार रात करीब 9 बजे शुरू हुआ जुलूस कई घंटे तक जारी रहा। प्रतिमा को सजाए गए रथ पर लेकर श्रद्धालुओं के बीच से निकाला गया। पुनीत बालन ने रथ का नेतृत्व किया। जुलूस के आगे बढ़ने के साथ ही रास्ते में लोगों की भीड़ भी बनी रही।शनिवार सुबह 4:01 बजे प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इसके साथ ही श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति के इस वर्ष के उत्सव का विसर्जन कार्यक्रम पूरा हुआ। गणपति की विदाई के समय श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और भावुक माहौल में बप्पा को विदा किया।
भाऊसाहेब रंगारी गणपति को भारत का पहला सार्वजनिक गणपति माना जाता है। पुणे के गणेशोत्सव की परंपरा और इतिहास में इसका खास महत्व है। यही वजह है कि विसर्जन जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही। भक्तों ने जुलूस के रास्ते में खड़े होकर प्रतिमा के दर्शन किए और धार्मिक उत्साह के साथ विदाई दी।पूरे आयोजन के दौरान पारंपरिक धार्मिक माहौल बना रहा। ढोल-ताशे की थाप और “मोरया मोरया” के जयकारों के बीच गणपति प्रतिमा को अंतिम यात्रा पर ले जाया गया। फूलों की बारिश के बीच श्रद्धालुओं ने बप्पा को विदाई दी।
इससे पहले सुबह करीब 7:30 बजे आलंदी देवस्थान के मुख्य ट्रस्टी डॉ. भावार्थ देखणे और पुलिस उपायुक्त ऋषिकेश रावले ने प्रतिमा की पूजा और आरती की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने गणपति के दर्शन किए। अंततः शनिवार सुबह 4:01 बजे विसर्जन के साथ श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति उत्सव का समापन हुआ।इस तरह पुणे में श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति को पारंपरिक अंदाज में विदाई दी गई। शुक्रवार रात शुरू हुआ जुलूस शनिवार तड़के तक चला। हजारों भक्तों की मौजूदगी, ढोल-ताशे की थाप, फूलों की बारिश और “मोरया मोरया” के जयकारों के बीच सुबह 4:01 बजे गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
Tags: