कार्रवाई के बाद भी लौट रहे अवैध होर्डिंग, हिंजवडी चौक में सुरक्षा पर उठे सवाल
पुणे। महाराष्ट्र के घाटकोपर में होर्डिंग गिरने की दर्दनाक घटना के बाद पूरे राज्य में अवैध बिलबोर्ड के खिलाफ अभियान शुरू किया गया था। लेकिन इस कार्रवाई के दो साल से अधिक समय बाद भी पुणे मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMRDA) क्षेत्र में अनधिकृत होर्डिंग की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है।
पुणे के हिंजवडी चौक पर बार-बार अवैध होर्डिंग लगाए जाने से स्थानीय निवासियों और यहां से गुजरने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जब एक बार कार्रवाई कर होर्डिंग हटाए जा चुके हैं, तो फिर वही होर्डिंग दोबारा कैसे लग रहे हैं। इससे प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
घाटकोपर हादसे के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई
घाटकोपर में अवैध होर्डिंग गिरने से हुई जानलेवा घटना के बाद राज्यभर में बड़े पैमाने पर अवैध होर्डिंग की जांच शुरू की गई थी। पुणे जिला प्रशासन ने सभी संबंधित नागरिक एजेंसियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध होर्डिंग की पहचान कर उन्हें हटाने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद PMRDA ने अपने अधिकार क्षेत्र में सर्वे कराया। सर्वे के दौरान कुल 1,057 अनधिकृत होर्डिंग पाए गए थे। इनमें हिंजवडी, वाकड और महालुंगे जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में लगे 132 बड़े आकार के होर्डिंग भी शामिल थे, जिन्हें सुरक्षा के लिहाज से अधिक जोखिम वाला माना गया।
हिंजवडी और वाकड में बड़ी चुनौती
PMRDA ने जून 2024 में चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद अवैध होर्डिंग हटाने का अभियान शुरू किया। शुरुआती चरण में हिंजवडी चौक और वाकड क्षेत्र में कार्रवाई की गई।
हालांकि, अभियान के दौरान कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आईं। भारी बारिश, क्रेन की उपलब्धता की कमी और सीमित कर्मचारियों के कारण कार्रवाई की गति प्रभावित हुई। इसके बावजूद अथॉरिटी ने समय-समय पर अभियान जारी रखा।
PMRDA अधिकारियों के अनुसार, कई होर्डिंग मालिकों ने नोटिस जारी होने के बाद खुद ही अपने अवैध ढांचे हटा लिए, जबकि कुछ मामलों में अथॉरिटी को मौके पर पहुंचकर होर्डिंग हटाने पड़े और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई।
बार-बार लग रहे होर्डिंग से बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि हटाए गए होर्डिंग कुछ समय बाद फिर से दिखाई देने लगते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या अवैध होर्डिंग लगाने वालों पर स्थायी रोक लग पा रही है।
हिंजवडी चौक जैसे व्यस्त इलाकों में बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं और रोजाना हजारों लोग यहां से गुजरते हैं। ऐसे में कमजोर ढांचे वाले बड़े होर्डिंग किसी भी समय गंभीर हादसे का कारण बन सकते हैं।
निवासियों का कहना है कि केवल होर्डिंग हटाना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि दोबारा उसी स्थान पर अवैध विज्ञापन संरचनाएं न लगाई जा सकें।
निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध होर्डिंग की समस्या से निपटने के लिए नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई जरूरी है। केवल अभियान चलाकर कुछ समय के लिए होर्डिंग हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
इसके लिए होर्डिंग लगाने वालों की पहचान, जुर्माना, कानूनी कार्रवाई और लगातार निरीक्षण जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा। खासकर उन क्षेत्रों में जहां यातायात अधिक है और लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
PMRDA की कार्रवाई जारी
PMRDA का कहना है कि अवैध होर्डिंग के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। अथॉरिटी ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल, हिंजवडी चौक पर दोबारा दिखाई दे रहे अनधिकृत होर्डिंग ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। घाटकोपर हादसे के बाद शुरू हुई कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे खतरों को रोकना था, लेकिन बार-बार लौटते होर्डिंग यह संकेत दे रहे हैं कि निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।