गोवा : कुछ कोस्टल रिजॉर्ट और लग्जरी विला कथित तौर पर साइबर फ्रॉड से जुड़ी रकम को इधर-उधर करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। मुंबई क्राइम ब्रांच ने पिछले दो महीनों में गोवा से संचालित होने वाले दो अलग-अलग साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इन नेटवर्क के जरिए बड़ी मात्रा में संदिग्ध लेन-देन किए गए।
जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों गिरोह कथित रूप से ‘म्यूल बैंक अकाउंट्स’ का इस्तेमाल कर साइबर धोखाधड़ी से हासिल रकम को ट्रांसफर करते थे। पुलिस का दावा है कि पिछले छह महीनों में अलग-अलग म्यूल खातों के जरिए 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का लेन-देन किया गया।
हालांकि, पुलिस जांच अभी जारी है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
गोवा से चल रहे थे कथित नेटवर्क
मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि दोनों गैंग गोवा से अपनी गतिविधियां चला रहे थे। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान इन नेटवर्क से जुड़े लोगों और उनके काम करने के तरीके की जानकारी जुटाई।
जांच में यह भी सामने आया कि साइबर अपराध से जुड़ी रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय कई बैंक खातों के जरिए अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाता था। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अवैध धन को छिपाने या ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।
म्यूल अकाउंट्स के जरिए रकम ट्रांसफर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठगी करने वाले गिरोह अक्सर ऐसे बैंक खातों का सहारा लेते हैं, जो किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर होते हैं। इन खातों के जरिए रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता है, जिससे वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में कथित तौर पर ऐसे कई बैंक खातों की जानकारी सामने आई है, जिनके माध्यम से बड़ी रकम का लेन-देन हुआ।
गुजरात कनेक्शन की जांच
पुलिस के अनुसार, दोनों कथित गिरोहों का संबंध गुजरात से होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां अब इन नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।
इसके अलावा पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन गिरोहों के तार अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। इसके लिए डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जानकारी का विश्लेषण किया जा रहा है।
लग्जरी ठिकानों का इस्तेमाल
जांच में यह बात भी सामने आई है कि कथित तौर पर गोवा के कोस्टल रिजॉर्ट और लग्जरी विला जैसे स्थानों से ये गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन जगहों का इस्तेमाल किस तरह किया जाता था और इसमें कितने लोग शामिल थे। जांच के दौरान संदिग्ध ठिकानों और वहां मौजूद लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
साइबर अपराध के बढ़ते मामले
देशभर में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। ठग ऑनलाइन निवेश, फर्जी नौकरी, डिजिटल गिरफ्तारी, बैंकिंग धोखाधड़ी और अन्य तरीकों से लोगों को निशाना बनाते हैं।
इन अपराधों में ठगी की रकम को छिपाने और आगे भेजने के लिए म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। जांच एजेंसियां ऐसे नेटवर्क को तोड़ने के लिए बैंकिंग और डिजिटल रिकॉर्ड की मदद ले रही हैं।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई जारी
मुंबई क्राइम ब्रांच ने दोनों मामलों में जांच आगे बढ़ा दी है। पुलिस अब आरोपियों के नेटवर्क, बैंक खातों, डिजिटल गतिविधियों और संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल पुलिस संदिग्ध लेन-देन और साइबर अपराध से जुड़े अन्य मामलों को जोड़कर जांच कर रही है।
गोवा से सामने आए इस कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क ने एक बार फिर दिखाया है कि ऑनलाइन अपराधों में रकम को छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए अपराधी नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे मामलों में वित्तीय निगरानी और डिजिटल जांच की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।