मुंबई : बायकुला इलाके में गणेशोत्सव की एक खास पहचान बन चुके ‘बायकुला चा राजा’ इस वर्ष अपनी 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। समय बदला, बाजार बदला, व्यापारियों की कई पीढ़ियां बदल गईं और शहर का विस्तार भी लगातार होता गया, लेकिन बायकुला चा राजा के गणेश जी का स्वरूप आज भी वैसा ही बना हुआ है, जैसा दशकों पहले था।
फल और सब्जी व्यापारियों के बीच विशेष आस्था रखने वाले इस गणपति की सबसे बड़ी खासियत उनकी बैठी हुई मुद्रा और असली गहनों से होने वाला श्रृंगार है। यही परंपरा वर्षों से भक्तों को आकर्षित करती रही है और गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
75 वर्षों से कायम है गणेश जी का स्वरूप
बायकुला चा राजा की स्थापना की परंपरा कई दशकों पुरानी है। इस गणपति की प्रतिमा का डिजाइन और स्वरूप लंबे समय से एक जैसा रखा गया है। आयोजकों का मानना है कि यही स्थिरता इस गणपति की सबसे बड़ी पहचान है।
कई भक्त ऐसे हैं, जिनके परिवार की कई पीढ़ियां इस गणपति के दर्शन करती आ रही हैं। बुजुर्गों को आज भी वही स्वरूप दिखाई देता है, जो उन्होंने अपने बचपन में देखा था। यही वजह है कि बायकुला चा राजा से लोगों की भावनाएं गहराई से जुड़ी हुई हैं।
दक्षिण भारतीय मंदिर शैली की झलक
बायकुला चा राजा की प्रतिमा को दक्षिण भारतीय शैली के मंदिर की भव्य प्रतिकृति के सामने स्थापित किया जाता है। यह सजावट गणपति के दरबार को एक अलग ही आकर्षण देती है।
मंदिर शैली की पृष्ठभूमि और बैठी हुई मुद्रा में विराजमान गणेश जी की प्रतिमा भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है। सजावट में पारंपरिक तत्वों को शामिल किया जाता है, जिससे पुराने समय की धार्मिक भावना और आधुनिक आयोजन का सुंदर मेल दिखाई देता है।
फल और सब्जी व्यापारियों की आस्था का केंद्र
बायकुला क्षेत्र के फल और सब्जी व्यापारियों के लिए यह गणपति विशेष महत्व रखते हैं। व्यापारियों का इस गणेशोत्सव से लंबे समय से जुड़ाव रहा है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि गणपति उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समुदाय को जोड़ने का माध्यम भी है। वर्षों से व्यापारी और स्थानीय लोग मिलकर इस उत्सव को आगे बढ़ाते आ रहे हैं।
असली गहनों से होता है श्रृंगार
बायकुला चा राजा की एक खास पहचान उनके श्रृंगार से भी जुड़ी हुई है। भगवान गणेश की प्रतिमा को असली गहनों से सजाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
गहनों से सजा हुआ गणपति भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता है। हालांकि, इस परंपरा के साथ सुरक्षा व्यवस्था का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। आयोजन समिति की ओर से दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए जाते हैं।
बदलते शहर में कायम है पुरानी परंपरा
मुंबई के बायकुला क्षेत्र में पिछले कई दशकों में काफी बदलाव आया है। नई इमारतें बनीं, बाजारों का स्वरूप बदला और लोगों की जीवनशैली में भी बदलाव आया, लेकिन बायकुला चा राजा की परंपरा आज भी उसी श्रद्धा के साथ जारी है।
आयोजकों का कहना है कि इस गणपति की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि बदलते समय के साथ भी इसका मूल स्वरूप और भावनात्मक जुड़ाव कायम रखा गया है।
नई पीढ़ी भी जुड़ रही परंपरा से
75 वर्ष पूरे होने के मौके पर नई पीढ़ी भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। युवा आयोजक पुराने रीति-रिवाजों को बनाए रखते हुए व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रहे हैं।
गणेशोत्सव के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दर्शन, सजावट और आयोजन से जुड़े कई इंतजाम किए जाते हैं। हर वर्ष भक्तों की संख्या बढ़ती है और लोगों में इस गणपति के प्रति आस्था और मजबूत होती जा रही है।
बायकुला चा राजा की 75वीं वर्षगांठ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मुंबई की सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक परंपरा का उत्सव भी है। दशकों से एक जैसे स्वरूप में विराजमान गणेश जी आज भी लाखों भक्तों के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बने हुए हैं।