छत्रपति संभाजीनगर : जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक चले छात्र आंदोलन के बाद सुर्खियों में आई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अब अपने ही संगठन के भीतर उठ रहे असंतोष को लेकर चर्चा में है। पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके के महाराष्ट्र स्थित आवास पर आयोजित दो दिवसीय बैठक के दौरान कुछ स्वयंसेवकों ने बाहर विरोध प्रदर्शन किया और संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि जंतर-मंतर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कई जमीनी कार्यकर्ताओं को पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक से दूर रखा गया। इस घटनाक्रम ने संगठन के भीतर लोकतांत्रिक भागीदारी और नेतृत्व शैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सीजेपी की कोर टीम की यह बैठक छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित की गई थी। बैठक में संगठन के विस्तार और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। इसी दौरान अभिजीत दीपके को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक घोषित किया गया और विभिन्न राज्यों के लिए नई जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। पार्टी ने दावा किया कि देशभर में संगठन को मजबूत करने और युवाओं को जोड़ने के उद्देश्य से नई संरचना तैयार की जा रही है।
हालांकि बैठक के दौरान दीपके के घर के बाहर कुछ युवाओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना था कि वे भी जंतर-मंतर पर चले आंदोलन का हिस्सा रहे हैं और लंबे समय तक आंदोलन में सक्रिय रहे, लेकिन संगठन की महत्वपूर्ण बैठक में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। उनका आरोप था कि आंदोलन में योगदान देने वाले स्वयंसेवकों की अनदेखी की जा रही है और निर्णय केवल सीमित लोगों के बीच लिए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों में शामिल दो युवाओं की पहचान अहमदाबाद निवासी मनीष और राहुल पांड्या के रूप में हुई। दोनों ने दावा किया कि उन्होंने दिल्ली में आयोजित छात्र आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनका कहना था कि आंदोलन शुरू होने के समय उसका कोई बड़ा चेहरा नहीं था और देशभर से आए स्वयंसेवकों ने मिलकर इसे सफल बनाया। इसके बावजूद अब संगठन के फैसलों में उन्हीं लोगों को महत्व दिया जा रहा है जो नेतृत्व के करीबी हैं।
मनीष ने आरोप लगाया कि उन्होंने बैठक में शामिल होने और नेतृत्व से मुलाकात करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अवसर नहीं दिया गया। उनका कहना था कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति या परिवार का नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं का था। उन्होंने मांग की कि संगठन को पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाए और आंदोलन में योगदान देने वाले सभी कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर मिले। विरोध के दौरान मनीष ने अनिश्चितकालीन अनशन भी शुरू कर दिया और कहा कि उन्हें संगठन में पारदर्शिता और जवाबदेही चाहिए, न कि व्यक्तिवादी नेतृत्व।
प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने यह भी कहा कि उन्हें किसी नए व्यक्तिकेंद्रित राजनीतिक मॉडल की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि यदि संगठन वास्तव में युवाओं की आवाज बनना चाहता है तो निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संगठन की नई संरचना में जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वयंसेवकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
दूसरी ओर, बैठक समाप्त होने के बाद अभिजीत दीपके ने पत्रकारों से बातचीत में संगठन की आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सीजेपी अगले महीने से देशव्यापी **"क्या बोलती पब्लिक"** अभियान शुरू करेगी। इस अभियान के माध्यम से पार्टी विभिन्न राज्यों में जाकर लोगों से सीधे संवाद करेगी, उनकी समस्याओं को सुनेगी और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी। उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षा, बेरोजगारी, युवाओं के भविष्य और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देगा।
दीपके ने स्पष्ट किया कि सीजेपी स्वयं को केवल एक राजनीतिक दल के रूप में नहीं बल्कि जनदबाव बनाने वाले मंच के रूप में विकसित करना चाहती है। उनके अनुसार संगठन का उद्देश्य देश के राजनीतिक विमर्श में शिक्षा, रोजगार, पारदर्शिता और युवाओं के अधिकारों जैसे विषयों को प्रमुखता दिलाना है। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के बीच जाकर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझेगी और उसी आधार पर आगे की रणनीति तय करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी नए संगठन के लिए शुरुआती दौर में संगठनात्मक चुनौतियां स्वाभाविक होती हैं। जंतर-मंतर आंदोलन से पहचान बनाने वाली सीजेपी अब अपने विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन साथ ही उसे संगठन के भीतर उठ रही असंतोष की आवाजों का भी सामना करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नेतृत्व इन शिकायतों का समाधान किस प्रकार करता है और क्या संगठन अपने स्वयंसेवकों के साथ संवाद बढ़ाकर आंतरिक मतभेदों को दूर कर पाता है। फिलहाल, कोर टीम की बैठक और उसके बाहर हुए विरोध प्रदर्शन ने सीजेपी की आंतरिक कार्यशैली को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।