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ओम बिरला का निर्देश, सांसदों की सुविधा के लिए मकर द्वार पर बनेगा शेड

Ratna Netam
7 Aug 2026 7:07 PM IST
ओम बिरला का निर्देश, सांसदों की सुविधा के लिए मकर द्वार पर बनेगा शेड
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नई दिल्ली : संसद के मौजूदा मानसून सत्र के बीच लगातार हो रही बारिश और तेज धूप से सांसदों को होने वाली असुविधा को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नए संसद भवन के मकर द्वार पर बरामदा (पोर्च) बनाने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) और वास्तुकारों से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। इस पहल का उद्देश्य सांसदों और अन्य अधिकृत आगंतुकों को संसद भवन में प्रवेश और निकास के दौरान मौसम की मार से राहत देना है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक में मकर द्वार की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि संसद भवन जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में आने-जाने वाले जनप्रतिनिधियों को बारिश या तेज धूप में खुले स्थान पर इंतजार न करना पड़े, इसके लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने मकर द्वार पर एक स्थायी बरामदा बनाने की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के निर्देश दिए।
मकर द्वार नए संसद भवन के प्रमुख प्रवेश द्वारों में से एक है और इसका उपयोग बड़ी संख्या में सांसदों तथा अन्य अधिकृत व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। वर्तमान में संसद का मानसून सत्र चल रहा है और दिल्ली में लगातार हो रही बारिश के कारण कई बार सांसदों को भवन में प्रवेश या बाहर निकलते समय खुले में खड़ा रहना पड़ता है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव सामने आया है, ताकि प्रवेश द्वार के सामने एक ढका हुआ क्षेत्र तैयार किया जा सके जहां लोग मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से सुरक्षित रह सकें।
अधिकारियों का कहना है कि पुराने संसद भवन में विभिन्न प्रवेश द्वारों पर पहले से बरामदों की व्यवस्था उपलब्ध है। इनका उद्देश्य भी यही था कि सांसदों और आगंतुकों को बारिश और धूप से बचाया जा सके। अब उसी अनुभव के आधार पर नए संसद भवन के मकर द्वार पर भी ऐसी सुविधा विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, नए भवन की आधुनिक वास्तुकला और संरचनात्मक डिजाइन को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी निर्माण कार्य से भवन की मूल डिजाइन या सुरक्षा मानकों पर कोई प्रभाव न पड़े।
लोकसभा अध्यक्ष ने सीपीडब्ल्यूडी और वास्तु विशेषज्ञों को निर्देश दिए हैं कि वे तकनीकी दृष्टि से यह आकलन करें कि बरामदे का निर्माण किस प्रकार किया जा सकता है। रिपोर्ट में डिजाइन, सुरक्षा, सौंदर्य, यातायात व्यवस्था और भवन की मूल संरचना के अनुरूप निर्माण संबंधी सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
इस बीच संसद परिसर में गुरुवार को हुई तेज बारिश के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का बिना छाते के संसद भवन के बाहर खड़े होने का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना। मानसून के दौरान संसद परिसर में बारिश से उत्पन्न असुविधा को लेकर यह वीडियो भी व्यापक रूप से साझा किया गया। हालांकि प्रस्तावित बरामदे का निर्णय किसी एक घटना से नहीं, बल्कि सांसदों की दीर्घकालिक सुविधा और संसद परिसर में बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संसद भवन देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थानों में से एक है, इसलिए वहां आधुनिक सुविधाओं का विकास समय की आवश्यकता है। यदि मकर द्वार पर बरामदा बनाया जाता है, तो इससे न केवल सांसदों बल्कि संसद आने वाले अन्य अधिकृत आगंतुकों को भी मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में राहत मिलेगी। इसके साथ ही संसद परिसर की कार्यकुशलता और सुविधाजनक संचालन को भी मजबूती मिलेगी।
फिलहाल सीपीडब्ल्यूडी और वास्तुकारों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि मकर द्वार पर बरामदे का निर्माण किस स्वरूप में किया जाएगा और इसे कब तक पूरा किया जा सकेगा। संसद के मानसून सत्र के दौरान उठाया गया यह कदम भविष्य में संसद परिसर की आधारभूत सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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