मुंबई। महाराष्ट्र के मिट्टी और जल संरक्षण विभाग में लंबे समय से खाली पड़े एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पदों पर आखिरकार नियुक्तियां कर दी गई हैं। करीब तीन साल से रिक्त पड़े इन पदों पर अब नासिक, जलगांव, धुले, नंदुरबार और अहिल्यानगर जिलों में नए एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (जिला जल संरक्षण अधिकारी) नियुक्त किए गए हैं।
विभाग में अधिकारियों की कमी के कारण कई जल संरक्षण परियोजनाओं के काम प्रभावित हो रहे थे। अब नई नियुक्तियों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रुकी हुई योजनाओं को गति मिलेगी और जल संरक्षण से जुड़े कार्य तेजी से पूरे किए जा सकेंगे।
प्रमोशन के जरिए हुई नियुक्तियां
मिट्टी और जल संरक्षण विभाग में खाली पड़े पदों को भरने के लिए प्रमोशन प्रक्रिया अपनाई गई है।
सुपरिटेंडिंग इंजीनियर हरिभाऊ गीते ने इन पदों को भरने के लिए सरकार स्तर पर लगातार प्रयास किए थे। उनकी कोशिशों के बाद अब विभाग ने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की है।
पूर्व मुख्यमंत्री सुधाकरराव नाइक की पुण्यतिथि के अवसर पर 18 अगस्त को आयोजित जल संरक्षण दिवस कार्यक्रम के दौरान इस संबंध में बड़ा फैसला लिया गया।
मंत्री संजय राठौड़ ने जारी किए आदेश
जल संरक्षण दिवस के मौके पर मिट्टी और जल संरक्षण मंत्री संजय राठौड़ ने जल संरक्षण अधिकारियों को एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर प्रमोट करने के आदेश जारी किए।
इन अधिकारियों को अब जिला जल संरक्षण अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।
विभाग का मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति से योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी और प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी।
लंबे समय से खाली थे महत्वपूर्ण पद
मिट्टी और जल संरक्षण विभाग में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद काफी समय से खाली पड़े थे।
नासिक और अहिल्यानगर को छोड़कर कई जिलों में जिला परिषद और राज्य स्तर पर इन पदों की कमी महसूस की जा रही थी।
अधिकारियों की अनुपलब्धता के कारण जल संरक्षण योजनाओं की समीक्षा, निगरानी और क्रियान्वयन में परेशानियां आ रही थीं।
जल संरक्षण परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार
महाराष्ट्र के कई जिलों में जल संरक्षण से जुड़े कार्य चल रहे हैं। इनमें जलसंधारण, बांधों की मरम्मत, जल संचयन और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने वाली योजनाएं शामिल हैं।
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद खाली होने से इन योजनाओं की गति प्रभावित हो रही थी।
अब नए अधिकारियों की नियुक्ति के बाद परियोजनाओं की निगरानी और कामों के समय पर पूरा होने की उम्मीद बढ़ी है।
प्रशासनिक ढांचा होगा मजबूत
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन नियुक्तियों से मिट्टी और जल संरक्षण विभाग का प्रशासनिक ढांचा मजबूत होगा।
जिला स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध होने से योजनाओं की समस्याओं का समाधान तेजी से किया जा सकेगा।
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल भी स्थापित होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
जल संरक्षण योजनाओं का सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और आम लोगों को मिलता है।
समय पर योजनाएं पूरी होने से सिंचाई सुविधाओं में सुधार, भूजल स्तर बढ़ाने और सूखे की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
नई नियुक्तियों के बाद ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में तेजी आने की संभावना है।
विभाग की चुनौतियां भी रहेंगी
हालांकि नियुक्तियों के बाद विभाग के सामने कई चुनौतियां भी बनी रहेंगी।
अधिकारियों को लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के साथ-साथ नई योजनाओं को भी आगे बढ़ाना होगा।
इसके लिए बजट, तकनीकी संसाधन और जमीनी स्तर पर बेहतर निगरानी की जरूरत होगी।
सरकार की जल संरक्षण पर प्राथमिकता
महाराष्ट्र सरकार लगातार जल संरक्षण को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल करती रही है।
राज्य के कई हिस्सों में पानी की कमी और सूखे की स्थिति को देखते हुए जल संरक्षण योजनाओं का महत्व बढ़ गया है।
नई नियुक्तियों को इसी दिशा में प्रशासनिक मजबूती के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
आगे बढ़ेगा विभाग का काम
तीन साल बाद महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां होने से विभागीय कार्यों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
अब नासिक, जलगांव, धुले, नंदुरबार और अहिल्यानगर जिलों में जल संरक्षण योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन पहले से बेहतर तरीके से हो सकेगा।
विभाग को उम्मीद है कि नए अधिकारियों की नियुक्ति से लंबित काम पूरे होंगे और राज्य में जल संरक्षण अभियान को नई गति मिलेगी।