जलगांव। सीमा पर देश की रक्षा में तैनात सैनिकों के प्रति सम्मान और आभार जताने के लिए महाराष्ट्र के जलगांव जिले की छात्राएं पिछले 31 वर्षों से एक अनोखी परंपरा निभा रही हैं। धरनगांव स्थित इंदिरा गांधी सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्राएं अपनी पॉकेट मनी से हाथों से राखियां तैयार करती हैं और उन्हें सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचाती हैं।

इस साल इस भावनात्मक पहल का 32वां वर्ष है। छात्राओं ने रक्षाबंधन के अवसर पर सैनिकों के लिए 1,500 तिरंगा राखियां तैयार कर भेजीं। जब स्कूल की छात्राओं को जानकारी मिली कि उनकी बनाई राखियां सीमा तक पहुंच गई हैं, तो उनके चेहरे खुशी से खिल उठे।

पॉकेट मनी से तैयार करती हैं राखियां

इस अनोखी पहल की खास बात यह है कि छात्राएं अपने खर्च के पैसे बचाकर राखियां बनाती हैं। वे बाजार से राखी खरीदने के बजाय खुद मेहनत करके देश के जवानों के लिए विशेष राखियां तैयार करती हैं।

इन राखियों में देशभक्ति की भावना झलकती है। इस वर्ष छात्राओं ने तिरंगे के रंगों से प्रेरित राखियां बनाईं, जिन्हें सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए भेजा गया।

छात्राओं का कहना है कि सैनिक अपने परिवारों से दूर रहकर देश की सुरक्षा करते हैं। ऐसे में रक्षाबंधन के मौके पर उन्हें अपनापन महसूस कराना उनकी छोटी सी कोशिश है।

31 साल पहले शुरू हुई थी पहल

इस अभियान की शुरुआत करीब 31 साल पहले हुई थी। स्कूल के तत्कालीन सुपरवाइजर राजेंद्र पडोल ने एक लेख पढ़ा था, जिसमें एक सैनिक की भावनाओं को बताया गया था।

लेख में सैनिक ने कहा था कि सीमा पर तैनात जवानों के लिए हर दिन एक जैसा होता है। उनके लिए न कोई त्योहार होता है और न ही छुट्टी।

इस बात ने राजेंद्र पडोल को काफी प्रभावित किया। उन्होंने सोचा कि जो जवान अपने परिवार से दूर रहकर देश की रक्षा कर रहे हैं, उन्हें त्योहारों पर अपनेपन का एहसास कराया जाना चाहिए।

इसके बाद स्कूल की छात्राओं के साथ मिलकर सैनिकों को राखी भेजने की परंपरा शुरू की गई।

सैनिकों को मिलता है भावनात्मक जुड़ाव

सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए ये राखियां केवल धागा नहीं होतीं, बल्कि देशवासियों के प्यार और सम्मान का संदेश होती हैं।

छात्राओं द्वारा भेजी गई राखियां जवानों तक पहुंचने के बाद उन्हें अपने परिवार और देशवासियों के स्नेह का अनुभव होता है।

स्कूल प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी में देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है।

तिरंगा राखियों में दिखा देशप्रेम

इस वर्ष छात्राओं ने विशेष रूप से तिरंगा राखियां तैयार कीं। इन राखियों में देश के प्रति सम्मान और सैनिकों के लिए आभार की भावना दिखाई देती है।

छात्राओं ने बताया कि राखी बनाते समय उनके मन में यही भावना थी कि सीमा पर खड़े जवानों को यह महसूस हो कि पूरा देश उनके साथ है।

राखियों को भेजने से पहले स्कूल में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें छात्राओं ने देश के सैनिकों के योगदान को याद किया।

छात्राओं में दिखा उत्साह

हर साल इस अभियान में छात्राओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है। छात्राएं उत्साह के साथ राखियां तैयार करती हैं और उन्हें सैनिकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाती हैं।

छात्राओं का कहना है कि उन्हें इस बात पर गर्व महसूस होता है कि उनकी बनाई राखी देश के उन जवानों तक पहुंच रही है, जो हमारी सुरक्षा के लिए दिन-रात तैनात रहते हैं।

समाज के लिए प्रेरणादायक पहल

जलगांव की इन छात्राओं की पहल समाज के लिए प्रेरणा देने वाली है। जहां एक ओर रक्षाबंधन परिवारों के बीच प्रेम और विश्वास का पर्व है, वहीं इन छात्राओं ने इसे देश के जवानों के साथ जोड़कर एक नई मिसाल पेश की है।

31 वर्षों से जारी यह अभियान दिखाता है कि देश के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए उम्र या साधनों की जरूरत नहीं होती, बल्कि भावना और समर्पण सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।

सैनिकों के नाम भावनाओं का संदेश

इन राखियों के माध्यम से छात्राएं सैनिकों को यह संदेश देना चाहती हैं कि वे सीमा पर अकेले नहीं हैं। पूरा देश उनके साथ खड़ा है और उनकी कुर्बानी को हमेशा याद रखता है।

रक्षाबंधन के इस पर्व पर जलगांव की छात्राओं की यह पहल देशभक्ति, सम्मान और भाईचारे की अनूठी मिसाल बन गई है।

Tags: