मुंबई। मराठा आरक्षण आंदोलन के कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल ने शनिवार को महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी कि अगर महायुति सरकार मराठा समुदाय की मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो आंदोलन का नया दौर शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन के अगले चरण के तहत पटोदा से 'मिशन-3' शुरू किया जाएगा और इसके बाद मुंबई की ओर मार्च किया जाएगा।जारांगे पाटिल ने यह बयान मीडिया से बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने बताया कि जालना जिले के अंतरवाली सराटी में प्रस्तावित आंदोलन को फिलहाल टाल दिया गया है। वहां आंदोलन के लिए तैयार किया गया मंच और टेंट भी हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले अंतरवाली सराटी में होने वाले आंदोलन को अंतिम और निर्णायक आंदोलन बताया था, लेकिन अब वहां होने वाले विरोध प्रदर्शन को टाल दिया गया है।
मनोज जारांगे ने कहा कि आंदोलन को स्थगित करना मांगों से पीछे हटना नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को दूसरे तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने पटोदा से 'मिशन-3' शुरू करने और उसके बाद मुंबई की ओर जाने की बात कही।मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। जारांगे पाटिल की अगुवाई में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण और पात्र लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र देने समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन होते रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने सरकार को मांगें पूरी नहीं होने पर मुंबई में आंदोलन करने की चेतावनी दी थी।
अगस्त में जारांगे पाटिल ने अंतरवाली सराटी में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उस समय उन्होंने मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र देने, जाति वैधता से जुड़े मुद्दों और आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने समेत कई मांगें उठाई थीं। उन्होंने सरकार पर मांगों के समाधान में देरी का आरोप लगाया था।इसके बाद सरकार और जारांगे पाटिल के बीच बातचीत का दौर भी चला। 18 सितंबर को उन्होंने अपनी 20 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी थी और सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए तीन महीने का समय दिया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि आंदोलन जारी रहेगा और निर्धारित अवधि में मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन मुंबई की ओर बढ़ सकता है।
अब शनिवार को जारांगे पाटिल ने अंतरवाली सराटी में प्रस्तावित आंदोलन को टालने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वहां लगाया गया मंच और टेंट हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन को उन्होंने पहले अंतिम और निर्णायक बताया था, उसे फिलहाल स्थगित किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने आंदोलन के अगले चरण के लिए पटोदा से 'मिशन-3' शुरू करने की बात कही।मराठा आरक्षण आंदोलन में कुनबी रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र का मुद्दा प्रमुख मांगों में रहा है। जारांगे पाटिल की ओर से पहले 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड से जुड़े लोगों को प्रमाणपत्र जारी करने की मांग उठाई गई थी। सरकार ने इस संबंध में रिकॉर्ड और पारिवारिक वंशावली के सत्यापन के लिए गठित समितियों का कार्यकाल एक साल बढ़ाकर जून 2027 तक लंबित मामलों को निपटाने का निर्देश दिया था।
सरकार की ओर से मराठा समुदाय की मांगों के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर भी बातचीत की बात कही गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पहले कहा था कि सरकार की स्थिति यह है कि मराठा समुदाय को आरक्षण दिया जाए, लेकिन इससे अन्य समुदायों के मौजूदा आरक्षण पर असर नहीं पड़ना चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कहा था कि सरकार संवैधानिक और कानूनी रूप से टिकाऊ मांगों पर चर्चा के लिए तैयार है।मुंबई में आंदोलन को लेकर भी पहले विवाद सामने आया था। जारांगे पाटिल और उनके समर्थकों ने मुंबई में प्रदर्शन की योजना बनाई थी, लेकिन मुंबई पुलिस ने आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। पुलिस ने गणेशोत्सव के दौरान शहर में बड़ी भीड़ और यातायात तथा कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का हवाला दिया था।
जारांगे पाटिल ने इससे पहले अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने की अपील भी की थी। सितंबर में मुंबई मार्च की घोषणा करते हुए उन्होंने समर्थकों से किसी तरह की हिंसा, पथराव या आगजनी से दूर रहने को कहा था। उन्होंने आंदोलन को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही थी।शनिवार के बयान के बाद अब आंदोलन की आगे की रणनीति पर नजर रहेगी। जारांगे पाटिल ने स्पष्ट किया है कि अंतरवाली सराटी में प्रस्तावित आंदोलन फिलहाल नहीं होगा, लेकिन उन्होंने आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा नहीं की है। इसके बजाय उन्होंने पटोदा से 'मिशन-3' शुरू करने और इसके बाद मुंबई की ओर मार्च करने की बात कही है।
वहीं सरकार की ओर से मराठा समुदाय की मांगों पर अब तक उठाए गए कदम और आगे की प्रक्रिया इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण रहेगी। आरक्षण से जुड़े कई मुद्दों पर कानूनी और संवैधानिक पहलू भी जुड़े हुए हैं। सरकार पहले ही कह चुकी है कि वह कानूनी दायरे में रहकर समाधान निकालने के लिए बातचीत के लिए तैयार है।फिलहाल जारांगे पाटिल के ताजा बयान ने महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। अंतरवाली सराटी का आंदोलन स्थगित किए जाने के बावजूद उन्होंने सरकार के सामने आंदोलन के अगले चरण की बात रखी है। अब पटोदा से प्रस्तावित 'मिशन-3' और उसके बाद मुंबई मार्च को लेकर आगे की स्थिति आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी।