मुंबई। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गणेश मंडलों को विशेष निर्देश दिए हैं कि भक्तों को बांटे जाने वाले प्रसाद की गुणवत्ता और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि गणेश मंडल यह सुनिश्चित करें कि प्रसाद पूरी तरह शुद्ध, स्वच्छ और मिलावट से मुक्त हो। उन्होंने खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने पर जोर देते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ उनकी सेहत की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।

सीएम फडणवीस ने ये निर्देश सह्याद्रि गेस्ट हाउस में आयोजित गणेशोत्सव 2026 की कानून-व्यवस्था संबंधी तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने त्योहार के दौरान व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की।

खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि गणेश मंडलों को खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा निर्धारित नियमों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने मंडलों से अपील की कि वे प्रसाद तैयार करने और वितरण के दौरान खाद्य सुरक्षा के सभी जरूरी मानकों का पालन करें।

उन्होंने कहा कि प्रसाद श्रद्धा और आस्था से जुड़ा विषय है। इसलिए इसकी गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। मंडलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रसाद बनाने में साफ-सफाई, शुद्ध सामग्री और उचित तरीके का इस्तेमाल किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गणेश मंडलों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी देने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।

मंडलों को प्रशिक्षण लेने की सलाह

फडणवीस ने कहा कि गणेश मंडलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को खाद्य सुरक्षा के न्यूनतम मानकों की जानकारी होना जरूरी है। इसके लिए उन्हें संबंधित विभागों से प्रशिक्षण लेने की सलाह दी गई है।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से मंडलों को प्रसाद तैयार करने, उसे सुरक्षित रखने और श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के बेहतर तरीकों की जानकारी मिल सकेगी। इससे त्योहार के दौरान किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या से बचा जा सकेगा।

गणेशोत्सव को मिला है राज्य उत्सव का दर्जा

मुख्यमंत्री ने कहा कि गणेशोत्सव महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस त्योहार को राज्य उत्सव का दर्जा मिला है और इसकी परंपरा, पवित्रता और अनुशासन बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि नागरिकों, गणेश मंडलों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल से ही त्योहार को सफल और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

कानून-व्यवस्था पर भी हुई चर्चा

बैठक में गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर भी चर्चा की गई। राज्य में बड़ी संख्या में गणेश मंडल सार्वजनिक स्थानों पर गणपति की स्थापना करते हैं, जहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

ऐसे में प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर बड़ी जिम्मेदारी होती है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

स्वच्छता और अनुशासन पर जोर

मुख्यमंत्री ने गणेश मंडलों से स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहार के दौरान पर्यावरण और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

उन्होंने मंडलों से अपील की कि वे प्रशासन के साथ सहयोग करें और ऐसे आयोजन करें, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके।

प्रशासन की तैयारियां शुरू

गणेशोत्सव में हर साल बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। मुंबई सहित महाराष्ट्र के कई शहरों में गणेश उत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं।

सरकार का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह के साथ-साथ सुरक्षा और स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जाए। प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर दिए गए निर्देश इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

गणेशोत्सव 2026 को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य सरकार, प्रशासन और गणेश मंडलों के बीच समन्वय पर विशेष जोर दिया जा रहा है।