बैतूल वन विभाग में रिश्वत लेते दो कर्मचारी गिरफ्तार, प्रमोशन के लिए मांगे थे 55 हजार रुपये
बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पश्चिम वन मंडल कार्यालय परिसर में पदोन्नति के बदले रिश्वत लेने के आरोप में दो कर्मचारियों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। भोपाल लोकायुक्त की टीम ने कंप्यूटर ऑपरेटर अभय सिंह तोमर और सहायक ग्रेड-2 माखनलाल पवार को 55 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई सोमवार को पश्चिम वन मंडल बैतूल के डीएफओ कार्यालय परिसर में की गई। दोनों कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने एक वन रक्षक से प्रमोशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग की थी।
प्रमोशन के नाम पर मांगी गई थी रिश्वत
भोपाल लोकायुक्त के डीएसपी कविंद्र सिंह चौहान ने बताया कि वन रक्षक सुकांत पाठक ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया से जुड़े काम को आगे बढ़ाने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर अभय सिंह तोमर और सहायक ग्रेड-2 माखनलाल पवार ने 55 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले की जांच की और आरोपों की पुष्टि के लिए कार्रवाई की योजना बनाई। जांच में रिश्वत मांगने की बात सामने आने के बाद ट्रैप की तैयारी की गई।
कार्यालय परिसर में हुई कार्रवाई
लोकायुक्त टीम ने योजना के अनुसार सोमवार को डीएफओ पश्चिम वन मंडल कार्यालय परिसर में कार्रवाई की। शिकायतकर्ता को रिश्वत की राशि के साथ भेजा गया।
जैसे ही दोनों कर्मचारियों ने 55 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, वहां मौजूद लोकायुक्त टीम ने उन्हें पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान दोनों कर्मचारियों के पास से रिश्वत की राशि बरामद की गई।
लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि दोनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
विभाग में मचा हड़कंप
वन विभाग कार्यालय में लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई।
लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने पर जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाती है।
शिकायत के आधार पर हुई कार्रवाई
लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि शिकायतकर्ता की सूचना के आधार पर पूरी प्रक्रिया कानूनी तरीके से पूरी की गई। रिश्वत लेने के दौरान दोनों कर्मचारियों को पकड़ा गया, जिससे मामले में पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं।
अब आगे की कार्रवाई के तहत आरोपियों से पूछताछ की जाएगी और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जाएगी।
सरकारी काम के बदले रिश्वत पर सख्ती
सरकारी विभागों में काम कराने के नाम पर रिश्वत मांगने के मामलों को लेकर लोकायुक्त लगातार कार्रवाई कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों को किसी भी सरकारी काम के लिए रिश्वत देने की जरूरत नहीं है और ऐसी मांग होने पर शिकायत करनी चाहिए।
लोकायुक्त ने लोगों से अपील की है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
आगे की जांच जारी
फिलहाल दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लोकायुक्त टीम मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य जानकारियों की जांच कर रही है।
जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या दोनों कर्मचारियों ने इससे पहले भी किसी अन्य व्यक्ति से इसी तरह रिश्वत की मांग की थी या नहीं।
बैतूल में हुई इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। लोकायुक्त अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि रिश्वत लेने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।