इंदौर : साइबर ठगी के लेनदेन में इस्तेमाल करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने के आरोप में शनिवार को पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में सात लोगों को गिरफ्तार किया। हीरा नगर पुलिस ने कथित रूप से बैंक खाते किराए पर देने वाले चार आरोपियों को पकड़ा है, जबकि विजय नगर पुलिस ने म्यूल और फर्जी बैंक खातों की खरीद-बिक्री के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया। दोनों कार्रवाइयों के दौरान बड़ी संख्या में सिम कार्ड, एटीएम और डेबिट कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक तथा मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिलने के बाद दोनों थाना क्षेत्रों में अलग-अलग कार्रवाई की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कुछ लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल संदिग्ध रकम प्राप्त करने और उसे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जा रहा था। आरोप है कि बैंक खाताधारक अपने खाते, एटीएम कार्ड और अन्य बैंकिंग दस्तावेज दूसरे लोगों को उपलब्ध करा रहे थे। इसके बदले उन्हें कमीशन या तय रकम दिए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि मामले से जुड़े पूरे नेटवर्क और रकम के संबंध में विस्तृत जांच जारी है।

हीरा नगर पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा

हीरा नगर पुलिस ने साइबर फ्रॉड के लेनदेन के लिए बैंक खाते किराए पर देने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। तलाशी के दौरान संदिग्धों के पास से सैकड़ों सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक मिलने की जानकारी सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और सिम कार्ड बरामद होने के बाद पुलिस को आशंका है कि इनका इस्तेमाल कई संदिग्ध खातों के संचालन में किया जा रहा था।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद बैंक खाते किन लोगों के नाम पर खोले गए थे और उनमें अब तक कितनी रकम का लेनदेन हुआ है। इसके लिए खातों की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और डिजिटल गतिविधियों का परीक्षण किया जा सकता है। खातों में आने वाली रकम का स्रोत और उसे आगे भेजे जाने वाले खातों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि जिन व्यक्तियों के नाम पर खाते खोले गए, उन्हें खाते के इस्तेमाल की वास्तविक जानकारी थी या उनके दस्तावेजों का किसी अन्य तरीके से उपयोग किया गया। पुलिस आरोपियों के संपर्कों और संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। जब्त मोबाइल फोन में मौजूद चैट, कॉल रिकॉर्ड और लेनदेन से संबंधित संदेश भी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

विजय नगर पुलिस की कार्रवाई में तीन गिरफ्तार

दूसरे मामले में विजय नगर पुलिस ने कथित म्यूल और फर्जी बैंक खातों की खरीद-बिक्री के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से सिम कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम अथवा डेबिट कार्ड और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। पुलिस का आरोप है कि ये लोग बैंक खातों को प्राप्त करने और उन्हें साइबर फ्रॉड से जुड़े लोगों तक पहुंचाने की गतिविधि में शामिल थे।

साइबर अपराध की भाषा में ऐसे बैंक खाते, जिनका इस्तेमाल अपराध से प्राप्त रकम मंगाने, कुछ समय रखने या आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है, आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहे जाते हैं। कई मामलों में खाताधारक कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, मोबाइल सिम, एटीएम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को दे देता है। इसके बाद खाते का नियंत्रण साइबर ठगों या उनके सहयोगियों के पास पहुंच जाता है।

ठगी की रकम म्यूल अकाउंट में आने के बाद उसे कई खातों में बांटकर भेजा जा सकता है या एटीएम और दूसरे माध्यमों से निकाल लिया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य रकम के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचने वाली कड़ी को जटिल बनाना होता है। ऐसे खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन निवेश, डिजिटल गिरफ्तारी, नौकरी, लोन, इनाम, पार्सल या अन्य प्रकार की साइबर ठगी से प्राप्त राशि के लेनदेन में किया जा सकता है। वर्तमान मामलों में किस तरह की ठगी की रकम का लेनदेन हुआ, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

बैंक खातों की पूरी श्रृंखला खंगालने की तैयारी

दोनों मामलों में बरामद सामग्री से पुलिस अब बैंक खातों की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है। पासबुक और चेकबुक से संबंधित शाखाओं, खाताधारकों तथा लेनदेन का विवरण जुटाया जाएगा। वहीं, सिम कार्ड किस पहचान पत्र के आधार पर जारी किए गए और उनका उपयोग किन मोबाइल उपकरणों में हुआ, इसकी भी पड़ताल की जा सकती है।

जब्त मोबाइल फोन आरोपियों और साइबर ठगी के कथित संचालकों के बीच संपर्क का पता लगाने में अहम साबित हो सकते हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार लोग केवल खाते उपलब्ध कराते थे या रकम निकालने, उसे दूसरे खातों में भेजने और आगे पहुंचाने में भी उनकी भूमिका थी। यह भी पता लगाया जा रहा है कि प्रत्येक बैंक खाते के बदले कितना कमीशन तय किया जाता था और इस नेटवर्क में अन्य कितने लोग शामिल हो सकते हैं।

पुलिस संबंधित बैंकों से संपर्क कर संदिग्ध खातों को चिह्नित करने और जरूरत पड़ने पर उनमें मौजूद रकम को होल्ड कराने की कार्रवाई कर सकती है। जिन साइबर फ्रॉड शिकायतों में इन खातों का उल्लेख है, उनका भी मिलान किया जाएगा। अलग-अलग राज्यों या क्षेत्रों से शिकायतें जुड़ी मिलने पर संबंधित एजेंसियों से जानकारी साझा की जा सकती है।

कमीशन के लालच में खाता देना पड़ सकता है भारी

इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर लोगों को अपने बैंक खाते, सिम कार्ड और एटीएम कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं देने की सलाह दी गई है। मामूली कमीशन के बदले खाता उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है। बैंक खाते से होने वाले प्रत्येक संदिग्ध लेनदेन की प्रारंभिक जिम्मेदारी खाताधारक से जुड़ती है, इसलिए बैंकिंग जानकारी की सुरक्षा जरूरी है।

लोगों को ओटीपी, एटीएम पिन, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और चेकबुक किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। खाते में अचानक संदिग्ध रकम आने या अनजान लेनदेन होने पर तत्काल बैंक और संबंधित प्राधिकरण को सूचना देनी चाहिए। पुलिस की दोनों कार्रवाइयों में गिरफ्तार सातों लोगों से पूछताछ कर इस कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों का पता लगाया जा रहा है।

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