भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के करीब तीन साल बाद उमरिया जिले में प्रस्तावित जनजातीय कला केंद्र के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए बजट और जमीन आवंटित कर दी है। यह केंद्र ताला-मानपुर रोड पर 2.5 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा। चयनित स्थान जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर और विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ नेशनल पार्क के नजदीक है।

इस जनजातीय कला केंद्र का उद्देश्य गोंड, बैगा और कोल समुदायों की समृद्ध संस्कृति, जीवनशैली, कला और परंपराओं को एक मंच पर प्रदर्शित करना है। इसके माध्यम से बांधवगढ़ आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को वन्यजीव पर्यटन के साथ स्थानीय जनजातीय विरासत से परिचित कराने की योजना है। सरकार इस परियोजना को जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।

 जमीन आवंटन पूरा हो चुका है और कला केंद्र के निर्माण के लिए करीब 13 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। परियोजना के मूर्त रूप लेने के बाद पर्यटक गोंड, बैगा और कोल समुदायों की कला तथा जीवनशैली की झलक एक ही परिसर में देख सकेंगे। 

दिसंबर 2023 में हुई थी घोषणा

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिसंबर 2023 में उमरिया जिले की आधिकारिक यात्रा के दौरान जनजातीय कला केंद्र स्थापित करने की घोषणा की थी। इसके पीछे विचार था कि जिले की जनजातीय पहचान को पर्यटन से जोड़ा जाए और स्थानीय कला-संस्कृति को व्यापक स्तर पर पहचान मिले।

उमरिया और बांधवगढ़ का क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता तथा वन्यजीव पर्यटन के लिए पहले से प्रसिद्ध है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक बाघ और जंगल देखने के लिए पहुंचते हैं। अब प्रस्तावित कला केंद्र के माध्यम से उन्हें स्थानीय जनजातीय समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर भी मिल सकेगा।

घोषणा के बाद परियोजना के लिए उपयुक्त स्थान, बजट और निर्माण संबंधी प्रक्रिया पर काम किया गया। अब ताला-मानपुर रोड पर 2.5 एकड़ जमीन आवंटित होने से केंद्र के निर्माण की दिशा में प्रशासनिक प्रगति हुई है।

गोंड बैगा और कोल संस्कृति पर रहेगा फोकस

प्रस्तावित कला केंद्र में विशेष रूप से गोंड, बैगा और कोल जनजातियों की संस्कृति को स्थान देने की योजना है। इन समुदायों की अपनी विशिष्ट कला, लोक परंपराएं, रहन-सहन, मान्यताएं और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली है। केंद्र के माध्यम से इन विशेषताओं को व्यवस्थित रूप से पर्यटकों के सामने प्रस्तुत किया जा सकेगा।

जनजातीय चित्रकला, पारंपरिक शिल्प और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को प्रदर्शित करने के लिए यह केंद्र महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। स्थानीय समुदायों की विरासत को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी इसकी भूमिका रहने की उम्मीद है।

कला केंद्र का उद्देश्य केवल प्रदर्शनी स्थल तैयार करना नहीं, बल्कि पर्यटकों को जनजातीय जीवन की विविधता से परिचित कराना है। इससे स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को सम्मान मिलने के साथ उनकी कला के प्रति लोगों की समझ भी बढ़ सकेगी।

बांधवगढ़ पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

बांधवगढ़ नेशनल पार्क देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में गिना जाता है। इसका ताला प्रवेश क्षेत्र पर्यटकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। प्रस्तावित कला केंद्र ताला-मानपुर रोड पर होने के कारण बांधवगढ़ जाने वाले पर्यटकों के लिए आसानी से पहुंच योग्य सांस्कृतिक पड़ाव बन सकता है।

अब तक इस क्षेत्र में पर्यटन का मुख्य आकर्षण जंगल सफारी और वन्यजीव रहे हैं। कला केंद्र बनने के बाद इसमें स्थानीय संस्कृति का एक नया आयाम जुड़ जाएगा। पर्यटक वन्यजीवों को देखने के साथ आसपास रहने वाले समुदायों के इतिहास, कला और सामाजिक जीवन की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।

इस पहल से पर्यटकों के क्षेत्र में ठहरने का समय बढ़ने और आसपास की सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी रुचि पैदा होने की संभावना है। इससे पर्यटन का लाभ स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और समुदायों तक पहुंचाने के अवसर तैयार हो सकते हैं।

इको-टूरिज्म से जोड़ने की योजना

कला केंद्र की परिकल्पना जनजातीय विरासत और इको-टूरिज्म को एक-दूसरे से जोड़ने के उद्देश्य से की गई है। इको-टूरिज्म का आधार पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार पर्यटन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी है। बांधवगढ़ जैसे संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्र में संस्कृति आधारित पर्यटन वन्यजीव पर्यटन का पूरक बन सकता है।

जनजातीय समुदायों का जीवन लंबे समय से जंगल, जल, जमीन और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा रहा है। उनकी पारंपरिक जानकारी और प्रकृति के साथ संबंध को कला केंद्र के माध्यम से पर्यटकों के सामने लाया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति के बीच संबंध को समझने में मदद मिलेगी।

Tags: