इंदौर। इंसानों के इलाज के लिए विदेशों से भारत आने वाले मरीजों के बारे में अक्सर सुना जाता है, लेकिन अब देश पालतू जानवरों के मेडिकल टूरिज्म का केंद्र भी बनता दिखाई दे रहा है। ऐसा ही एक अनोखा मामला इंदौर में सामने आया है, जहां श्रीलंका से नौ साल की मादा यॉर्कशायर टेरियर कुतिया ‘एनी’ मोतियाबिंद की सर्जरी कराने पहुंची है। उसकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम हो रही थी और श्रीलंका में पशुओं के लिए विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों की सीमित उपलब्धता के कारण उसकी मालकिन ने उपचार के लिए भारत को चुना।

एनी की मालकिन बेथानी एन हॉपकिंस अमेरिकी नागरिक हैं और फिलहाल श्रीलंका में रहती हैं। अपनी पालतू कुतिया की दृष्टि कम होते देखकर उन्होंने विशेषज्ञ इलाज के विकल्प तलाशने शुरू किए। जांच में पता चला कि एनी की आंखों में मोतियाबिंद है। इसके कारण उसकी आंखों के प्राकृतिक लेंस सफेद और धुंधले हो गए थे। धीरे-धीरे उसकी देखने की क्षमता भी कम हो रही थी।

बेथानी ने श्रीलंका में इलाज की संभावनाओं के बारे में जानकारी जुटाई, लेकिन वहां पालतू जानवरों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने वाले पशु नेत्र विशेषज्ञों और आवश्यक सुविधाओं की संख्या सीमित मिली। इसके बाद उन्होंने भारत के विभिन्न केंद्रों के बारे में पता किया और इंदौर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र में एनी का इलाज कराने का फैसला लिया।

जांच के बाद होगा सर्जरी का फैसला

इंदौर पहुंचने के बाद एनी की आंखों की विस्तृत जांच की जा रही है। सर्जरी से पहले पशु चिकित्सक उसकी आंखों के साथ समग्र स्वास्थ्य का आकलन करेंगे। उम्र, हृदय की स्थिति, संक्रमण की आशंका और एनेस्थीसिया देने की क्षमता जैसे पहलुओं की जांच के बाद ऑपरेशन किया जाएगा।

पालतू पशुओं में मोतियाबिंद होने पर आंख का लेंस धुंधला हो जाता है। इसके कारण रोशनी आंख के पर्दे तक ठीक तरह से नहीं पहुंच पाती और देखने की क्षमता प्रभावित होती है। बीमारी बढ़ने पर जानवर के व्यवहार में बदलाव दिखाई दे सकता है। उसे चलने, सीढ़ियां चढ़ने या आसपास रखी वस्तुओं को पहचानने में परेशानी होने लगती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर आंखों में दूसरी जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं।

पशु सर्जन और नेत्र शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र चौहान के अनुसार, उनके केंद्र में 2014 से पालतू जानवरों की मैनुअल मोतियाबिंद सर्जरी की जा रही है। वर्ष 2016 से यहां बिना टांके वाली फैको सर्जरी की सुविधा भी उपलब्ध है। फैको तकनीक में विशेष मशीन की मदद से आंख के धुंधले लेंस को हटाया जाता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार कृत्रिम लेंस लगाया जा सकता है।

भारत में सीमित हैं विशेषज्ञ केंद्र

डॉ. चौहान ने बताया कि भारत में पालतू जानवरों की आंखों की विशेष सर्जरी करने वाले केंद्र अभी सीमित संख्या में हैं। पशुओं की आंखों का इलाज सामान्य पशु चिकित्सा से अलग विशेषज्ञता मांगता है। इसके लिए नेत्र जांच के विशेष उपकरण, ऑपरेशन माइक्रोस्कोप, फैको मशीन और प्रशिक्षित चिकित्सा दल की आवश्यकता होती है।

उनके मुताबिक केंद्र में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से आए पशु चिकित्सक भी प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। अब तक श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, फिलीपींस, मॉरीशस, मालदीव और बहरीन सहित करीब 13 से 14 देशों के पशु चिकित्सक यहां प्रशिक्षण ले चुके हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य पशुओं की आंखों से जुड़ी बीमारियों की पहचान और आधुनिक तकनीक से उनका उपचार करना है।

खर्च भी भारत चुनने का बड़ा कारण

एनी को भारत लाने के फैसले के पीछे विशेषज्ञ सुविधा के अलावा इलाज का खर्च भी एक महत्वपूर्ण कारण बताया गया है। डॉ. चौहान के अनुसार, भारत में पालतू पशु की मोतियाबिंद सर्जरी पर करीब एक लाख रुपये तक खर्च हो सकता है। अमेरिका में इसी तरह के इलाज की लागत छह लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

चिकित्सक का दावा है कि भारत में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और उपकरण अमेरिकी तथा यूरोपीय पशु चिकित्सा केंद्रों के स्तर के हैं, जबकि इलाज का खर्च अपेक्षाकृत कम है। श्रीलंका से भारत की दूरी भी अमेरिका या यूरोप के मुकाबले कम है। इससे पालतू जानवर को लंबी हवाई यात्रा से बचाया जा सकता है और परिवहन पर होने वाला खर्च भी कम होता है।

हालांकि सर्जरी की वास्तविक लागत पशु की स्थिति, एक या दोनों आंखों के इलाज, जांच और ऑपरेशन के बाद आवश्यक देखभाल पर निर्भर करती है। प्रत्येक जानवर के लिए चिकित्सकीय प्रक्रिया उसकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय की जाती है।

ऑपरेशन के बाद 10 से 15 दिन निगरानी

एनी की सर्जरी के बाद उसे करीब 10 से 15 दिनों तक इंदौर में चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा। इस अवधि में डॉक्टर उसकी आंखों की नियमित जांच करेंगे। संक्रमण से बचाव, आंखों पर दबाव की निगरानी और ऑपरेशन के बाद दृष्टि में हो रहे सुधार को देखा जाएगा। स्थिति सामान्य रहने पर वह अपनी मालकिन के साथ श्रीलंका वापस लौटेगी।

पालतू जानवर की आंख का ऑपरेशन होने के बाद विशेष सावधानी आवश्यक होती है। उसे आंख खुजलाने से रोकने के लिए सुरक्षा कॉलर पहनाया जा सकता है। निर्धारित समय पर दवाएं और आई ड्रॉप देने के साथ कुछ दिनों तक शारीरिक गतिविधियां भी सीमित रखी जाती हैं।

एनी का इलाज भारत में पालतू पशुओं के लिए विकसित हो रही विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं और मेडिकल टूरिज्म के उभरते स्वरूप को दर्शाता है।

भारत में कम लागत, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की उपलब्धता के कारण विदेशों से पालतू जानवरों को इलाज के लिए लाए जाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। एनी की कहानी केवल एक पशु के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसान और पालतू जानवर के बीच गहरे भावनात्मक रिश्ते की भी मिसाल है। बेथानी ने एनी की आंखों की रोशनी बचाने के लिए दूसरे देश की यात्रा करने का निर्णय लेकर उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी और लगाव को दिखाया है।

Tags: