मध्य प्रदेश। केंद्रीय वित्त मंत्रालय में वर्ष 2026-27 की अफीम खेती नीति को लेकर आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में मंदसौर-नीमच-जावरा क्षेत्र के अफीम किसानों की समस्याओं और मांगों को लेकर चर्चा हुई। बैठक के दौरान सांसद सुधीर गुप्ता ने किसानों से जुड़े 15 महत्वपूर्ण मुद्दे सरकार के सामने रखे और अफीम खेती से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग की।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने की। इसमें सांसदों के साथ-साथ अफीम खेती से जुड़े प्रमुख हितधारक और संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य आगामी अफीम नीति को लेकर सुझाव लेना और किसानों की समस्याओं का समाधान तलाशना था।

सांसद सुधीर गुप्ता ने बैठक में कहा कि मंदसौर, नीमच और जावरा क्षेत्र देश के प्रमुख अफीम उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां हजारों किसान अफीम की खेती से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को सरकार के सामने रखते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई नीति बनाते समय किसानों के हितों और उनकी वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

गुप्ता ने सरकार से मांग की कि मॉर्फिन का औसत मानक 3.5 प्रतिशत निर्धारित किया जाए। उन्होंने कहा कि मॉर्फिन की गुणवत्ता के आधार पर किसानों का मूल्यांकन किया जाता है, इसलिए मानकों को व्यावहारिक और किसान हितैषी बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने अफीम खेती के लाइसेंस से जुड़े नियमों में भी बदलाव की मांग रखी। सांसद ने कहा कि लाइसेंस की पात्रता केवल एक साल की पैदावार के आधार पर तय नहीं होनी चाहिए, बल्कि किसानों के पिछले पांच वर्षों के औसत प्रदर्शन को आधार बनाया जाना चाहिए। इससे मेहनती और लगातार अच्छा उत्पादन करने वाले किसानों को उचित अवसर मिल सकेगा।

सांसद ने प्राकृतिक आपदाओं, फसल चोरी और जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई बार किसान अपनी मेहनत के बावजूद बाहरी कारणों से नुकसान झेलते हैं। ऐसे मामलों में किसानों को राहत दी जानी चाहिए और केवल नुकसान के आधार पर उनका लाइसेंस रद्द नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि जिन किसानों के लाइसेंस पिछले वर्षों में रद्द हो गए हैं, उन्हें दोबारा मौका दिया जाए। इसके अलावा ऐसे पात्र किसानों को भी अफीम खेती की अनुमति देने की मांग की गई, जिन्हें योग्यता होने के बावजूद लाइसेंस नहीं मिल पाया।

सांसद सुधीर गुप्ता ने उन किसानों का मुद्दा भी उठाया, जो एनडीपीएस (NDPS) मामलों में अदालत से बरी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसान न्यायिक प्रक्रिया में निर्दोष साबित हो चुके हैं, तो उन्हें दोबारा खेती की व्यवस्था से जोड़ा जाना चाहिए।

बैठक में अफीम किसानों की आय, खेती प्रक्रिया और लाइसेंस व्यवस्था को सरल बनाने पर भी चर्चा हुई। किसानों का कहना है कि वर्तमान नियमों में कई बार ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जिनका नुकसान सीधे खेती करने वालों को उठाना पड़ता है।

सांसद ने सरकार से आग्रह किया कि अफीम नीति तैयार करते समय किसानों के अनुभव और जमीनी समस्याओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि नियमों में सुधार से न केवल किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि अफीम उत्पादन व्यवस्था भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

अफीम खेती भारत में नियंत्रित कृषि गतिविधियों में शामिल है और इसके लिए सरकार की ओर से लाइसेंस जारी किए जाते हैं। किसानों को निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार खेती करनी होती है। ऐसे में लाइसेंस प्रक्रिया और उत्पादन मानकों को लेकर किसानों की मांगें लंबे समय से चर्चा में रही हैं।

बैठक में रखे गए सुझावों पर अब वित्त मंत्रालय और संबंधित विभाग विचार करेंगे। आने वाली अफीम खेती नीति में किसानों की मांगों को कितना स्थान मिलता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

मंदसौर-नीमच-जावरा क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नई नीति तैयार करेगी और लंबे समय से लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

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