इंदौर। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद इंदौर की इन्फ्लुएंसर प्रकृति गौर के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। वायरल वीडियो में उन्हें कथित तौर पर एक ट्रैफिक सिग्नल पर जेब्रा क्रॉसिंग के बीच लेटे हुए देखा गया था। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस तरह की गतिविधि को लेकर सवाल उठाए और यातायात व्यवस्था तथा सड़क सुरक्षा के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैये की आलोचना की।

मामला सामने आने के बाद टुकोगंज पुलिस ने प्रकृति गौर को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पुलिस ने पूछताछ के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270 और 285 के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने जांच के हिस्से के तौर पर उनका मोबाइल फोन भी जब्त किया है। अब पुलिस वायरल वीडियो से जुड़े तथ्यों और घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

वायरल वीडियो के बाद शुरू हुई कार्रवाई

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में प्रकृति गौर को ट्रैफिक सिग्नल पर स्थित जेब्रा क्रॉसिंग पर लेटे हुए दिखाया गया। वीडियो सामने आने के बाद यह तेजी से लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने सड़क पर इस तरह की गतिविधि को लेकर नाराजगी जताई।

लोगों का कहना था कि ट्रैफिक सिग्नल और जेब्रा क्रॉसिंग का इस्तेमाल पैदल यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए किया जाता है। ऐसे स्थान पर लेटना न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है, बल्कि सड़क पर मौजूद व्यक्ति के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है।

वायरल वीडियो पुलिस की जानकारी में आने के बाद मामले की जांच शुरू की गई। इसके बाद पुलिस ने इन्फ्लुएंसर को पूछताछ के लिए थाने बुलाया।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

टुकोगंज पुलिस ने पूछताछ के बाद प्रकृति गौर के खिलाफ BNS की धारा 270 और 285 के तहत FIR दर्ज की। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान उनका मोबाइल फोन भी जब्त किया है। बताया जा रहा है कि पुलिस वायरल वीडियो से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और घटना की पूरी परिस्थितियों की जांच कर रही है।

जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया था। साथ ही पुलिस यह भी देख रही है कि वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधि से सार्वजनिक मार्ग या यातायात व्यवस्था में किसी तरह की बाधा उत्पन्न हुई थी या नहीं।

पुलिस वायरल वीडियो के मूल स्रोत और उससे जुड़े अन्य डिजिटल कंटेंट की भी पड़ताल कर सकती है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

सोशल मीडिया पर हुई आलोचना

वीडियो वायरल होने के बाद प्रकृति गौर को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी बरतने की बात कही। लोगों का कहना था कि सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी गतिविधियां नहीं की जानी चाहिए, जिनसे दूसरे लोगों को परेशानी या खतरा हो सकता है।

इंटरनेट मीडिया पर किसी वीडियो के तेजी से फैलने के कारण संबंधित व्यक्ति का व्यवहार बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच जाता है। ऐसे में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की गतिविधियों को लेकर जिम्मेदारी का सवाल भी उठता है।

गौर ने जारी किया दूसरा वीडियो

ऑनलाइन आलोचना के बाद प्रकृति गौर ने एक और वीडियो जारी कर घटना पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें घटना पर अफसोस है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उनके पहले वीडियो को संदर्भ से हटकर पेश कर रहे हैं।

गौर की ओर से जारी किए गए स्पष्टीकरण के बाद भी पुलिस की जांच जारी है। पुलिस मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

सड़क सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक सड़कों और ट्रैफिक सिग्नल पर सोशल मीडिया कंटेंट तैयार करने को लेकर सवाल खड़े किए हैं। आजकल वायरल वीडियो और रील बनाने के लिए लोग सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल करते हैं। कई बार ऐसे वीडियो बनाने के दौरान यातायात और सुरक्षा संबंधी नियमों की अनदेखी की जाती है।

विशेषज्ञों और यातायात व्यवस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि सड़क पर किसी भी तरह की गतिविधि करते समय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ट्रैफिक सिग्नल और जेब्रा क्रॉसिंग जैसे स्थानों पर विशेष सावधानी जरूरी है, क्योंकि यहां वाहन और पैदल यात्रियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।

पुलिस की कार्रवाई के बाद अब यह मामला कानूनी जांच के दायरे में है। मोबाइल फोन जब्त किए जाने के बाद पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर सकती है। वायरल वीडियो की सत्यता, उसके संदर्भ और घटना के दौरान पैदा हुई परिस्थितियों के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी।

फिलहाल प्रकृति गौर के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मामले ने सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर फिर से चर्चा पकड़ ली है। एक ओर पुलिस घटना के कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर गौर की ओर से घटना पर खेद जताते हुए इसे संदर्भ से अलग प्रस्तुत किए जाने का दावा किया गया है। अब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और मामले में आगे किस तरह की कार्रवाई होती है।

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