Bhopal भोपाल। मध्य प्रदेश की सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष मना रही है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी का आरोप है कि राज्य की सरकार किसानों और खेतों की बदहाली को छुपाने के लिए प्रचार पर जोर दे रही है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट को “किसान कल्याण” का बजट बताए जाने पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि अन्नदाता के प्रति समर्पण का ढोल पीटने से खेतों की बदहाली छिपाई नहीं जा सकती। सरकार जिस “खेतों के सशक्तिकरण” का दावा कर रही है, वहीं हकीकत यह है कि प्रदेश का किसान घटती वास्तविक आय, बढ़ती लागत, फसल जोखिम और कर्ज के दुष्चक्र से जूझ रहा है।
प्रदेश कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि कृषि क्षेत्र में वृद्धि के दावे तब खोखले लगते हैं जब किसानों की शुद्ध आय लागत के अनुपात में नहीं बढ़ती। डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक और बिजली की लागत पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी है, जबकि समर्थन मूल्य पर पूरी और समयबद्ध खरीदी सुनिश्चित नहीं हो पाती। फसल कटने के बाद भुगतान में देरी, भंडारण की कमी और बाजार में उचित मूल्य न मिलना किसानों को साहूकारों और बैंकों के कर्ज पर निर्भर बनाता है।
पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के वादे से पीछे हट चुकी है और अब केवल आंकड़ों की प्रस्तुति से भ्रम पैदा किया जा रहा है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच किसानों और कृषि श्रमिकों की आत्महत्या के मामलों पर सरकार को स्पष्ट और पारदर्शी जवाब देना चाहिए। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्टें लगातार इस तथ्य की पुष्टि करती हैं कि किसान और कृषि श्रमिक आत्महत्या की समस्या एक गंभीर राष्ट्रीय संकट है। ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार को बताना चाहिए कि संकटग्रस्त परिवारों के पुनर्वास, कर्ज राहत और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी ने यह भी कहा कि यदि बजट वास्तव में “किसान कल्याण” के लिए है, तो सरकार को विज्ञापन अभियान नहीं, बल्कि न्यूनतम स र्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, सिंचाई विस्तार, शून्य ब्याज कृषि ऋण, समयबद्ध भुगतान और आपदा राहत की प्रभावी व्यवस्था लागू करनी चाहिए। कांग्रेस अन्नदाता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक मंच पर संघर्ष जारी रखेगी।
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