भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगातार हो रही बारिश ने सोमवार को शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। पिछले 24 घंटों में शहर में करीब 7 इंच बारिश दर्ज की गई, जो इस मानसून सीजन में अब तक की सबसे अधिक बारिश बताई जा रही है। तेज बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। पुराने शहर समेत अलग-अलग इलाकों में 50 से अधिक स्थानों पर पानी भरने की सूचना सामने आई है।

शनिवार रात से शुरू हुई बारिश सोमवार दोपहर तक जारी रही। इस दौरान कभी तेज तो कभी हल्की बारिश होती रही। लगातार बारिश के चलते निचले इलाकों में पानी जमा हो गया और कई सड़कों पर लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर वाहन पानी के बीच से गुजरते नजर आए।

24 घंटे में करीब 7 इंच बारिश

भोपाल में हुई इस बारिश ने मानसून के दौरान अब तक के कई रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। पिछले 24 घंटों में करीब 7 इंच बारिश होने से शहर के जलनिकासी इंतजामों पर भी दबाव बढ़ गया।

लगातार बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में नालियां और जलनिकासी मार्ग पूरी क्षमता से काम करते नजर आए। जहां पानी की निकासी तेजी से नहीं हो सकी, वहां सड़क और आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई।

बारिश का असर केवल निचले इलाकों तक सीमित नहीं रहा। शहर के कई प्रमुख मार्गों और रिहायशी क्षेत्रों में भी पानी जमा होने की शिकायतें सामने आईं।

50 से ज्यादा स्थानों पर जलभराव

बारिश के कारण पुराने शहर और राजधानी के दूसरे हिस्सों में 50 से अधिक स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आई। इनमें कई ऐसे इलाके भी शामिल हैं जहां भारी बारिश के दौरान पहले भी पानी जमा होता रहा है।

कोलार रोड, नारियलखेड़ा, शिव नगर, करोंद, बैरसिया रोड, गांधी नगर, होशंगाबाद रोड, अयोध्या बाईपास, रायसेन रोड और बैरागढ़ समेत कई क्षेत्रों में सड़कें पानी से भर गईं।

कई जगहों पर सड़क किनारे जमा पानी दुकानों और मकानों के सामने तक पहुंच गया। इससे स्थानीय लोगों को अपने घरों और प्रतिष्ठानों तक आने-जाने में परेशानी हुई।

शनिवार रात से शुरू हुई बारिश

भोपाल में शनिवार रात बारिश का सिलसिला शुरू हुआ था। इसके बाद रविवार और सोमवार को भी बारिश जारी रही। सोमवार दोपहर तक कभी तेज तो कभी हल्की बारिश होती रही।

लगातार बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट महसूस की गई। हालांकि, लोगों को उमस से राहत मिली, लेकिन भारी बारिश ने रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित किया।

सुबह कामकाज और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए घर से निकलने वाले लोगों को कई स्थानों पर जलभराव का सामना करना पड़ा। कुछ मार्गों पर वाहनों की रफ्तार भी धीमी रही।

यातायात पर पड़ा असर

शहर के प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। जलभराव वाले हिस्सों में दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। कई जगह वाहन चालकों को पानी से बचते हुए रास्ता बदलकर जाना पड़ा।

जहां पानी की गहराई अधिक थी, वहां वाहन धीरे-धीरे निकलते दिखाई दिए। जलभराव के कारण कुछ मार्गों पर यातायात का दबाव भी बढ़ा।

बारिश के दौरान शहर में ट्रैफिक प्रबंधन भी चुनौतीपूर्ण रहा। लगातार पानी गिरने के कारण सड़कों पर दृश्यता कम होने और फिसलन बढ़ने से वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी।

निचले इलाकों में ज्यादा परेशानी

भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर शहर के निचले इलाकों में देखने को मिला। यहां पानी तेजी से जमा हुआ और कई स्थानों पर जलनिकासी में समय लगा।

पुराने शहर के साथ-साथ करोंद, नारियलखेड़ा और गांधी नगर जैसे इलाकों में भी जलभराव की शिकायतें सामने आईं। स्थानीय लोगों के अनुसार, लगातार बारिश होने पर कुछ स्थानों पर पानी सड़कों से हटने में काफी समय लग जाता है।

अयोध्या बाईपास और रायसेन रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर भी जलभराव से वाहन चालकों को परेशानी हुई।

जलनिकासी व्यवस्था पर उठे सवाल

करीब सात इंच बारिश के बाद शहर के 50 से अधिक स्थानों पर जलभराव की स्थिति ने जलनिकासी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। सामान्य बारिश में जहां व्यवस्था आसानी से संभल जाती है, वहीं अत्यधिक बारिश के दौरान कई इलाकों में पानी जमा हो जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में तेजी से हो रहे निर्माण और प्राकृतिक जलनिकासी मार्गों में बदलाव भी भारी बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में बारिश के पानी की निकासी के लिए नालों और ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता बढ़ाना जरूरी हो जाता है।

प्रशासन की बढ़ी जिम्मेदारी

मानसून के दौरान लगातार भारी बारिश को देखते हुए प्रशासन के सामने जलभराव वाले इलाकों में राहत और निगरानी की चुनौती बढ़ गई है। निचले इलाकों में जलस्तर पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर पानी की निकासी कराना महत्वपूर्ण होगा।

शहर में भारी बारिश के बाद लोगों की परेशानी को देखते हुए जलभराव वाले स्थानों की पहचान और वहां तत्काल व्यवस्था करना भी जरूरी है।

आगे भी बारिश की संभावना से बढ़ी चिंता

भोपाल में मानसून अभी सक्रिय है। ऐसे में अगर आने वाले दिनों में दोबारा इसी तरह भारी बारिश होती है तो शहर के जलभराव वाले इलाकों में समस्या और गंभीर हो सकती है।

लगातार बारिश से शहर के नालों, सड़कों और जलनिकासी व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर जलभराव वाले रास्तों पर वाहन चलाते समय सतर्कता जरूरी है।

फिलहाल पिछले 24 घंटों में करीब 7 इंच बारिश ने भोपाल में मानसून की स्थिति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। सीजन की अब तक की सबसे अधिक बारिश के कारण जहां शहर में मौसम सुहावना हुआ, वहीं 50 से ज्यादा स्थानों पर जलभराव ने नगर की तैयारियों और जलनिकासी व्यवस्था की परीक्षा भी ले ली।

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