इंदौर। साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने साइबर फ्रॉड करने वालों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग कमीशन के बदले अपने बैंक अकाउंट साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को जमा करने, ट्रांसफर करने और निकालने के लिए किया जाता था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े एक बैंक खाते में केवल एक महीने के भीतर करीब 3.42 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन हुए। पुलिस के अनुसार, ये खाते देशभर में दर्ज 200 से अधिक साइबर फ्रॉड की शिकायतों से जुड़े पाए गए हैं।
एरोड्रम पुलिस की जांच से हुआ खुलासा
मामले की शुरुआत एरोड्रम थाना क्षेत्र में दर्ज एक साइबर फ्रॉड केस की जांच से हुई। पुलिस एक व्यक्ति से हुई करीब 1.44 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की जांच कर रही थी।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम जिन बैंक खातों में पहुंची थी, वे सामान्य खाताधारकों के नाम पर थे, लेकिन उनका इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा था।
इसके बाद पुलिस ने बैंक खातों की गतिविधियों, लेन-देन और खाताधारकों की भूमिका की जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले लोगों का नेटवर्क सामने आया।
कमीशन के बदले देते थे बैंक खाते
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन दिया जाता था।
इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से मिली रकम को छिपाने, अलग-अलग खातों में भेजने और बाद में निकालने के लिए किया जाता था। पुलिस ने बताया कि ऐसे खातों को आमतौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।
म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर अपराधी सीधे अपने नाम से लेन-देन करने से बचते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए असली आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
एक खाते में करोड़ों का लेन-देन
पुलिस जांच में सामने आया कि एक संदिग्ध बैंक खाते में केवल एक महीने के दौरान करीब 3.42 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस खाते से कितने लोगों को रकम भेजी गई और इसमें कौन-कौन से साइबर अपराध जुड़े हुए हैं।
पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
200 से ज्यादा साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े खाते
DCP (जोन-1) नरेंद्र रावत ने बताया कि जांच में सामने आए बैंक खाते देशभर में दर्ज 200 से अधिक साइबर फ्रॉड शिकायतों से जुड़े पाए गए हैं।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आरोपी केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि बड़े साइबर अपराध नेटवर्क के संपर्क में थे। पुलिस अब इन खातों के जरिए जुड़े अन्य लोगों की जानकारी भी जुटा रही है।
ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग में भी इस्तेमाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल केवल साइबर ठगी तक सीमित नहीं था। आरोपियों ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग से आने वाली रकम को भी इन खातों के जरिए लेने और ट्रांसफर करने में मदद की।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और किन-किन राज्यों तक इसकी पहुंच है।
डिजिटल सबूत जुटा रही पुलिस
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के अलावा पुलिस उनके मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य जानकारी की जांच कर रही है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने कितने बैंक खाते उपलब्ध कराए थे और उन्हें इसके बदले कितना पैसा मिला।
इसके अलावा साइबर अपराधियों से आरोपियों के संपर्क और बातचीत के तरीकों की भी जांच की जा रही है।
साइबर अपराध रोकने में बड़ी चुनौती
साइबर अपराधों में म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है। अपराधी ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं जो पैसे के लालच में अपना बैंक खाता उपलब्ध करा देते हैं।
पुलिस का कहना है कि लोग किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या डिजिटल बैंकिंग जानकारी साझा न करें। ऐसे मामलों में खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराधियों के इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
पुलिस अब उन साइबर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जो इन म्यूल अकाउंट का असली इस्तेमाल कर रहे थे।
16 आरोपियों की गिरफ्तारी और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई में बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।